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JNU हिंसा: लेफ्ट की गीता ने कैमरे के सामने बताया किसने सर्वर ठप किया?

जेएनयू के वीसी का कहना है कि पांच जनवरी की हिंसा 4 जनवरी से जुड़ी है.

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जेएनयू में पांच जनवरी को हुई हिंसा की तस्वीर (बाएं) दूसर तस्वीर में एआईएसए कार्यकर्ता गीता कुमारी जिन्होंने माना कि सर्वर ठप करने में वो भी शामिल थीं.
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी. जेएनयू में रविवार पांच जनवरी को हिंसा हुई. इस मामले में पुलिस अब तक किसी को भी गिरफ्तारी नहीं कर पाई है. इसी बीच इंडिया टुडे की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम (SIT) ने अपनी तफ्तीश में संभावित हमलावरों की पहचान की है. हमलावरों ने खुद ही यह माना है कि उन्होंने वामपंथी रुझान वाले छात्रों पर बाहरी छात्रों की मदद से हमले की योजना बनाई थी. हमलावरों का साथ देने के लिए बाहर से आने वाले छात्र दक्षिणपंथी रुझान के हैं. हालांकि इंडिया टुडे टीवी को दिए इंटरव्यू में जेएनयू के कुलपति एम जगदीश कुमार ने दावा किया था कि 5 जनवरी को हुई हिंसा की जड़ें एक दिन पहले हुई घटना से जुड़ी हैं. वीसी के अनुसार रविवार की हिंसा से 24 घंटे पहले 4 जनवरी को कुछ नकाबपोश भीड़ परिसर में घुस आई थी. उन्होंने कहा था,
5 तारीख को जो हुआ, उसकी उत्पत्ति पिछले कुछ दिनों में हुई. हमारे यहां CIS सेंटर है, जो डेटा सेंटर है. एक दिन पहले कुछ छात्र अपने चेहरे को पूरी तरह से कवर करके आए थे और डाटा सेंटर पर नियंत्रण कर लिया था. यदि छात्र सही कर रहे थे तो उन्होंने अपने चेहरे को क्यों ढंक लिया था?
JNUSU के कुछ छात्रों के खिलाफ यूनिवर्सिटी के सर्वर को नष्ट के आरोप में केस दर्ज किया गया है. इंडिया टुडे के अंडरकवर पत्रकारों ने जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष और लेफ्ट AISA की कार्यकर्ता गीता कुमारी से यूनिवर्सिटी के सर्वर के बारे में बात की. गीता कुमारी उस भीड़ का हिस्सा थीं जो 4 जनवरी को सर्वर रूम के बाहर दिखी थीं. गीता ने माना कि जेएनयू के सर्वर को ठप करने में वो भी शामिल थीं. उन्होंने कहा,
हमारा वीसी सबकुछ ऑनलाइन करता है. लवलेटर ऑनलाइन भेजता है, हैप्पी न्यू ईयर भेजता है. धमकी ऑनलाइन भेजता है. हम लोगों ने सोचा कि इसने अति कर दिया है. न एग्जाम हुए हैं न हमारी बात मानी गई और न ही हमसे एक बार भी मिला तो हम लोग क्या करते हैं कि सर्वर बंद करते हैं.
वीडियो सामने आने के बाद गीता ने ट्वीट कर कहा, जेएनयू वीसी ने हमारी फीस हजार गुना बढ़ा दी. शिक्षा के अधिकार की मांग के लिए हमें पनिशमेंट लेटर भेजा. मुझे खुद ऐसे अनगिनत पत्र मिले हैं. हम अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं. यही मैंने कहा है. इसमें छुपाने जैसा कुछ नहीं है.
JNUSU अध्यक्ष आईशी घोष ने दिल्ली पुलिस को हिंसा की जानकारी 3 बजे दे दी थी

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