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रोहिंग्याओं को अवैध तरीके से भारत में दाख़िल कराने के दो आरोपी गिरफ्तार

UP ATS ने किया गिरफ्तार. एक आरोपी की लंबे समय से थी तलाश.

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UP ATS द्वारा गिरफ्तार नूर आलम और आमिर हुसैन. (फोटो- तनसीम हैदर)
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अभिषेक त्रिपाठी
9 जून 2021 (अपडेटेड: 9 जून 2021, 03:22 PM IST)
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उत्तर प्रदेश एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (UP ATS) ने 7 जून, सोमवार को दो रोहिंग्या नूर आलम और आमिर हुसैन को ग़ाज़ियाबाद से गिरफ्तार किया. नूर आलम पर आरोप है कि वह रोहिंग्या को अवैध तरीके से भारत में दाखिल करवाता था. उनके फ़र्ज़ी दस्तावेज भी बनवाता था. इससे पहले भी वो कई रोहिंग्या को बांग्लादेश से अवैध तरीके से भारत में दाखिल करा चुका है. इंडिया टुडे के तनसीम हैदर की रिपोर्ट के मुताबिक UP ATS ने इसी साल 6 जनवरी को नकली दस्तावेजों के आधार पर भारत में रह रहे म्यांमार के कुछ नागरिकों को गिरफ्तार किया था. उसी वक्त अजीजुल्लाह नाम के एक रोहिंग्या को भी गिरफ्तार किया गया था. UP ATS को अजीजुल्लाह के बहनोई नूर आलम उर्फ रफीक की भी तलाश थी. इनपुट था कि नूर आलम ही सभी गिरफ्तार रोहिंग्याओं को भारत लाने के प्लान का मास्टरमाइंड है और वही इन लोगों के फर्जी डॉक्यूमेंट्स तैयार कराता है. करीब छह महीने से जारी ये तलाश 7 जून को पूरी हुई. जब शाम को 6 बजे के करीब ATS टीम ने नूर आलम उर्फ रफीक व आमिर हुसैन को ग़ाज़ियाबाद से गिरफ्तार किया.  गिरफ्तार आरोपी आमिर हुसैन भी म्यांमार का रोहिंग्या है, जो बांग्लादेश के रास्ते अवैध रूप से भारत में आया था. नूर आलम ने आमिर हुसैन को भरोसा दिलाया था कि वह उसके भारतीय नागरिक होने के फर्जी डॉक्यूमेंट्स भी बनवा देगा. कौन हैं रोहिंग्या? ये मुस्लिमों का एक समुदाय है. सदियों से ये लोग म्यांमार में रहते आए हैं. वहां रखाइन नाम का प्रांत है. वहां की बहुमत आबादी रोहिंग्या है. रोहिंग्या कहते हैं कि वो लोग मुस्लिम व्यापारियों के वंशज हैं. करीब नौवीं सदी से इधर रह रहे हैं. 1948 में म्यांमार को आजादी मिली. तब रोहिंग्या मुसलमानों ने पहचान पत्र के लिए अप्लाई किया. नए आजाद हुए देश में उन्हें नागरिकों के कुछ अधिकार भी मिले. म्यांमार ज्यादातर रोहिंग्या को बांग्लादेशी घुसपैठिया कहता है. उसका कहना है कि रोहिंग्या असल में बांग्लादेशी किसानों की एक कौम हैं. अंग्रेजों के राज में ये लोग म्यांमार (तब का बर्मा) में आ बसे थे. उस समय म्यांमार पर भी अंग्रेजों का ही राज था. उन्होंने बड़ी तादाद में रोहिंग्या मुसलमानों को मजदूरी वगैरह के लिए म्यांमार भेजा. म्यांमार की बहुसंख्यक आबादी है बौद्ध. उनकी रोहिंग्या मुसलमानों से नहीं पटती. सरकार और सेना भी बहुसंख्यकों के साथ है. उधर बांग्लादेश कहता है कि रोहिंग्या उसके नहीं, म्यांमार के ही हैं.

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