The Lallantop

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में जाटों के लिए मांगा आरक्षण, बीजेपी ने जवाब दिया

केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 10 साल पहले जाट समुदाय को केंद्र की ओबीसी लिस्ट में शामिल करने का वादा किया था. लेकिन सरकार 10 सालों से इस समुदाय के साथ धोखा कर रही है.

Advertisement
post-main-image
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल. (फोटो - पीटीआई)

दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) ने जाट समुदाय के आरक्षण का मुद्दा उठाया है. पूर्व मुख्यमंत्री और AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर जाटों को केंद्र की ओबीसी लिस्ट में शामिल करने की मांग की है. केजरीवाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 10 साल पहले जाट समुदाय से ये वादा किया था. और सरकार 10 सालों से इस समुदाय के साथ धोखा कर रही है. वहीं, केजरीवाल की इस मांग पर भाजपा ने कहा है कि अगर केजरीवाल ने जाट समुदाय के लिए कुछ काम किया होता, तो चुनाव से सिर्फ 25 दिन पहले उनकी याद नहीं आती.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

अरविंद केजरीवाल ने 9 जनवरी को सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी शेयर की है. 8 जनवरी को लिखे गए इस पत्र में उन्होंने कहा है, 

"पिछले दिनों मेरी दिल्ली के जाट समाज के कई प्रतिनिधियों से मुलाकात हुई. इन्होंने मुझे बताया कि आपने (PM) 26 मार्च 2015 को दिल्ली के जाट समाज के प्रतिनिधियों को अपने घर बुलाकर वादा किया था कि जाट समाज, जो दिल्ली की ओबीसी लिस्ट में है, उसे केंद्र की ओबीसी लिस्ट में भी जोड़ा जाएगा. ताकि उन्हें दिल्ली में केंद्र सरकार के कॉलेजों और नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिल सके."

Advertisement

केजरीवाल ने आगे लिखा कि 8 फरवरी 2017 को अमित शाह ने भी जाट नेताओं की मीटिंग बुलाई और उनसे यही वादा किया था. उन्होंने लिखा, 

"अमित शाह 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली में फिर बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा के आवास पर जाट नेताओं से मिले थे. उन्होंने वादा किया था कि दिल्ली के जाट समाज को केंद्र की ओबीसी लिस्ट में शामिल किया जाएगा. लेकिन चुनाव के बाद इस पर कोई काम नहीं हुआ."

केजरीवाल ने आरक्षण नहीं देने का आरोप लगाया

इसके अलावा AAP संयोजक ने ओबीस आरक्षण को लेकर केंद्र की नीतियों में दिक्कतें भी गिनाईं. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की ओबीसी लिस्ट में होने की वजह से राजस्थान से आने वाले जाट समाज के युवाओं को दिल्ली यूनिवर्सिटी में ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलता है. लेकिन दिल्ली के जाट समाज के युवाओं को वहां ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है कि क्योंकि केंद्र सरकार ने जाट समुदाय को केंद्र की ओबीसी लिस्ट में शामिल नहीं किया है.

Advertisement

केजरीवाल ने आगे लिखा है, 

"सिर्फ जाट समाज ही नहीं, रावत, रौनियार, राय तंवर, चारण और ओड, इन सभी जातियों को दिल्ली सरकार ने ओबीसी का दर्जा दिया हुआ है. लेकिन केंद्र सरकार इन जातियों को दिल्ली में मौजूद अपने संस्थानों में ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं दे रही है."

उन्होंने आरोप लगाया है कि जाट समेत इन समुदायों के साथ केंद्र सरकार पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही है. इसलिए उन्होंने मांग की है कि दिल्ली में ओबीसी दर्जा प्राप्त सभी जातियों को केंद्र सरकार के संस्थानों में भी आरक्षण का लाभ देना चाहिए.

ये भी पढ़ें- लोकसभा चुनाव में इन सीटों पर जाटों का गुस्सा BJP को रुला गया!

बीजेपी ने क्या जवाब दिया?

भारतीय जनता पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन आरोपों का जवाब दिया है. पार्टी के पूर्व सांसद और नई दिल्ली सीट से उम्मीदवार प्रवेश वर्मा ने कहा कि जाट समाज अरविंद केजरीवाल की सियासी चाल को बखूबी समझ चुका है. उन्होंने कहा, 

"बाहरी दिल्ली में विधानसभा की 70 में से 28 सीटें आती हैं. इन 28 सीटों पर सारे गांव और देहात की मीटिंग हुई. और वहां पर ये तय हुआ कि अरविंद केजरीवाल को वोट नहीं करना है. दिल्ली देहात से आने वाली ये सभी 28 सीटें इस बार बीजेपी जीतेगी. आज इन्होंने जाटों को याद किया. अगर इन्होंने जाट समुदाय के लिए कुछ काम किया होता, तो चुनाव से सिर्फ 25 दिन पहले उनकी याद नहीं आती."

प्रवेश वर्मा ने अपने सोशल मीडिया पर भी लिखा कि केजरीवाल इस बार जाट के हत्थे चढ़ गए हैं, पूरी नई दिल्ली की 36 बिरादरी उनकी जमानत जब्त कराने के लिए तैयार है.

वीडियो: PM मोदी ने शीशमहल को लेकर AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल को सुनाया, क्या कहा?

Advertisement