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क्या चौकीदारों की पार्टी बीजेपी ने अपनी वेबसाइट के लिए एक स्टार्टअप का टैंप्लेट चुराया?

कंपनी सबूतों के साथ कह रही है, चौकीदार ही चोर है. जानिए, बीजेपी ने क्या कहा...

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आंध्र प्रदेश की कंपनी ने बीजेपी पर टैंप्लेट चोरी करने के आरोप लगाए
बीजेपी की आधिकारिक वेबसाइट हैक हुई थी. तारीख थी 5 मार्च 2019. इस तारीख के बाद बीजेपी की वेबसाइट पर लगातार मेंटनेंस मोड शो हो रहा था. ये सिलसिला करीब 17 दिन चला. इसी 17 दिन के बीच में पीएम मोदी का ‘मैं भी चौकीदार’ कैंपेन लॉन्च हुआ. लोगों ने मज़े लिए कि पार्टी की वेबसाइट चल रही नहीं है यहां बीजेपी के सभी नेता चौकीदार बने फिर रहे हैं. खैर, ये तो हुई मज़ाक वाली बात लेकिन वेबसाइट हैक होने के 17 दिन बाद बीजेपी की वेबसाइट चल पड़ी. वो भी बिल्कुल बेसिक मोड पर. मतलब कि वेबसाइट पर सिर्फ होम पेज दिख रहा था. क्योंकि वेबसाइट हैक होने के बाद वेबसाइट पर मौजूद सारा डेटा उड़ गया था.
अब जब बीजेपी की वेबसाइट चालू हुई तो पार्टी ने चैन की सांस ली. लेकिन इसके चालू होने के साथ पार्टी के लिए एक नया बखेड़ा शुरू हो गया. बीजेपी पर एक कंपनी ने उसके टैंप्लेट को चोरी करने के आरोप लगाए. आंध्रप्रदेश की वेब डिज़ाइन कंपनी W3Layouts ने कहा- बीजेपी ने पहले टैंप्लेट चोरी किया, फिर बाद में बैंक लिंक को भी डिलिट कर दिया. W3Layouts ने ये भी आरोप लगाया कि बीजेपी ने उस कोड को भी डिलिट कर दिया जब उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी बीजेपी को दी.
आगे हम इस मामले में कुछ भी बताए, उससे पहले टैंप्लेट के बारे में जान लीजिए. जिसपर सारा विवाद हो रहा है. टैंप्लेट उस खांचे को कहते हैं जो पहले से ही सेट पैटर्न पर बना होता है. मतलब उसकी डिज़ाइनिंग पहले से ही तैयार होती है. बस उसे उठाकर उसमें अपना कंटेंट डालिए और डोमेन के साथ जोड़ दीजिए. आपकी रेडिमेड वेबसाइट तैयार. इस तरह की वेबसाइट को बेसिक वेबसाइट भी कहते हैं. बीजेपी पर आरोप है कि उन्होंने इसी तरीके से अपनी नई वेबसाइट तैयार की है.
वेबसाइट के बैंकहैंड में कंपनी का नाम दिख रहा था. जिसे बाद में हटा दिया गया.
वेबसाइट के बैंकहैंड में कंपनी का नाम दिख रहा था. कंपनी के मुताबिक बाद में इस कोड को हटा दिया गया.

कंपनी के मुताबिक जब बीजेपी ने नई वेबसाइट के लिए उनके टैंप्लेट का इस्तेमाल किया, फिर उन्हें खुशी हुई. लेकिन कुछ ही देर में उनकी खुशी तहस-नहस हो गई जब बीजेपी ने बिना पैसे दिए वेबसाइट से बैकलिंक को डिलिट कर दिया. कंपनी के मुताबिक उन्होंने डिलिट तो किया ही साथ ही किसी तरह का कोई क्रेडिट भी नहीं दिया.
जिसके बाद उन्होंने ट्वीट के ज़रिए बीजेपी की आईटी सेल से बात करने की कोशिश की. बीजेपी की तरफ से किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद कंपनी ने फिर से ट्वीट किया. इस बार उन्होंने लिखा कि:
हम बस अपने टैंप्लेट का इस्तेमाल करने पर आपका शुक्रिया अदा चाहते थे, यहां तक कि हम बैकलिंक को रिमूव करने की इजाज़त भी दे देते. लेकिन इसकी जगह आपने हमारे कोड को हटाकर अच्छे दिखने वाले वेबपेज को खराब करने का फैसला किया.
कंपनी ने इस पूरे मामले पर ब्लॉग लिखा.
बीजेपी ने कोड को पूरी तरह से बदल दिया है. हम शॉक्ड है कि एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल का नेतृत्व एक ऐसा नेता करता है जो खुद को देश का चौकीदार कहता है. उन्होंने एक छोटी सी दुकान का पसीना और खून चुराने का फैसला किया. जब उनकी चोरी पकड़ी गई तब वो पूरी तरह से मुकर गए.
कंपनी के आरोप के बाद सोशल मीडिया पर खूब बहस छिड़ गई. कुछ लोगों ने कंपनी का प्रॉपैगेंडा बताया तो कुछ लोगों ने बीजेपी की खिंचाई भी की. अब इस मामले पर विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी की तरफ से भी बयान आया है. बीजेपी का कहना है कि उन्होंने किसी तरह की कोई चोरी नहीं की. उन्होंने वेबसाइट के लिए एक फ्री ऐप्लिकेशन का इस्तेमाल किया है.
जब कंपनी ने बैकलिंक पर ज़ोर दिया, जिसके बाद हमने उसे हटा लिया. ऐसा कुछ नहींं है जो हम जनरली करते हैं. हमने असल में उनके नाम का इस्तेमाल करने की पेशकश भी की थी. लेकिन बात नहीं बन पाई. इसीलिए हमने वेबसाइट के लिए दूसरा वैकल्पिक रास्ता अपनाया. हम उनके टैंप्लेट का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.
अब बीजेपी की वेबसाइट पर सिर्फ होम पेज दिख रहा है. नीचे स्क्रॉल करने के बाद लोकसभा चुनावों के लिए जिन प्रत्याशियों की सूची जारी हुई हैं, उनके नाम दिख रहे हैं. इससे पहले जब 5 मार्च को बीजेपी की वेबसाइट हैक हुई थी और काफी दिनों तक वेबसाइट तैयार नहीं हो पाई. तब कई जानकार लोगों ने कहा भी कि बीजेपी एक बेसिक वेबसाइट पर काम कर रही थी. जिसके हैक होने के बाद उस पर मौजूद सारा डेटा उड़ गया.


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