स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली में झंडा फहराने को लेकर काफी विवाद हुआ. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) फिलहाल जेल में हैं. ऐसे में उन्होंने मंत्री आतिशी के नाम का सुझाव दिया था. हालांकि जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट (GAD) ने आतिशी को झंडा फहराने की परमिशन नहीं दी. इसके बाद उपराज्यपाल वीके सक्सेना (VK Saxena) ने तिरंगा फहराने के लिए दिल्ली के गृह मंत्री कैलाश गहलोत (Kailash Gahlot) को नामित किया.
स्वतंत्रता दिवस: मुख्यमंत्रियों को नहीं था तिरंगा फहराने का हक, इस नेता ने दिलाया
Arvind Kejriwal की जगह दिल्ली के गृह मंत्री Kailash Gahlot, 15 अगस्त के दिन राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे. स्वतंत्रता दिवस पर हर राज्य का मुख्यमंत्री अपने यहां झंडा फहराता है. मगर हमेशा से ऐसा नहीं था.
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दिल्ली में हर साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर छत्रसाल स्टेडियम में कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, जिसमें मुख्यमंत्री झंडा फहराते हैं. मगर इस साल ऐसा नहीं होगा. लेकिन क्या आपको पता है कि साल 1974 से पहले किसी राज्य में मुख्यमंत्री को झंडा फहराने की इजाजत नहीं थी. राज्यों में गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के दिन राज्यपाल ही झंडा फहराते थे. जानते हैं मुख्यमंत्रियों के हाथों झंडारोहण का चलन कब और कैसे शुरू हुआ.
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बात सन 1974 की है. साउथ के एक दिग्गज नेता ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात की. प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान उस नेता ने तिरंगा फहराने के नियम को बदलने की मांग की. उनकी तरफ से कहा गया कि जैसे स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में देश के प्रधानमंत्री झंडा फहराते हैं, वैसे ही राज्यों की राजधानी में मुख्यमंत्रियों के झंडा फहराने का नियम बनाया जाए. इस मांग को इंदिरा गांधी के सामने रखने वाले नेता का नाम एम. करुणानिधी था. जो उस वक्त तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थे.
ये वही वक्त था, जब केंद्र और राज्य के रिश्तों पर राजमन्नार कमिटी की सिफारिशें सामने आई थीं. करुणानिधि इन सिफारिशों के आधार पर ही राज्यों को और ज्यादा अधिकार देने की मांग कर रहे थे. तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री की इस मांग को इंदिरा गांधी ने मान लिया. जुलाई 1974 में केंद्र सरकार की ओर से एक आदेश जारी किया गया कि गणतंत्र दिवस पर राज्यपाल तिरंगा फहराएंगे, वहीं स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री तिरंगा फहराएंगे.
इसके बाद 15 अगस्त 1974 को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में सेंट जॉर्ज किले पर जो तिरंगा फहराया गया, उसे उस वक्त के तमिलनाडु के राज्यपाल कोडरदास कालिदास शाह ने नहीं बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने फहराया था. उस साल पूरे देश में अलग-अलग राज्यों में मुख्यमंत्रियों ने ही तिरंगा फहराया था. उसके बाद से हर साल स्वतंत्रता दिवस पर राज्यों के मुख्यमंत्री ही तिरंगा फहराते हैं.
अब ऊपर जिस राजमन्नार समिति का जिक्र हुआ, उसके बारे में जान लेते हैं. सरकार ने इस कमिटी का गठन 22 सितंबर, 1969 को किया था. कमिटी का उद्देश्य केंद्र-राज्य संबंधों के बारे में सुझाव देना था. कमिटी के अध्यक्ष डॉ. पी वी राजमन्नार थे. दो और सदस्य थे- डॉक्टर लक्ष्मणस्वामी मुदलियार और पीसी चंद्र रेड्डी.
कमिटी ने साल 1971 में अपनी रिपोर्ट सौंपी. बताया गया कि केंद्र सरकार का राज्य सरकारों में जरूरत से ज्यादा दखल है. कमिटी ने इसके पीछे के कारणों पर भी विस्तार से रिपोर्ट दी. उन्होंने बदलाव के लिए कई अहम सिफारिशें भी कीं. हालांकि केंद्र सरकार की तरफ से इन सुझावों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया था.
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