केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने CAA की हो रही आलोचनाओं पर जवाब दिया है. उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को खुले मंच पर आकर इस मामले में अपनी पार्टी का पक्ष रखने की चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि CAA का NRC से कोई लेना-देना नहीं है. 11 मार्च की शाम को देश में CAA के लिए अधिसूचना जारी की गई थी. जिसके बाद से कई विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया है. विपक्ष ने आरोप लगाया है कि भाजपा CAA के जरिए अपना नया वोट बैंक बना रही है.
क्या भाजपा CAA के जरिए अपना नया वोट बैंक बना रही है? अमित शाह का जवाब सुन लीजिए
Amit Shah ने कहा है कि CAA का NRC से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने CAA के मुद्दे पर Rahul Gandhi को चुनौती दे दी है.

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, गृह मंत्री ने इस पर कहा,
"विपक्ष के पास कोई काम नहीं है. उनका इतिहास है कि वो जो बोलते हैं वो करते नहीं है. आप (ANI) राहुल गांधी का इंटरव्यू करें और उनसे CAA के विरोध का कारण पूछें. राजनीति में आपकी जिम्मेदारी होती है कि आप अपने फैसलों को जस्टिफाई करें. CAA पर मुझे अपनी पार्टी का पक्ष रखना है. उसी तरह राहुल गांधी को भी इसके विरोध का कारण बताना चाहिए."
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इससे पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने नागरिकता संशोधन अधिनियम की अधिसूचना जारी होने के समय पर सवाल उठाया था. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह एक विवादास्पद कानून है क्योंकि नागरिकता कभी भी धर्म पर आधारित नहीं होती है, यह संविधान के खिलाफ है. इस पर गृह मंत्री ने कहा,
"सारी विपक्षी पार्टियां जिसमें राहुल गांधी, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल भी शामिल हैं, ये सब झूठ की राजनीति कर रहे हैं. क्योंकि CAA 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP के घोषणापत्र में थी. और 2019 में ही इसे संसद में पेश किया गया था."
उन्होंने आगे कहा,
"भाजपा ने अपने 2019 के घोषणापत्र में स्पष्ट कर दिया था कि वो CAA लाएगी. और शरणार्थियों (पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए) को भारतीय नागरिकता प्रदान करेगी. भाजपा का एक स्पष्ट एजेंडा है और उस वादे के तहत CAA को 2019 में संसद के दोनों सदनों में पारित किया गया था. इसमें कोविड के कारण देरी हुई. भाजपा ने चुनाव में जनादेश मिलने से पहले ही अपना एजेंडा साफ कर दिया था."
गृह मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा,
"विपक्ष अब तुष्टिकरण की राजनीति करके अपने वोट बैंक को मजबूत करना चाहता है. मैं उनसे अनुरोध करना चाहता हूं कि वे बेनकाब हो गए हैं. मैंने चार सालों में लगभग 41 बार दोहराया है कि ये एक दिन वास्तविकता बन जाएगी."
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CAA से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी. इस कानून के जरिए 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी. आवेदन की योग्यता अवधि को 11 से कम कर 5 साल कर दिया गया है.
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