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'रोहिंग्या अवैध प्रवासी, भारत में बसने का अधिकार नहीं', सुप्रीम कोर्ट में बोली मोदी सरकार

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया. इसमें कहा गया, ‘भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और सीमित संसाधनों के साथ विकासशील देश है. हमें पहले अपने नागरिकों को प्राथमिकता देना जरूरी है... रोहिंग्या भारत में बसने के मौलिक अधिकार का दावा नहीं कर सकते हैं.’

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भारत में शरणार्थियों के तौर पर विदेशियों को पूरी तरह से नहीं अपनाया जा सकता है- SC (फोटो- इंडिया टुडे)

CAA को लेकर मची सियासी और अदालती बहस के बीच केंद्र सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में शरण देने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई में सरकार ने रोहिंग्या शरणार्थियों को एक बार फिर 'अवैध' प्रवासी बताया है. केंद्र ने कहा कि रोहिंग्या मुस्लिम भारत में रहने या बसने के मौलिक अधिकार का दावा नहीं कर सकते हैं. उनको लेकर मोदी सरकार का कहना है कि भारत में शरणार्थी के नाम पर विदेशियों को पूरी तरह से नहीं अपनाया जा सकता है.

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याचिका में क्या कहा गया?

स्वतंत्र पत्रकार प्रियाली सूर (Priyali Sur) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक याचिका में उन रोहिंग्याओं को रिहा करने का निर्देश देने की मांग की गई थी, जिन्हें जेलों या बाल सुधार गृहों में बिना कोई कारण बताए या विदेशी अधिनियम (Foreigners Act) के प्रावधानों के कथित उल्लंघन के लिए हिरासत में लिया गया है.

लाइव लॉ से जुड़ीं ज्ञानवी खन्ना की रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि उत्पीड़न और भेदभाव के बावजूद रोहिंग्याओं को भारत में आधिकारिक तौर पर 'अवैध अप्रवासी' के रूप में लेबल किया गया है. उन्हें अमानवीय व्यवहार और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है. याचिकाकर्ता ने कहा कि रोहिंग्याओं को अपने खिलाफ नरसंहार के हमलों से बचने के लिए अपने देश से बाहर निकलना पड़ा था. इस पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने भी ध्यान दिया है.

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मामले को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया. इसमें कहा गया,

‘भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और सीमित संसाधनों के साथ विकासशील देश है. हमें पहले अपने नागरिकों को प्राथमिकता देना जरूरी है. विदेशी नागरिकों को केवल अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार है. वो भारत में बसने के मौलिक अधिकार का दावा नहीं कर सकते हैं.’

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केंद्र ने अपने हलफनामे में आगे कहा है कि ऐसे ज्यादातर विदेशी अवैध रूप से भारत में आए हैं. उनका अनियंत्रित तौर पर आकर बसना देश के लिए खतरा है. याचिकाकर्ता नागरिकों के एक नए वर्ग के निर्माण की मांग नहीं कर सकते हैं. केंद्र के मुताबिक उसने हमेशा कहा है कि रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थी नहीं बल्कि अवैध अप्रवासी हैं. कानून के खिलाफ शरणार्थियों को कोई मान्यता नहीं मिल सकती है. ऐसे फैसले विधायिका के विशेष अधिकार क्षेत्र में होते हैं. 

सरकार ने 2017 में संसद को बताया था कि देश में करीब 40,000 रोहिंग्या मुसलमान हैं. सरकार ने तब कहा था कि पिछले दो साल में रोहिंग्या आबादी चार गुना बढ़ गई है.

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