भीलवाड़ा में नाबालिग से गैंगरेप (Bhilwara Gangrape) और हत्या मामले में पुलिस की लापरवाही की बात सामने आई है. मृतका के घरवालों का आरोप है कि वो थाने में बच्ची के गायब होने की रिपोर्ट लिखाने गए थे, लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया. घरवालों का दावा है कि उन्होंने खुद ही बेटी को खोजना शुरू किया और भट्टी में से हड्डियां ढूंढी.
भीलवाड़ा गैंगरेप: परिवार ने भट्टी से खुद ही ढूंढी हड्डियां, बच्ची की हत्या के बाद क्या लापरवाही हुई?
चचेरे भाई ने रात में फिर से खेत जाकर लड़की को ढूंढा. आधी रात को उन्होंने देखा कि सुबह से बंद पड़ी एक भट्टी में आग जलाई गई थी. वहीं उन्हें हड्डियां मिलीं.


मामला भीलवाड़ा के कोटड़ा जिले के नरसिंहपुरा गांव का है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो अगस्त को सुबह करीब 8 बजे 14 साल की बच्ची घर से बकरियां चराने अपनी मां के साथ निकली. मां दोपहर में मायके चली गई. वापस लौटी तो बच्ची गायब थी. उसी रात घरवालों को खेत के पास जली हुई हड्डियां और बच्ची का कड़ा मिला. पुलिस ने गैंगरेप, मर्डर और POCSO की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. मामले में अब तक सात आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है.
पुलिस कार्रवाई में देरी!इंडियन एक्सप्रेस से जुड़े दीप मुखर्जी ने इस मामले में मृतका के घरवालों से बात कर रिपोर्ट तैयार की है. 2 अगस्त की शाम को नाबालिग का चचेरा भाई गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए स्थानीय पुलिस स्टेशन गया था. उसने बताया कि वो लड़की का आधार कार्ड और राशन कार्ड लेकर थाने गया था लेकिन पुलिस रिपोर्ट लिखने के लिए बच्ची की उम्र के सबूत के तौर पर स्कूल सर्टिफिकेट और मार्कशीट मांगने लगी. पुलिस ने कथित तौर पर चचेरे भाई से अगली सुबह आने को कहा.
लड़की की मां के कहने पर चचेरे भाई ने रात में फिर से खेत जाकर लड़की को ढूंढा. आधी रात को उन्होंने देखा कि सुबह से बंद पड़ी एक भट्टी में आग जलाई गई थी. वहीं उन्हें हड्डियां मिलीं. परिवार वालों ने भट्टी के पास मौजूद कुछ खानाबदोशों को पकड़कर सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि जिन दो लोगों ने ये काम किया है वो फरार हो गए हैं. घरवालों ने बताया कि रात करीब एक बजे पुलिस वहां पहुंची.
अपराध में महिलाएं शामिलचचेरे भाई ने बताया कि जब बच्ची का शव जलाया जा रहा था तो भट्ठी के पास चार महिलाएं बैठी थीं. पुलिस ने भी बताया कि जांच से पता चला है कि गैंगरेप के दो आरोपियों की पत्नियों समेत चार महिलाओं ने नाबालिग के शव को भट्टी में जलाने में मदद की थी.
अजमेर रेंज IG लता मनोज कुमार ने बताया कि दो आरोपियों की पत्नियों को हिरासत में लिया गया है और उनमें से एक नाबालिग है.
IG ने आगे बताया कि घटना वाले दिन ड्यूटी पर मौजूद ASI और SHO की लापरवाही सामने आने के बाद उसे सस्पेंड कर दिया गया है.
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन खेतों में नाबालिग के साथ दुष्कर्म हुआ वो उसके पिता के ही हैं. चार महीने पहले उन्होंने खेत के भट्टे कोयला बनाने के लिए किराए पर दिए थे. खबर है कि जो लोग वहां काम करते हैं वही आरोपी हैं. उनका पीड़ित परिवार के घर आना जाना भी रहा है. खबर ये भी है कि प्रशासन ने खेत में संचालित हो रही सभी 5 भट्ठियों को अवैध मानते हुए JCB से तोड़ दिया.
रिपर्ट के मुताबिक, नाबालिग 5वीं क्लास तक ही पढ़ी थी. खबर है कि 11 साल की उम्र में उसका बाल विवाह कराया गया और एक साल पहले ही उसने पढ़ाई छोड़ी थी.
इधर, शव के अवशेषों के पोस्टमॉर्टम के बाद 7 अगस्त को परिवार ने बेटी का अंतिम संस्कार किया. आजतक से जुड़े प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट के मुताबकि, इस दौरान नाबालिग के पिता ने जान देने की कोशिश की. उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.
थाने के बाहर प्रदर्शन खत्मभीलवाड़ा कलेक्टर आशीष मोदी ने बयान में कहा जिला प्रशासन 15 दिनों के अंदर मामले में चार्जशीट दाखिल करेगा. इसके बाद 6 अगस्त की रात को करीब चार दिनों से थाने के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने धरना खत्म किया. प्रदर्शन करने वालों में विपक्षी पार्टी BJP के नेता भी शामिल रहे.
मामले में BJP के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी के सांसदों की चार सदस्यीय कमिटी बनाई है. इनमें सरोज पांडे, रेखा वर्मा, कांता कर्दम और लॉकेट चटर्जी शामिल हैं. चारों ने 6 अगस्त को नाबालिग के घरवालों से मुलाकात की. सांसद सरोज पांडे ने राज्य सरकार से तुरंत इस्तीफा देने की मांग की. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा,
CM गहलोत ने क्या कहा?राज्य सरकार चुप है. कांग्रेस बाकी राज्यों की बात करती है लेकिन अपने राज्य में जो हो रहा है उस पर कुछ नहीं बोल रही है. सरकार लड़की के परिवार से मिली तक नहीं. गहलोत सरकार असंवेदनशील और मरी हुई सरकार है.
CM अशोक गहलोत ने 5 अगस्त को मीडिया से बातचीत में कहा,
पुलिस ने रात में 4-5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस और क्या करेगी? कार्रवाई करने के मामले में हम सभी राज्यों में नंबर वन हैं. मणिपुर की घटनाओं को छिपाने के लिए आप उसकी राजस्थान और छत्तीसगढ़ से तुलना कर रहे हैं. ये राजनीति है और हमें यह मंजूर नहीं है.
लड़की के चाचा ग्राम पंचायत के सदस्य हैं. उन्होंने मीडिया को बताया कि अगर पुलिस ने बच्ची के लापता होने की सूचना मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई की होती तो शायद वो जिंदा होती या कम से कम अंतिम संस्कार के लिए परिवार को उसका शव मिल गया होता. उन्होंने बताया कि परिवार ने एक करोड़ रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य के लिए सरकारी नौकरी और आरोपियों के लिए फांसी की मांग की है. खबर है कि सरकारी योजना के तहत जिला प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये दिए जाएंगे.
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