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यूपी चुनाव से पहले बीजेपी विधायकों का रिपोर्टकार्ड 'प्राइवेट लोग' बनाएंगे

यह एजेंसी सर्वे करने वालों, IITs, दिल्ली और बेंगलुरु के बड़े कॉलेजों के इंटर्न छात्रों से मिलकर बनी है. ये लोग पार्टी के संगठन के पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय प्रभावशाली लोगों से मिलकर चुनावी माहौल और विधायकों के प्रदर्शन पर रिपोर्ट तैयार करेंगे. सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में लिखा गया है कि सर्वे टीम स्थानीय RSS पदाधिकारियों से भी बातचीत कर सकती है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गृह मंत्री अमित शाह. (ITG)

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. बीजेपी ने बाकी राज्यों की तरह यूपी में भी महीनों पहले से तैयारी शुरू कर दी है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने जमीनी स्थिति जानने और अपने मौजूदा विधायकों के कामकाज का आकलन करने के लिए एक निजी एजेंसी का सहारा लिया है. 

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यह एजेंसी सर्वे करने वालों, IITs, दिल्ली और बेंगलुरु के बड़े कॉलेजों के इंटर्न छात्रों से मिलकर बनी है. ये लोग पार्टी के संगठन के पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय प्रभावशाली लोगों से मिलकर चुनावी माहौल और विधायकों के प्रदर्शन पर रिपोर्ट तैयार करेंगे. सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में लिखा गया है कि सर्वे टीम स्थानीय RSS पदाधिकारियों से भी बातचीत कर सकती है.

रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि यह सर्वे केंद्रीय नेतृत्व ने कराया है. यह यूपी बीजेपी की रिपोर्ट से अलग होगा. 2014 के बाद से बीजेपी चुनाव से पहले निजी सर्वे एजेंसियों की मदद लेती रही है. इस बार भी सर्वे में यह देखा जाएगा कि कहीं मौजूदा विधायकों के खिलाफ नाराजगी तो नहीं है. सूत्रों का कहना है कि टिकट बंटवारे से पहले पार्टी एक और एजेंसी से अलग सर्वे भी करा सकती है.

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रिपोर्ट के मुताबिक 2022 के यूपी चुनाव में भी इसी तरह के सर्वे के आधार पर बीजेपी ने करीब 120 विधायकों के टिकट काट दिए थे. इस बार भी बड़ी संख्या में बदलाव हो सकता है, क्योंकि 2024 लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन ने बीजेपी की सीटें 62 से घटाकर 33 कर दी थीं.

बीजेपी सूत्रों ने बताया कि बाद में पार्टी ‘विस्तारक’ भी भेजेगी, जो अलग से क्षेत्रीय सर्वे कर अपनी रिपोर्ट राज्य नेतृत्व को देंगे. जानकारों का कहना है कि इस तरह की कई स्तरों वाली रणनीति से पार्टी संवेदनशील और करीबी मुकाबले वाली सीटों पर गलती से बचना चाहती है. 

बीजेपी सूत्रों का कहना है कि पहले की तरह इस बार भी टिकट देते समय जीतने की संभावना को प्राथमिकता दी जाएगी, खासकर उन सीटों पर जहां जनता में नाराजगी या सामाजिक समीकरण में बदलाव दिख रहा है.

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