एमपी के इंदौर शहर का लड़का है, अरुण पटेल, उम्र 12. बहुत छोटा था तभी उसकी नाक में एक इंफेक्शन हो गया था. घर वालों ने सोचा छोटी-मोटी बात है. तो पास के ही एक झोलाछाप डॉक्टर से इलाज कराने पहुंच गए. डॉक्टर ने नाक में ही सुई लगा दी. जिसके चलते अरुण की नाक गलने लगी. अरुण जब स्कूल जाता, तो बच्चे चिढ़ाते. कुछ बच्चे डरते और दूर भागते.

पर डॉक्टर तो डॉक्टर. उनके पास नए-नए तरीके होते हैं और उन्होंने ठान ली की नाक उगानी है तो उगानी ही है. बस सीने से थोड़ा मांस लिया और ऑपरेशन करके एक स्पेशल केमिकल का यूज कर उसके माथे के अंदर इंजेक्ट कर दिया. धीरे-धीरे उसके सिर पर नाक उगने लगी.

और जब पूरी-पूरी उग गई तो तीन महीने बाद फिर सिर की सर्जरी हुई जहां नाक उगा दी गई थी. वो नाक निकालकर लगा दी गई सही जगह पर.

ये सब हो पाया बहुत कठिन वाली एक सर्जरी की बदौलत. 1 साल के अंदर-अंदर 4 सर्जरी हुई इस नाक को सही जगह उगाने के लिए.

अब डॉक्टर कह रहे हैं, अभी और ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है. हम उसकी अच्छे से देख-रेख कर रहे हैं. ये सारा मामला देखने वाले डॉक्टर दास ने बताया कि उन्होंने चीन का एक ऐसा केस सुन रखा था. उसी से वो इंस्पायर हुए कि नाक मरीज के शरीर पर कहीं पर भी उगाई जा सकती है. बच्चा बहुत गरीब परिवार से है, इसलिए हमने उसके इस लंबे ऑपरेशन का खर्चा खुद उठाया. बहरहाल बच्चा नाक वापस पाकर बहुत खुश है. कहा, 'अब मैं पूरी इज्जत के साथ लोगों का सामना कर सकता हूं.'