26 फरवरी की तड़के सुबह का वक़्त था. बाहर अंधेरा ही था तब. वो (उस छात्र ने) और उसके साथ के स्टूडेंट मदरसे के एक कमरे में साथ सो रहे थे. यकायक एक तेज़ धमाके की आवाज़ से उन सबकी नींद खुली. आवाज़ कहीं पास से ही आई थी. सारे लोग घबराकर जगे. मगर उन्हें फिर कोई आवाज़ नहीं सुनाई दी. उन्हें लगा, उन्हें वहम हुआ होगा. या फिर भूकंप का कोई झटका आया होगा. ये सोचकर वो सब दोबारा सो गए. कुछ वक़्त बाद जब उनकी नींद खुली, तो उन्होंने देखा मदरसे के अंदर पाकिस्तानी आर्मी वाले हैं. आर्मी वाले इनसे मदरसा खाली करने को कह रहे थे. फौज़ी उनको किसी और जगह ले गए. कहां, ये मालूम नहीं. छात्रों को दो-तीन दिनों तक कहीं और महफूज़ रखा गया. मदरसे में काफी लोग थे. मगर सबने मदरसा खाली नहीं किया. उन सबका क्या हुआ, मालूम नहीं. धमाका कहां हुआ था, ये भी मालूम नहीं. दो-तीन बाद लड़कों से कहा गया कि वो फिलहाल अपने-अपने घर चले जाएं.पाकिस्तान ने जैश के उस मदरसे तक किसी को पहुंचने नहीं दिया है मदरसे के उस लड़के के रिश्तेदार का कहना है. कि लड़का वापस मदरसे को जाना चाहता है. जबकि बाकी परिवार चाहता है कि वो लौटकर वहां न जाए. शादी कर ले और घर पर ही रहे. हमले के बाद पाकिस्तान ने कहा कि भारत ने जंगल में बम गिराए. कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ किसी को. भारत के अटैक को बेअसर बताने पर जोर देते हुए पाकिस्तान की तरफ से कहा गया कि मीडिया को हमले वाली जगह पर ले जाने को तैयार हैं. मगर इतने दिन बीत जाने के बाद भी जैश के उस मदरसे तक किसी को जाने नहीं दिया गया है.
बालाकोट में आतंकियों के मरने के आंकड़े पर आया पीएम मोदी और राहुल गांधी का जवाब





















