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राजीव गांधी के भारत रत्न के चक्कर में आम आदमी पार्टी क्यों बुरी तरह फंस गई है

बात अलका लांबा के इस्तीफे तक पहुंच गई.

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अरविंद केजरीवाल का अभी तक इस मामले पर कोई बयान नहीं आया है.
दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार में फिर हलचल मच गई है. हलचल इस बात से कि आप विधायक अलका लांबा ने अपनी विधायकी और पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देने की बात कही है. लांबा दिल्ली के चांदनी चौक से विधायक हैं. कहा जा रहा है कि खुद पार्टी के मुखिया और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए कहा है. अब हुआ ये कि शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा में पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को दिए गए भारत रत्न सम्मान को वापस लेने की मांग करते हुए प्रस्ताव पेश किया. जिसका पार्टी की ही विधायक अलका लांबा ने विरोध किया. लांबा ने मीडिया से कहा कि वो इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं करती हैं और विधानसभा में इस प्रस्ताव को पेश किए जाने पर सदन से बाहर चली गईं. बाद में लांबा के इस कदम पर केजरीवाल ने उन्हें इस्तीफा देने को कह दिया और फिर इस्तीफा भी हो गया. लांबा ने ये भी कहा है कि मैं पार्टी प्रमुख के आदेश का पालन करते हुए इस्तीफा देने जा रही हूं. उन्होंने ट्वीट करके ये भी कहा कि मुझे मेरे भाषण में इस प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए कहा गया, जो मुझे मंजूर नहीं था. मैंने सदन से वॉकआउट किया. अब इसकी जो सजा मिलेगी मैं उसके लिए तैयार हूं." LAMBA TWEET अब बात करते हैं कि आम आदमी पार्टी क्यों राजीव गांधी के भारत रत्न को वापस लेने की मांग कर रही है. हुआ ये कि कांग्रेस के नेता सज्जन कुमार को दिल्ली हाइकोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों में दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. और ऐसे में आम आदमी पार्टी के दो विधायकों सोमनाथ भारती और जरनैल सिंह ने विधानसभा में ये प्रस्ताव रखा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इन दंगों को जस्टिफाई किया था. इसलिए उनका भारत रत्न वापस लिया जाना चाहिए. जबकि अलका का ये कहना है कि किसी व्यक्ति को किसी एक कार्य के लिए ये सम्मान नहीं दिया जाता है. देश के लिए जीवन पर्यन्त उल्लेखनीय कामों के लिए ये सम्मान दिया जाता है. इसलिए एख वजह से भारत रत्न वापस लेने की बात का समर्थन सही नहीं है. राजीव गांधी ने देश के लिए कुर्बानी दी है, इस बात को नहीं भुलाया जा सकता है." Saurabh Bhardwaj अब पार्टी को समझ नहीं आ रहा कि वो क्या करे. क्योंकि यहां एक लोचा हुआ है. लोचा ये कि जो प्रस्ताव सदन में पेश हुआ और सदस्यों में बांटा गया, उसमें राजीव गांधी का जिक्र नहीं था. मगर मालवीय नगर से विधायक सोमनाथ भारती ने इसे जोड़ दिया और तिलक नगर से विधायन जरनैल सिंह ने इसे पढ़ दिया. इस पर आम आदमी पार्टी के दूसरे विधायक सौरभ भारद्वाज ने एक ट्वीट करके कहा है कि जो प्रस्ताव सदन में पेश किया और सदस्यों में बांटा गया था, उसमें राजीव गांधी से जुड़ी ये बात नहीं थी. एक विधायक ने अपनी हैंडराइटिंग में इसे जोड़ दिया जो कि सही नही था. प्रस्ताव में सशोंधन इस तरह से नहीं किए जा सकते हैं. और इसी बात को दिल्ली विधानसभा के स्पीकर राम निवास गोयल ने कहा कि सदन में 1984 सिख दंगा केस पर विचार करने के लिए प्रस्ताव रखा गया था। जो वास्तविक प्रस्ताव में उसमें राजीव गांधी का कोई उल्लेख ही नहीं है। यह बात विधायक जरनैल सिंह ने अपनी स्पीच में जोड़ी थी। यह एक भावनात्मक मुद्दा है जिस पर बोलते वक्त भावनाओं में बह जाते हैं. Somnath Bharti tweet2 मामला जब आगे बढ़ गया तो सोमनाथ भारती ने भी ट्वीट करके सफाई दी कि ये संशोधन विधानसभा में वोटिंग के लिए नहीं रखा गया था इसलिए इसे नहीं माना जा सकता. ये संशोधन मान्य नहीं है. अब विरोधी पार्टी यानी बीजेपी ये आरोप लगा रही है कि आम आदमी पार्टी कांग्रेस के दवाब में काम कर रही है. वैसे ये भी माना जा रहा है कि केजरीवाल और राहुल गांधी के बीच 2019 के लोकसभा चुनावों में एक दूसरे का साथ देने की बात हुई है और इसी के चलते आम आदमी पार्टी कुछ भी ऐसा नहीं करना चाह रही जिससे आगे चलते दोनों के साथ आने पर सवाल उठें. केजरीवाल ने इस मसले पर अभी तक कोई बयान नहीं दिया है और न ही ये कंफर्म हो पाया है कि अब पार्टी के नेताओं की सफाई के बाद लांबा ने अपने इस्तीफे के निर्णय को बदला है या नहीं. Jarnail Singh

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