वैलेंटाइन्स डे पर लड़के-लड़कियों को पीटना, गिफ्ट्स के शोरूम में तोड़फोड़ करना, मिशनरीज़ पर हमला करना. इन्हें जब भी देखा, ऐसा ही कुछ करते देखा. तोड़फोड़, पिटाई, धमकियां. अब फ़तवे भी निकालने लगे हैं. लगता है दूसरी तरफ के कट्टरपंथियों को इस फील्ड में भी टक्कर देना चाहते हैं. अबकी बार बजरंग दल ने समाजवादी पार्टी के नेता आज़म ख़ान पर फतवा निकाला है. इन्होंने कहा है कि जो भी आज़म ख़ान का सर काट के ले आएगा, उसे ये 51 लाख रुपए देंगे. ये घोषणा बजरंग दल के कुछ सदस्यों ने कल रामपुर में की. बाकायदा एक स्टेटमेंट जारी किया गया. यही नहीं, उस स्टेटमेंट में आगे लिखा था,
“जो भी आज़म ख़ान का मुंह काला करेगा और उन्हें सुअर का मांस खिलाएगा उसे 1 करोड़ का ईनाम दिया जाएगा.”बात यहां पर भी नहीं रुकी. भाई लोग चाहते हैं कि आज़म ख़ान का डीएनए टेस्ट भी किया जाए. ये सब बवाल आज़म ख़ान के सैनिकों पर दिए गए वाहियात बयान के बाद हुआ है. आज़म ख़ान का बयान यकीनन बकवास था. पढ़िए यहां से पूरा माजरा: आज़म खान, मुझे आपकी ज़ुबान से तकलीफ़ है, कटवा दूं? इसके बाद आज़म ख़ान पर केस भी दर्ज हो गया है. लेकिन ये सर काटने और पोर्क खिलाने जैसी घोषणाएं कर के बजरंग दल भी उतनी ही उच्च कोटि की मूर्खता कर रहा है. ऐसे लगता है ये दल खुद को ‘भारतीय तालिबान’ साबित करने के लिए मरा जा रहा है. कम से कम इन्हें अपने नाम की लाज तो रख लेनी चाहिए. बजरंग दल. यानी बजरंग का दल. एक बजरंग का दल हमारे मुल्क के इतिहास में भी दर्ज है. उस दल ने जो सबसे यादगार काम किया था, वो था पुल बांधना. उनके ये चेले पुल तोड़ने में लगे हुए हैं. भाईचारे का पुल, आपसी सद्भाव का पुल, इंसानियत का पुल. तोड़ के ही मानेंगे. क्योंकि इनको मज़ा ही तोड़फोड़ में आता है. आप कहेंगे कि सिर्फ यही क्यों पुल बनाएं? मैं आपसे सवाल पूछता हूं - "सड़क पर चलता कुत्ता आप पर भौंकता है तो आप आगे बढ़ जाते हैं या खड़े होकर उसकी तरफ आप भी भौंकने लगते हैं." आप ये क्यों भूल जाते हैं कि आप बंदर से बदलकर इंसान बन गए हैं? स्वयं बजरंग बली का बस चले तो अपने नाम पर यूं बट्टा लगाने के लिए इन बजरंग दल वालों को बगल मे दबा कर लंका के समंदर में डुबो आएं. गदा मार के इनकी खोपड़ी खोल दें.
इनकी बातें सुन कर कोई अगर सच में आज़म ख़ान पर हमला कर दे, तो यही लोग उसकी शक्ल नहीं पहचानेंगे. ईनाम तो दूर की बात है. इसलिए सेना के नाम पर काबू से बाहर होने वाले जोशीले नौजवानों को इनकी बातों में नहीं आना चाहिए. इनका क्या है, ये तो हैं ही मौखिक आतंकवादी. ये भी पढ़ें:
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