अनुराग कश्यप.
फरीद ज़क़ारिया ने बीते दिनों सीएनएन पर प्रसारित एक कार्यक्रम में बाकी मुल्कों के मुकाबले भारत का एक मजबूत पहलू यहां के
फ्री और फेयर मीडिया को भी बताया. बाहर से भले ही ऐसा लगे लेकिन भीतर से मीडिया बड़े बदलावों से गुजर रहा है. जो एक बड़ी चुनौती है वह ये कि मीडिया के एक बड़े हिस्से ने सरकारों और सिस्टम से सवाल पूछने बंद कर दिए हैं. कड़वे सवाल तो पूछने से अब वो डरने लगे हैं. उन्हें अपने अस्तित्व की चिंता है. हाल ही में पहले फिल्म निर्माताओं के एक समूह ने बैन लगा दिया कि कोई पाकिस्तानी एक्टर भारत में काम न कर सकेगा. जाहिर है इसमें उन निर्माताओं के अधिकारों का हनन हो गया जो अपने फैसले खुद लेना चाहते हैं. वो भी उस परिस्थिति में जब भारत सरकार ने ही पाकिस्तानी कलाकारों के वीज़ा, परमिट पर अभी तक बैन नहीं लगाया है.
Also Read: करण-शाहरुख कॉफी पिएंगे और सोचेंगे अपनी 3 बड़ी फिल्में MNS से कैसे बचाएं अभी इसी हफ्ते सिनेमाघर मालिकों और प्रदर्शकों के एक समूह ने उन फिल्मों पर बैन लगा दिया जिसमें किसी भी पाकिस्तानी एक्टर ने काम किया है. ये फतवा सीधे-सीधे अलोकतांत्रिक और असहनीय है क्योंकि जो निर्माता अपनी फिल्में पूरी कर चुके हैं और रिलीज की तैयारी में है, ये उनके साथ पूरा अन्याय है. क्योंकि उन फिल्मों पर हजारों लोगों का अस्तित्व निर्भर करता है और वे सब लोग हिंदुस्तानी है.
Also Read: डियर करण जौहर, पहलाज निहलानी को थैंक यू बोल लो! मौका है! ऐसे दौर में जब राष्ट्रभक्ति के नाम पर कुछ भी हो रहा है और देश का नेतृत्व कर रहे प्रधान मंत्री कुछ नहीं बोलते और मीडिया उनसे कुछ नहीं पूछता, चिंता होती है. cow-vigilante की बर्बर हिंसक घटनाएं लंबे समय तक चली और लोग पीटे, कुचले जाते रहे तो बहुत देर से प्रधानमंत्री ने टिप्पणी की. उसके बाद ऐसी घटनाएं बंद हो गईं. लेकिन तब तक पर्याप्त भय का संचार किया जा चुका था. सत्ता से सवाल पूछने का एक डर मीडिया में व्याप्त दिखता है. इसी पृष्ठभूमि में अनुराग कश्यप का प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करना खुशी देता है. हालांकि उन्होंने डर के ये सवाल किए हैं या बिना डरे ये नहीं पता. लेकिन किए तो हैं. उन्होंने सिनेमाघर मालिकों के बैन के मामले में करण जौहर का समर्थन करते हुए कई ट्वीट प्रधानमंत्री मोदी को टैग करके किए. करण की 'ऐ दिल है मुश्किल' में पाक एक्टर फवाद खान ने काम किया है. तय सिंगल स्क्रीन मालिक चार राज्यों में इस फिल्म को नहीं लगाएंगे. जाहिर है इससे निर्माता को नुकसान तो होगा ही. अनुराग ने शनिवार को सबसे पहला ट्वीट किया और उसमें लिखा:
इस दुनिया को हम लोगों से सीखना चाहिए. हम लोग अपनी सारी समस्याओं का समाधान फिल्मों पर दोष डालकर और उन्हें बैन करके निकालते हैं. #ऐ दिल है मुश्किल. करण जौहर मैं इस घड़ी में तुम्हारे साथ हूं.

इसके बाद रविवार सुबह उन्होंने कई ट्वीट मोदी को टैग करते हुए किए. इसमें उन्होंने बताया कि कैसे करण की फिल्म उसी वक्त में शूट हुई जब मोदी पाकिस्तान जाकर नवाज शरीफ से दोस्ती जताने की कोशिश कर रहे थे. ऐसे में अब क्यों उनकी फिल्म को कटघरे में खड़ा किया जाए. इस लिहाज से तो मोदी को भी कटघरे में होने चाहिए. उनका सवाल सही था. अनुराग ने लिखा:
नरेंद्र मोदी, सर, पाकिस्तान के पीएम से मिलने के लिए आप जिस दौरे पर गए थे उसके लिए आपने अभी तक सॉरी नहीं बोला है. ये 25 दिसंबर की बात है. करण जौहर अपनी फिल्म ऐ दिल है मुश्किल की शूटिंग उसी वक्त कर रहे थे न? क्यों?
नरेंद्र मोदी, ऐसा क्यों है कि हमें भुगतना पड़ रहा है और आप चुप हैं?

नरेंद्र मोदी, और तो और आपने लोगों के टैक्स के पैसे पर अपनी विदेश यात्रा को मोड़ा (पाकिस्तान जाने के लिए), वहीं ये फिल्म उस पैसे पर बनाई गई है जिसके लिए कोई यहां ब्याज भरता है.

नरेंद्र मोदी, मैं बस स्थिति को समझने की कोशिश कर रहा हूं क्योंकि मैं डम्ब हूं और मुझे समझ नहीं आता. माफ करिएगा अगर आपको बुरा लगे.

बातों के आखिर में अनुराग ने एक नारा भी लगा दिया जो एक ताना था:
वैसे भारत माता की जय, सर नरेंद्र मोदी.

जाहिर है ये सारे सवाल मीडिया को सरकारी प्रतिनिधियों से पूछने चाहिए लेकिन सब फिल्म उद्योग के लोगों से ये पूछने में व्यस्त हैं कि वे पाकिस्तानी कलाकारों का विरोध करते हैं कि नहीं? वे देशभक्त हैं कि नहीं? इसमें नाना पाटेकर जैसे लोग भी भटकाने वाले रास्ते खोल देते हैं. कहते हैं देश के आगे एक्टर लोग कीड़े-मकोड़े हैं. वो संवाद और सवाल पूछने के तमाम दरवाजे अपनी बातों से बंद कर देते हैं जो कि एक खतरनाक स्थिति है.
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