पहलगाम अटैक (Pahalgam attack) के बाद भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को सस्पेंड कर दिया था. अब खबर है कि भारत ने इस संधि के तहत आने वाली नदियों का पानी नियंत्रित करने की कवायद शुरू कर दी है. भारत के इस कदम से पाकिस्तान (Pakistan) की हवा टाइट हो गई है. उनके हुक्मरान और सैन्य जनरल गीदड़भभकी पर उतर आए हैं. ताजा बयान लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी (ahmed sharif chaudhary) का है. उन्होंने भारत की ‘सांसे रोकने’ की धमकी दी है.
'तुम पानी बंद करोगे, हम तुम्हारी सांसें बंद कर देंगे', पाकिस्तानी जनरल ने दी भारत को खुली धमकी
Pakistan Army के प्रोपेगेंडा विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के डीजी (ISPR DG) अहमद शरीफ चौधरी ने Indus Water Treaty रद्द करने को लेकर भारत को खुली धमकी दी है.

पाकिस्तानी सेना के प्रोपेगेंडा विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के डीजी (ISPR DG) अहमद शरीफ चौधरी पाकिस्तान के एक यूनिवर्सिटी में स्पीच दे रहे थे. इस दौरान सिंधु जल संधि को निलंबित करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘यदि आप (भारत) हमारा पानी रोक देंगे, तो हम आपकी सांस बंद कर देंगे.’
पहलगाम अटैक के बाद 23 अप्रैल को भारत ने सिंधु जल संधि को सस्पेंड कर दिया था. इसके बाद से भारत कई बार यह दोहरा चुका है कि खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते. यह संधि तब तक सस्पेंड रहेगी जब तक पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं कर देता. भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को सिंधु जल संधि हुई थी. ये समझौता रावी, ब्यास, सतलुज, सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों के जल बंटवारे से संबंधित है.
भारत ने चिनाब नदी पर बने बांधों को रिचार्ज करने के लिए फ्लशिंग शुरू की है. जिससे पाकिस्तान दहशत में आ गया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने 4 मई को जम्मू और कश्मीर में चिनाब नदी पर स्थित बगलिहार और सलाल बांध का गेट बंद करना शुरू किया था. ताकि नदी से गाद और तलछट को हटाने के लिए फ्लशिंग ऑपरेशन चलाया जा सके.
फ्लशिंग का इस्तेमाल नदियों और जलाशयों में जमा रेत, गाद और तलछट को साफ करने के लिए किया जाता है. इस प्रक्रिया में पानी को तेज प्रवाह के साथ बाहर निकाला जाता है. इसमें तलछट को नीचे की ओर धकेलकर नदी को साफ किया जाता है.
1987 में सलाल और 2008-09 में बगलिहार बांध बनाया गया था. इनके बनने के बाद से पहली बार फ्लशिंग मेथड का इस्तेमाल किया गया है. इससे पहले सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान की आपत्तियों के चलते फ्लशिंग नहीं की जाती थी. मई महीने के शुरू में हुई फ्लशिंग से सलाल और बगलिहार बांध से 7.5 मिलियन क्यूबिक मीटर से ज्यादा तलछट को हटा दिया गया है.
ये भी पढ़ें - सिंधु जल समझौता क्या है? पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान का पानी रोक दिया
एक सीनियर अधिकारी की मानें तो पाकिस्तान की परेशानी अभी और बढ़ने वाली है. क्योंकि केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने हर महीने फ्लशिंग करने की सिफारिश की है. और इसके लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी करने की बात भी कही है.
पाकिस्तान ने इस पर आपत्ति जताई है क्योंकि फ्लशिंग से अचानक नीचे की ओर फ्लो बढ़ जाएगा. और गेट बंद कर बांधों को रिचार्ज करने के बाद पाकिस्तान को मिलने वाले पानी में भी कमी आएगी. पाकिस्तान पहले से ही चेनाब नदी में जल स्तर घटने से पानी की दिक्कत से जूझ रहा है. ऐसे में भारत का ये कदम उसकी परेशानी और बढ़ा देगा.
वीडियो: यात्रियों से भरी फ्लाइट ने मांगी लैंडिंग की इजाजत, पाकिस्तान ने अपना असली चेहरा दिखा दिया