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बुधिया: हगा, भगा और अब हॉस्टल से भी भगा

'मैं सिर्फ मैराथन दौड़ने के लिए पैदा हुआ हूं. ये सब टुल्लू-पुल्लू टाइप की दौड़ मुझे नहीं सुहाती.'

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फोटो - thelallantop
2006 में 4 साल की उम्र में 65 किलोमीटर तक भागनेवाला बुधिया सिंह फिर भगा है. अबकी बार हॉस्टल से. इंडियन एक्सप्रेस ने ये पता किया है. बुधिया भुवनेश्वर के DAV इंग्लिश मीडियम स्कूल में नौवीं क्लास में पढ़ रहा है. हॉस्टल में रहता है. गर्मी की छुट्टियों में घर गया था. पर लौटा नहीं है. स्कूल ने उसके घर चिट्ठियां लिखीं पर कोई जवाब नहीं आया. इंडियन एक्सप्रेस ने बुधिया सिंह से अप्रैल 2016 में बात की थी:
मेरा हॉस्टल में मन नहीं लगता. हॉस्टल लाइफ में दौड़ने-भागने के अलावा सुबह उठ के पढ़ना भी पड़ता है. स्कूल भी जाना पड़ता है. फिर खाने में 3-4 पीस ही चिकन मिलता है. बिरंची सर तो इससे ज्यादा मुझे 4 साल की उम्र में खिलाते थे. - बुधिया सिंह
फिर हॉस्टल में बुधिया को सिर्फ डेढ़ किलोमीटर दौड़ने को मिलता है. पर बुधिया का ऐलान है कि वो सिर्फ मैराथन दौड़ने के लिए पैदा हुआ है. ये सब टुल्लू-पुल्लू टाइप की दौड़ उसे नहीं सुहाती.
मेरा बेटा मैराथन के लिए अपनी परफॉरमेंस बढ़ाना चाहता है. पर स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट सीरियस नहीं है इस बात के लिए. अगर कोई इस बात में हेल्प करेगा तो मैं बुधिया को उसके साथ रखने के लिए एकदम तैयार हूं. -मम्मी सिंह
वही बात है. कहां अपने मन से जित्ता मन उत्ता दौड़ना. और कहां स्कूल के कायदे में घंटी के हिसाब से चलना. पर बेटा, स्कूल तो स्कूल ही होता है. और मास्टर साहब, मैराथन तो मैराथन होता है. फिर बुधिया सिंह पर फिल्म भी तो आ रही है. ऐसे में वो कैसे क्या करे? पढ़िए:

दूरी 65 KM, टाइम 7 घंटे, उम्र 4 साल: कहानी बुधिया सिंह की  

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