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ज्ञानवापी की जमीन पर निचली अदालत में सुनवाई होगी या नहीं, इलाहाबाद HC में फैसला सुरक्षित

हिंदू पक्ष की तरफ से मांग की गई है कि पूरे ज्ञानवापी परिसर को काशी मंदिर का हिस्सा घोषित किया जाए और मस्जिद को ध्वस्त किया जाए.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट और ज्ञानवापी मस्जिद. (फोटो: सोशल मीडिया)

वाराणसी (Varanasi) के ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Mosque) विवाद से जुड़े पहले मामले में इलाबाहाद हाईकोर्ट ने सोमवार 12 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया है. इस मामले में हाईकोर्ट को मुख्य रूप से यह तय करना है कि वाराणसी की स्थानीय अदालत में साल 1991 में दायर मामले की सुनवाई हो सकती है या नहीं. 

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इस केस में ज्ञानवापी मस्जिद की जमीन को हिंदू पक्ष को देने की मांग की गई है. इसे यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और ज्ञानवापी मस्जिद की अंजुमन इंतेजामिया कमेटी ने चुनौती दी है. उन्होंने इस संबंध में कुल 5 याचिकाएं दाखिल की हैं. दोनों तरफ की ओर से लंबी सुनवाई के बाद जस्टिस प्रकाश पाड़िया ने इसे लेकर फैसला सुरक्षित रख लिया है. वहीं पुरातात्विक सर्वे रिपोर्ट को लेकर 28 सितंबर को हाईकोर्ट में बहस होगी.

कब शुरु हुआ मामला

ये मामला पहली बार साल 1991 में शुरु हुआ था. उस साल स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर की ओर से दो वकीलों दान बहादुर सिंह और संकठा तिवारी ने वाराणसी की निचली अदालत में एक वाद दाखिल किया था.

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इसमें ये मांग की गई थी कि ज्ञानवापी परिसर में हिंदुओं को पूजा-अर्चना की इजाजत दी जानी चाहिए. इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने तीन और मांगें रखी थीं कि पूरे ज्ञानवापी परिसर को काशी मंदिर का हिस्सा घोषित किया जाए, इस कॉम्प्लेक्स से मुसलमानों को हटाया जाए और मस्जिद को ध्वस्त किया जाए.

ज्ञानवापी की अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने इस याचिका के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था और दलील दी थी कि इस तरह के मामलों पर विचार नहीं किया जा सकता है क्योंकि कानून के तहत इसकी स्वीकृति नहीं मिली हुई है. इसे लेकर हाईकोर्ट ने निचली अदालत में इस मामले की सुनवाई पर रोक लगा दी थी.

फिर से मामला उठा!

हालांकि, इस मामले में साल 2019 में एक नया मोड़ आया. दिसंबर 2019 में वीएस रस्तोगी नाम के एक वकील ने वाराणसी की कोर्ट में याचिका दायर की. इस याचिका में मांग की गई कि 1991 वाली याचिका पर सुनवाई पूरी की जाए और मस्जिद की पूरी भूमि को हिंदुओं को दी जाए. इसी के आधार पर वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिविजन) ने 8 अप्रैल 2021 को एक आदेश पारित करते भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को आदेश दिया कि वे मस्जिद का सर्वे कराएं. इसका मकसद ये पता लगाना था कि क्या मस्जिद को मंदिर तोड़कर बनाया गया है.

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लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 9 सितंबर 2021 को इस पर रोक लगा दी और जस्टिस पाड़िया की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के बिना निचली अदालत में इस मामले पर सुनवाई नहीं हो सकती है. अब इसी मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट अपने फैसले में ये बताएगा कि क्या निचली अदालत में ज्ञानवापी मस्जिद भूमि मामले को लेकर सुनवाई हो सकती है या नहीं. इसी से जुड़े एक अन्य मामले में 12 सितंबर को वाराणसी जिला अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में श्रृंगार गौरी की नियमित रूप से पूजा करने की मांग वाली याचिका सुनवाई के लायक है, इसलिए इस मामले पर विचार किया जाना चाहिए.

अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी ने इस पर गहरी नाराजगी जाहिर की है और कहा है कि वे इसके खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे. 

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