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बिहार में दिल्ली से पहले आया था ऑड-इवन फॉर्मूला

लेकिन गाड़ियों के लिए नहीं.

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फोटो - thelallantop
जब केजरीवाल ने ऑड-इवन के बारे में सोचना शुरू किया था, उससे पहले ही बिहार में लागू हो चुका था ये फॉर्मूला. लेकिन गाड़ियों पर नहीं, स्कूलों पर. जिससे कम जगह में ज्यादा पढ़ाई हो सके. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक बिहार के कई सरकारी स्कूल इस फॉर्मूले को अपनाते आए हैं. या तो बच्चों की क्लास अलग-अलग शिफ्ट में लगती है, या एक दिन छोड़ के. इससे स्कूलों में कम जगह होने से बच्चों को प्रॉब्लम नहीं होती. ऐसा ही एक स्कूल है कन्हौली, सरन का एमडी हाई स्कूल जो नेशनल हाईवे 10 पर बना हुआ है. यहां लड़के और लड़कियों की क्लास अलग-अलग दिन लगती है. यहां पढ़ने वाले लड़के और लड़कियों की संख्या लगभग बराबर है. जो एक-एक दिन छोड़ के स्कूल जाते हैं. इस तरह हर बच्चा केवल आधे वर्किंग डेज में स्कूल आता है. पर स्कूल का दावा है कि आधे दिनों में ही बच्चों का सिलेबस खत्म हो जाता है. स्कूल के एक टीचर ने बताया कि ये उनका ऑड-इवन सिस्टम है. डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर अवधेश बिहारी कहते हैं "स्कूल में क्लासरूम कम हैं, और स्टूडेंट 3000 हैं. इसलिए ये अरेंजमेंट किया गया है. कई स्कूल इस समस्या से जूझ रहे हैं. हमने नए क्लासरूम बनवाने का प्रोपोजल भेजा है. हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में चीजें बेहतर हो जाएंगी." स्कूल के इस फैसले से टीचर खुश हैं. और बच्चे तो खुश हैं ही. हफ्ते में 3 छुट्टियां जो मिलती हैं.

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