The Lallantop

बुलंदशहर हिंसा: पुलिस ने वॉन्टेंड का पर्चा छापा और फोटो एक बेगुनाह की लगा दी

लापरवाही की हद हो गई.

Advertisement
post-main-image
बुलंदशहर पुलिस ने गलती सी किसी और का फोटो आरोपियों की लिस्ट में लगा दिया.
बुलंदशहर में पिछले दिनों हिंसा हुई. अब पुलिस इस हिंसा के आरोपियों को पकड़ने की कोशिश कर रही है. लेकिन इस कोशिश में उसने एक बड़ी चूक कर दी. हुआ ये कि घटना के बाद से फरार चल रहे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पोस्टर जारी किए गए थे. ये पोस्टर शहर भर में लगाए जाने थे. आरोपियों की जानकारी देने वालों के नाम और पहचान गुप्त रखे जाने का भरोसा भी दिलाया गया. लेकिन ये पोस्टर जारी होते ही इनमें एक खामी सामने आ गई. पोस्टर की पहली पंक्ति में दूसरे नंबर पर जिस विशाल त्यागी की फोटो और पहचान लिखी गई वो पूरी तरह गलत थी. पोस्टर में जिस विशाल त्यागी की फोटो है उसका हिंसा से कुछ लेना-देना ही नहीं है.
विशाल को जैसे ही ये पता चला कि उसका नाम वॉन्टेड की लिस्ट में आया है उसने तुरंत एडीजी ऑफिस में इसकी शिकायत की और पुलिस पर सोशल मीडिया से फोटो उठाने का आरोप लगाया. इस पोस्टर में दूसरे नंबर पर विशाल त्यागी पुत्र सुरेंद्र, निवासी- स्याना का नाम है, जबकि फोटो में जो व्यक्ति है, वह विशाल त्यागी पुत्र विजयपाल सिंह, निवासी- हिरनौट, है. हिरनौट वाले विशाल त्यागी बुलंदशहर चैरेटेबिल ब्लड बैंक के मैनेजर हैं. उनके मुताबिक वो  हिंसा वाले दिन ब्लड बैंक में ही थे. उस का सीसीटीवी फुटेज उन्होंने पुलिस को दिखाया जिसके बाद पुलिस ने अपनी गलती मानी और सुधारी भी.  बुलंदशहर हिंसा के मामले में करीब 60 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. क्या है बुलंदशहर मामला?
ये घटना 3 दिसंबर, 2018 की सुबह तकरीबन 10 बजे की है. जब बुलंदशहर में स्याना गांव के पास के दो गावों महुआ और चिंगरावटी के लोगों को जंगल में जानवरों का कंकाल दिखा. लोगों को शक हुआ कि शायद गाय मारी गई है. स्याना पुलिस चौकी को खबर की गई. पुलिस महाब गांव पहुंची. वहां 50-60 से ज्यादा लोगों की भीड़ जमा थी. लोग नाराज हो रहे थे. कह रहे थे कि पुलिस कुछ करती नहीं है. पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जाएगी. मगर गांववाले चाहते थे कि एकदम मौके पर फैसला हो जाए. वो पुलिस से उसी समय कार्रवाई करने को कह रहे थे. इसी बात को लेकर गांववालों की पुलिस टीम से बहस हो गई.
ये हैं स्याना थाना के प्रभारी सुबोध कुमार सिंह. 3 दिसंबर को सुबोध भीड़ के हाथों कत्ल कर दिए गए.
ये हैं स्याना थाना के प्रभारी सुबोध कुमार सिंह. 3 दिसंबर को सुबोध भीड़ के हाथों कत्ल कर दिए गए.

इसके कुछ देर बाद, दोपहर तकरीबन डेढ़ बजे एक भीड़ चिंगरावठी पुलिस चौकी पहुंची. जानवरों के जो हिस्से जंगल में मिले थे, लोग उन्हें ट्रैक्टर पर लादकर चौकी के सामने पहुंचे थे. उन्होंने चौकी का घेराव किया. स्याना के थाना प्रभारी सुबोध कुमार सिंह अपने साथ कुछ पुलिसवालों को लेकर वहां पहुंचे. उन्होंने ग्रामीणों को कार्रवाई का आश्वासन देते हुए इस मामले में FIR भी दर्ज कर ली. इसके बाद लोगों ने बुलंदशहर की तरफ जाने वाला हाईवे जाम कर दिया जिससे बुलंदशहर इज्तेमा के शामिल होने वाले लोग वापस आ रहे थे. पुलिस को आशंका हुई कि कहीं यहां सांप्रदायिक दंगा ना हो जाए इसके लिए भीड़ को खदेड़ने की कोशिश की. पुलिस ने लाउड स्पीकर से आवाज़ दी. कुछ लोग हटे. कुछ वहीं डटे रहे. भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया और फिर सिचुएशन आउट ऑफ़ कंट्रोल हो गई. इसी भीड़ ने इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या भी कर दी जिसके बाद मामला और ज्यादा संगीन हो गया. बुलंदशहर में इंस्पेक्टर सुबोध के आलावा सुमित नाम के एक लड़के की भी जान गई जो वहां अपने एक दोस्त को छोड़ने आया था. पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. जिसके लिए दोषियों के नाम और तस्वीरों के साथ पोस्टर जारी किए गए हैं.


वीडियो: बुलंदशहर घटना की एक-एक बात हमारी ग्राउंड रिपोर्ट से समझिए

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement