केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने CAA पर उठ रहे कई सवालों के जवाब दिए हैं. विपक्षी दलों ने इस कानून पर जो सवाल उठाए थे, गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष के पास कोई काम नहीं है. उन्होंने ये भी बताया है कि CAA का नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) से क्या संबंध है. 2019 में अमित शाह ने ही कहा था कि CAA के बाद NRC आएगा. इस कारण से देश भर में विरोध-प्रदर्शन हुए थे.
CAA का NRC से क्या लेना देना है? खुद अमित शाह से सुनिए
Amit Shah ने बताया है कि CAA का NRC से क्या संबंध है. उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में CAA को लागू करने के मुद्दे पर भी बात की है.

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, अब इस सवाल पर गृह मंत्री ने कहा है,
“NRC का CAA से कोई लेना-देना नहीं है. CAA को असम और देश के अन्य हिस्सों में लागू किया जाएगा. उत्तर पूर्व के राज्यों के केवल उन इलाकों में इसे लागू नहीं किया जाएगा, जहां दो प्रकार के विशेष अधिकार दिए गए हैं. इसमें वे क्षेत्र शामिल हैं जहां इनर लाइन परमिट (ILP) का प्रावधान है और वे क्षेत्र जिन्हें संविधान की 6वीं अनुसूची के तहत विशेष दर्जा दिया गया है.”
इनर लाइन परमिट एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है जो भारतीय नागरिकों को सीमित समय के लिए संरक्षित क्षेत्रों में प्रवेश करने की अनुमति देता है.
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क्या CAA आदिवासी क्षेत्रों की संरचना को बदल देगा?अमित शाह ने इस सवाल के जवाब में कहा,
"CAA आदिवासी क्षेत्रों की संरचना और अधिकारों को नहीं बदलेगा और ना ही कमजोर करेगा."
इससे पहले 2019 में CAA के विरोध में देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए थे. आंदोलनकारियों का कहना था कि CAA के बाद NRC लाया जाएगा. जिससे एक समुदाय के लोगों को डिटेंसन कैंप में भेजा जाएगा.
11 मार्च की शाम को देश में CAA के लिए अधिसूचना जारी की गई. इसके बाद विपक्षी पार्टियों ने इसका विरोध किया. CAA से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी. इसके जरिए 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई लोगों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी.
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