भारत बायोटेक. नया साल लगते ही ये कंपनी खबरों में आ गई. वजह? इसकी बनाई कोवैक्सीन को सरकार ने इमरजेंसी अप्रूवल दे दिया है. अब इस वैक्सीन, इसके ट्रायल और कंपनी को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. इस पर 4 जनवरी को कंपनी के फाउंडर और चेयरमैन कृष्णा एला ने सफाई भी दी थी. लेकिन अब बायोटेक एक नए मामले में घिरता दिख रहा है. भारत बायोटेक पर आरोप लग रहे हैं कि कंपनी ने सही जानकारी दिए बिना पीड़ितों पर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल किया है. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने लिखा कि उन्हें धोखे में रखकर कोवैक्सीन का डोज़ दिया गया.
पूरा मामला क्या है? रचना ढींगरा एक सोशल एक्टिविस्ट हैं. वह सालों से भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए काम कर रही हैं. 3 जनवरी को उन्होंने ट्वीट किया कि भोपाल में कोवैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल किया जा रहा है, जिसमें नियमों का उल्लंघन किया गया है. उन्होंने लिखा,
"पीपल्स यूनिवर्सिटी के आसपास रहने वाले तीन-चार समुदाय के लोगों को ट्रायल वैक्सीन लगवाने के लिए 750 रुपये देने की बात कही गई. इन लोगों से यह कहा गया कि ये वैक्सीन कोरोना वायरस से बचने के लिए है. इन्हें ये नहीं बताया गया कि ये वैक्सीन कोरोना वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के तहत दिया जा रहा है. इन लोगों में से किसी को भी ब्लड और पीसीआर रिपोर्ट भी नहीं दिए गए हैं. जिन लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल किया गया है, उन्हें कोई कंसेंट लेटर तक नहीं दिया गया है."
मामले को लेकर रचना ढिंगरा ने छोटू दास नाम के एक लड़के का विडियो पोस्ट किया. इस विडियो में छोटू कह रहे हैं, " हमें 3 दिसंबर को टीका लगाया गया. उन लोगों ने कहा था कि आपको कुछ भी होगा तो उसका इलाज़ हम करेंगे. उन्होंने पर्ची पर दवाई लिख के दी और ये दवाई हमने बाहर की दुकान से अपने पैसे से ली. 3 जनवरी को दूसरी बार बुलाया गया था. लेकिन उन्होंने कोई इंजेक्शन नहीं दी. टीका लगाने के बाद मोहल्ले में कई लोगों को उल्टी, रीढ़ की हड्डियों में दर्द आदि जैसी दिक्कतें आ रही हैं."
विडियो देखिए.
पीपल्स यूनिवर्सिटी का क्या कहना है? पीपल्स यूनिवर्सिटी ने कोवैक्सीन ट्रायल को लेकर अपनी वेबसाइट पर एक
टैब बनाया हुआ है. जहां कोवैक्सीन ट्रायल को लेकर जानकारी दी गई है. इस मामले को लेकर पीपल्स यूनिवर्सिटी ने अपने आधिकारिक ट्विटर पेज से कई ट्वीट किए. लिखा,
"महामारी काल में रचना ढिंगरा बेबुनियाद आरोप लगा रही हैं. ट्रायल वैक्सीन के लिए लोगों की सहमति ली गई थी और इसमें समाज के सभी वर्ग के लोग शामिल थे. किसी भी गैस पीड़ित पर ट्रायल वैक्सीन नहीं किया गया है. सिर्फ कोविड नेगेटिव वालंटियर्स को ही ट्रायल वैक्सीन दी गई है. 750 रुपये दैनिक भत्ता के रूप में इन लोगों को दिया गया था."
पीपल्स यूनिवर्सिटी ने एक विडियो ट्वीट भी किया है जिसमें छोटू दास ने अपनी पुरानी विडियो पर सफाई दी है. इस विडियो में छोटू कहते हैं कि उन्होंने कोरोना का ट्रायल वाला टीका लगवाया है. वह बताते हैं, "कुछ दिन पहले मुझे बताया गया कि मैं कोरोना पॉजिटिव हूं और एक सर ने मुझे बाहर से दवाई लेने को कहा था. लेकिन अब जब मैं दोबारा आया हूं तो ठीक से इलाज़ कर रहे हैं और यहीं से दवाई दी जा रही है. गैस राहत वाली मैडम (रचना ढिंगरा) ने मुझे बताया था कि सिर्फ गरीबों पर ही ट्रायल किया जा रहा है क्योंकि 750 रुपये के लालच में लोग टीका लगवा रहे हैं. लेकिन मैंने यहां आकर देखा तो यहां सभी लोगों को वैक्सीन लग रहा है. बीते दिनों मेरी यहां गार्ड से बहस हो गई थी जिसके बाद मैंने आवेश में रचना जी से विडियो में बोल दिया था."
विडियो देखिए.
हमने मामले को लेकर यूनिवर्सिटी के जनरल मैनेजर (पब्लिक रिलेशंस) दीपेंद्र श्रीवास्तव से बात की और उन्होंने पीपल्स यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए ट्वीट की पुष्टि की. वहीं, पीपल्स यूनिवर्सिटी की सफाई पर रचना ने सवाल उठाए हैं. कहा है कि अगर वाकई कंसेंट लिया गया था तो ये पीपल्स यूनिवर्सिटी बताए कि 7 दिसंबर को जिस व्यक्ति को पहला टीका दिया गया था उसे 4 जनवरी को दूसरा डोज़ क्यों दिया गया?
इस पूरे मामले पर भोपाल प्रशासन, मध्य प्रदेश सरकार और भारत बायोटेक की तरफ से खबर लिखे जाने तक कोई बयान नहीं आया है.