टीवी पर देखा कि खबर चल रही है, मेरे नाम की. मैंने अपने हसबेंड को बताया. उन्होंने कहा कि तुम्हारे नाम का कोई और भी तो हो सकता है. फिर हमने ध्यान नहीं दिया. लेकिन लगातार न्यूज सुन रहे थे, तो लग रहा था कि कहीं मेरे बारे में ही तो बात नहीं हो रही है. न्यूज पेपर में देखा. जहां से मैंने बीएड किया है, वहां की फोटो उस पर चस्पा थी. रोल नंबर, पिता का नाम, सब कुछ मेरा था. उससे मुझे पता चला कि मेरे बारे में ही बात की जा रही है. फिर मैंने अपने हसबेंड से बात की. फिर बीएसए ऑफिस में जाकर अपना पक्ष रखा.अनामिका ने बताया कि बीएसए ने कहा कि आप बिल्कुल निश्चिंत रहिए. जिसने भी ये किया है, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी. आप एक FIR दर्ज करवा दीजिए. और उसकी कॉपी हमें दे दीजिए. अनामिका ने बताया,
जुलाई, 2017 में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में वॉन्ट निकला था. मैंने कई जगह से फॉर्म भरा कि यहां से न आए, तो वहां से आ जाए. मैंने पांच जगह से फॉर्म भरा. मिर्जापुर, सुल्तानपुर, बस्ती, जौनपुर, लखनऊ. सब जगह से काउंसलिंग लेटर भी आया. लेकिन प्रेग्नेंसी की वजह से मैंने नौकरी नहीं की.अनामिका ने बताया कि शिकायत के बाद केस दर्ज कर लिया गया है. पुलिसवाले तहकीकात के लिए आए थे. उन्होंने कहा- जैसा मेरे साथ हुआ, वो दूसरों के साथ भी हुआ होगा. मैं चाहती हूं कि जो गुनहगार हैं, उन्हें पकड़ा जाए. सख्त से सख्त सजा दी जाए. अनामिका ने बताया,
2017 से अब तक किसी ने कभी कोई संपर्क नहीं किया. काउंसलिंग लेटर सुल्तानपुर से तीन बार और लखनऊ से दो बार आया. जौनपुर से एक बार फोन आया था. लेकिन जब जरूरत नहीं थी, तो इतना ध्यान ही नहीं गया. छोड़ दिया ऐसे ही.
अनामिका के पति ने क्या कहा?
वहीं अनामिका के पति दुर्गेश शुक्ला ने भी इस बारे में 'आज तक' से बात की. ये पूछने पर कि ये मामले उनके लिए कितना शॉकिंग हैं, उन्होंने कहा-कल रात मेरे आवास को छावनी में तब्दील कर दिया गया था. रात ढाई-तीन बजे तक इंवेस्टिगेशन चली. हम लोग सो नहीं पाए. लखनऊ से और न जाने कहां-कहां से टीम आई थी. चार-चार पीढ़ियों की डिटेल खंगाली गई. जब हमने परिपत्र दे दिया था, तो आप जहां कहते, हम चले आते. हमने ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करा दी थी. अब आगे नहीं पता कि क्या हुआ.
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