जिन घरों में तीन-चार लौंडे होते हैं, उनमें सबसे छोटे लौंडे पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है. नालायक बनने की. जब तक मोहल्ले में 15-20 हजार की उधारी न कर ले, चोरी-छिपे बाइक ले जाकर गर्ल्स स्कूल के चक्कर न मार ले और कॉलेज में दो-चार झाम न हूल दे, तब तक क्या फायदा छोटा भाई होने का. लेकिन गुरू, छोटे भाई होकर कुछ भी करो, लेकिन पत्थरबाजी न करो. मां कसम, बाप का कलेजा चिर जाता है.
दोनों बड़े भाई इंडियन आर्मी में, छोटा भाई पत्थरबाज!
इस लौंडे में घर का सबसे छोटा बेटा होने के सारे गुण हैं.

कश्मीर से एक खबर आई है 17 साल के लड़के की. वो भी अपने घर में सबसे छोटा है. दो बड़े भाई हैं उसके और दोनों सेना में हैं, लेकिन वो खुद कश्मीर में पत्थरबाजी करता है. इस लड़के के घरवाले नॉर्थ कश्मीर में रहते हैं और इन दिनों पुलिस और नेताओं से मिन्नतें कर रहे हैं कि उनके बेटे को बख्श दिया जाए. पुलिस इस लड़के को पहचानती है और वो हमेशा रडार पर रहता है. जिस दिन दिख गया, उसी दिन कांड होने की पूरी आशंका है.
वैसे कश्मीर का हाल तो सबको पता ही है. आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद से माहौल बड़ा गर्म है वहां. कर्फ्यू तो छोटी चीज है, नाबालिग लौंडे गली-मोहल्लों से निकलकर वहां तैनात सेना पर पथराव करते हैं. इन बच्चों के अम्मी-अब्बू बड़ा परेशान रहते हैं. पता नहीं कौन है जो लड़कों को बहला-फुसलाकर उनके हाथों में पत्थर थमा देता है. लौंडे-बच्चे स्कूल जाते नहीं हैं और चौधरई किया करते हैं.
17 साल के जिस लड़के की हम बात कर रहे हैं, उसके अब्बा श्रीनगर के एक होटल में काम करते हैं. उनका एक बेटा CRPF का जवान है, जिसने माओवादियों के खिलाफ लड़ते हुए सम्मान हासिल किया था. दूसरा बेटा BSF में है. लेकिन तीसरा, तीसरे में छोटे होने के सारे गुण हैं. बवाल काटे हुए है एकदम. हुजड्ड.
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