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सिसोदिया ने कहा, मेरे अफसर के घर केंद्र सरकार ने चोरी कराई

दिल्ली के डिप्टी सीएम के मीडिया सलाहकार के घर चोरी हुई है. सामान चोरी नहीं हुआ. जरूरी कागजात चोरी हो गए हैं.

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फोटो - thelallantop
अरुणोदय प्रकाश डिप्टी चीफ मिनिस्टर मनीष सिसोदिया के मीडिया एडवाइजर हैं, उनके घर में चोर घुस गए और कोई सामान नहीं लेकर गए. बस कुछ जरूरी कागजात ले गए. मनीष सिसोदिया ने सेंटर गवर्नमेंट पर चोरी का इल्जाम लगा दिया है. मनीष सिसोदिया का कहना है, पहले हमारे दफ्तर पर सीबीआई की रेड डलवाई. कुछ नहीं मिला. अब चोरी कराने लगे हैं. घरों में सीबीआई को तो भेज नहीं सकते तो चोरी की प्लानिंग कर डाली. उन्होंने पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार वर्मा को लेटर लिखा, ताकि इसकी पूरी जांच की जाए. शेख सराय में रहने वाले अरुणोदय प्रकाश ने मालवीय नगर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वह ऑफिस के काम में बिजी थे और दो दिन से घर नहीं गए थे. जब वो घर पहुंचे तो उन्हें चोरी का पता चला. उन्होंने घर की तलाशी ली तो लैपटॉप, मोबाइल, म्यूजिक सिस्टम अपनी जगह मौजूद थे. चोर उन्हें चुराकर नहीं ले गए थे. लेकिन जरूरी कागजात चोरी हो गए. मनीष सिसोदिया का का कहना है कि अरुणोदय के घर से सामान चोरी नहीं हुआ और सिर्फ वो ही कागजात चोरी हो गए जो सीएम और डिप्टी सीएम से संबंधित थे. भला इनमें किसका इंटरेस्ट हो सकता है. ये चोरी सेंटर गवर्नमेंट के इशारे पर हुई है.

पीएम की मीटिंग में मुझे मोबाइल नहीं ले जाने दिया गया: केजरीवाल

इंटर स्टेट काउंसिल की मीटिंग थी. पीएम नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्रियों के साथ बात करनी थी. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का कहना है कि उन्हें मोबाइल के साथ मीटिंग में नहीं जाने दिया गया. उन्होंने कहा, 'ऐसा मेरे साथ ही नहीं हुआ, और भी मुख्यमंत्रियों को मोबाइल ले जाने पर रोका, जबकि कुछ सीएम मोबाइल लेकर जा रहे थे. जब ममता बनर्जी ने शिकायत की तो उन्हें मोबाइल ले जाने दिया गया. लेकिन केजरीवाल को फिर भी मोबाइल नहीं ले जाने दिया गया. सिक्योरिटी अफसर ने पीएम की सुरक्षा का हवाला देते हुए मोबाइल बाहर रखवा लिए. केजरीवाल ने कहा कि मैंने अपनी स्पीच में ये मुद्दा वहां उठाया. मैंने पीएम से पूछा कि क्या आपको कुछ मुख्यमंत्रियों से सुरक्षा का खतरा है? केजरीवाल ने ये बातें 'अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी' बुक लॉन्चिंग के वक्त कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में कही. ये बुक आईआईटी खड़गपुर में साथ पढ़े प्राण कुरूप ने लिखी है.

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