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एयर इंडिया को खरीदने वाले टाटा ग्रुप को अब भारत सरकार 302 करोड़ रुपए क्यों देगी?

एयर इंडिया ने मंत्रालयों और विभागों को उधार टिकट देना भी बंद कर दिया है.

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केंद्र को एयर इंडिया को VVIP लोगों के उड़ानों के लिए 33.6 करोड़ और अन्य सरकारी विभागों का 268.8 करोड़ रुपए लौटाने हैं.
भारत सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों को एयर इंडिया का 3 सौ करोड़ से भी ज़्यादा बक़ाया चुकाना है. बक़ाया इतना ज़्यादा है कि केंद्र सरकार ने सब मंत्रालयों और विभागों से कह दिया है कि अब एयर इंडिया से यात्रा करनी है तो पैसा देकर टिकट ख़रीदिए और यात्रा करिए. सरकार यात्रा का ख़र्च नहीं उठाएगी क्योंकि एयर इंडिया अब केंद्र सरकार के हाथ से निकलकर जा रही है टाटा समूह के पास. और ये सब बकाए की जानकारी कैसे मिली? नेवी के रिटायर्ड अफ़सर लोकेश बत्रा द्वारा दायर की गयी RTI के ज़रिए.
अब इसमें एक और जानकारी नत्थी है. जानकारी ये कि सबसे अधिक उधारी में यात्रा विदेश मंत्रालय के खाते पर की गयी है.
थोड़ा बैकग्राउंड जानिए. साल 2009 से भारत सरकार के मंत्रालयों/विभागों के अधिकारी सरकारी खर्च पर एयर इंडिया में यात्रा कर सकते थे. टिकट का खर्च बाद में एयर इंडिया और सरकार के बीच सेटल होता था. लेकिन अब टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया खरीद ली है. तो सरकार ने सभी मंत्रालयों और विभागों से एयर इंडिया का बकाया तुरंत चुकाने को कहा है. और ये बक़ाया है 302 करोड़ रुपए का. RTI की कहानी लोकेश बत्रा ने 2 अप्रैल 2021 को RTI दायर की थी. इस RTI का जवाब उन्हें 14 अक्टूबर 2021 को मिला. एयर इंडिया ने कहा कि कोरोना वायरस की भयावह दूसरी लहर थी, इसलिए जवाब देने में इतना समय लग गया. जवाब में दो अलग-अलग श्रेणी के लिए अलग-अलग बकाया राशि की जानकारी दी गई है. VVIP उड़ानों का बक़ाया और विभागों, मंत्रालयों और एजेंसियों के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा की गयी यात्राओं का बक़ाया. कब तक का बक़ाया? 31 जुलाई, 2021 तक का. 
पहले VVIP उड़ान के बकाए का हिसाब जानिए. 
# रक्षा मंत्रालय – लगभग 6 करोड़ 10 लाख का बक़ाया. (ये राष्ट्रपति की उड़ानों की बकाया राशि है.) 
# गृह मंत्रालय – 7 करोड़ 10 लाख का बक़ाया. (ये प्रधानमंत्री के साथ कैबिनेट सेक्रेटरी के उड़ानों का बकाया है.)
 # विदेश मंत्रालय – 20 करोड़ 37 लाख का बक़ाया. 
अब इस लगभग 20 करोड़ की राशि में से 10.22 करोड़ रुपये उप-राष्ट्रपति की उड़ानों का ख़र्च है. 7.21 करोड़ अन्य देशों में फ़ंसे भारतीयों वो वापस लाने का खर्च. और लगभग 3 करोड़ रुपए विदेश के कुछ चंद गणमान्य लोगों के उड़ानों पर खर्च हुए थे. इन सबको मिलाकर होता है 33.6 करोड़. 
इसके अलावा भारत सरकार के अलग-अलग विभाग- इसमें भारतीय दूतावास, सरकारी विभाग, एजेंसियां, लोकसभा सचिवालय, राज्य सभा सचिवालय आदि की कुल बकाया राशि 268.8 करोड़ रुपए है. फिर से बता दें कि ये राशि 31 मार्च 2021 तक की है. वहीं, बुधवार 27 अक्टूबर को वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों, सरकारी विभागों और राज्यसभा, लोकसभा सचिवालय को एक चिट्ठी लिखी. जिसमें बताया गया था कि एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया चल रही है. ऐसे में एयर इंडिया ने हवाई टिकटों की खरीद के लिए क्रेडिट सुविधा देना बंद कर दिया है. इसके अलावा चिट्ठी में लिखा गया था,
“सभी मंत्रालयों/विभागों को एयर इंडिया का बकाया तुरंत चुकाने का निर्देश दिया जाता है. एयर इंडिया से हवाई टिकट अगले निर्देश तक नकद में खरीदे जा सकते हैं.”
बता दें कि एयर इंडिया को टाटा ग्रुप ने 8 अक्टूबर 2021 को ख़रीदा था. एयर इंडिया को अपना बनाने के लिए टाटा ग्रुप ने सबसे अधिक 18 हजार करोड़ रुपए की बोली लगाई थी. बिडिंग में जीत गये. सरकारी घाटे से लदी फ़दी एयर इंडिया आ गयी टाटा के पास.

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