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शीलम हिंदू थी, सोनू मुसलमान, उनके इश्क का अंजाम देख लो

आगरा के एक स्कूल से शुरू हुई ये प्रेम कहानी. खत्म हुई एक बंद कमरे में केरोसीन की बू के साथ.

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Photo Credit- egagah
ताजमहल से 5 किलोमीटर दूर मोहल्ला है, नैनाना जाट नाम का. दोनों यहीं रहते थे. यहां एकमात्र को-एड स्कूल है- श्रीराम कृष्ण इंटर कॉलेज. दोनों यहां साथ में पढ़ते थे. इश्क हो गया. पर एक दिक्कते थी. दोनों के मजहब अलग थे. लड़की हिंदू थी, लड़का मुसलमान था. 2015 में जब शीलम 17 की थी तो उसने इस स्कूल में एडमिशन लिया. 17 साल का सोनू मोहम्मद यहां उसका सीनियर था. दोनों को प्यार हुआ. एक साल तक उन्होंने ये बात अपने घर, परिवार और दोस्तों से छिपाए रखी. और आगरा वालों के लिए भी ये प्यार छिपा ही रहता, अगर दोनों की जली लाश 14 मई को एक कमरे में न मिली होती. 21 मार्च को उस वक्त शीलम उस वक्त घर पर अकेली थी. पापा रामू 800 रुपये LPG सिलेंडर लाने के लिए देकर अपनी पत्थर काटने की नौकरी पर निकल गए. शीलम उनके सात बच्चों में  तीसरे नंबर पर थी. इसके बाद बिना फ़ोन लिए और बिना किसी को बताए शीलम और सोनू स्कूल में मिले और दोनों ने आगरा छोड़ने का मन बना लिया. सवेरे 11 बजे मोहम्मद वकील खान यानी सोनू के पापा को स्कूल से फोन आया कि, 'सोनू आज एग्जाम देने क्यों नहीं आया?' इसके बाद वो घबरा गए और जब स्कूल पहुंचे तो पता चला कि सोनू को शीलम के साथ बाइक पर जाते हुए देखा गया था. सोनू का एक भाई है 16 साल का. जो सोनू के देर से घर आने पर हर रात उसके लिए दरवाजा खोलने के लिए जागता था. उसने बताया
'पिछली दीवाली पर छूट चल रही थी तो सोनू के लिए बाइक खरीदी गई थी. वो कभी आगरा के बाहर नहीं गया. न ही मैं कभी गया हूं. लेकिन उसने मुझे बताया था कि वो रोड के सिग्नल्स का मतलब सीख रहा है.'
थोड़े से रुपये दोनों के पास थे. इतने रुपये लेकर ही सोनू और शीलम पहले अजमेर गए, फिर वहां से अहमदाबाद. 4 दिन में पैसे ख़त्म हो गए. फिर सोनू ने एक दिन सवेरे 6 बजे घर पर फोन किया. उसने पूछा,
'क्या मैं घर आऊंगा तो मुझे मारा जायेगा? उसने ये भी बताया कि वो लड़की उसके साथ ही है.'
25 मार्च की शाम, सोनू और शीलम घर वापस आ गए. घर वालों ने इस बात की कोई रिपोर्ट नहीं की. बस दोनों को अलग-अलग कर दिया. स्कूल जाना बंद करवा दिया गया. यहां तक दोनों परिवारों ने अपने निकलने के रास्ते भी अलग कर लिए. सोनू के पिता जहां पान की गुमटी लगाते हैं, वहीं पास में वो अपने चाचा की इलेक्ट्रिक शॉप में हाथ बंटाने लगा. 9 मई को रामू पर उसके घर के लोगों ने बेटीबेटी शीलम की शादी करवाने का दबाव डाला गया. शीलम की शादी पास के ही बरोली अहीर मोहल्ले के एक लड़के से कर दी गई. शादी के पांचवें दिन ही शीलम पापा के घर नैनाना जाट लौट आई. उसके पापा बताते हैं,
'उसने मुझसे बात की. उसने मुझसे कहा कि वो खुश है. और उसे अपने ससुराल वालों से कोई परेशानी नहीं है.'
आधी रात के वक्त मैंने घर का दरवाजा बाहर से बंद किया और छत पर सोने चला गया. क्योंकि उस रात गर्मी बहुत थी. मेरी बीवी और बच्चे घर में ही अंदर थे. पुलिस का कहना है कि उसी वक्त शीलम घर से छिपकर निकल गई, सोनू के घर. किसी तरह वो सोनू के घर के पहले फ्लोर पर पहुंची, जहां सोनू अकेला रहता था. दोनों ने दरवाजा अंदर से बंद किया. उस वक्त करीब 4 बजे थे. दोनों ने अपने ऊपर केरोसिन छिड़का और आग लगा ली. कोतवाली सदर SHO आदित्य कुमार मुखर्जी बताते हैं,
'जब घरवालों ने कमरे से धुआं निकलते देखा तो उन्हें लगा दिल टूटने के चलते सोनू ने सुसाइड कर लिया है. जब तक पुलिस ने दरवाजा तोड़ा नहीं, किसी को पता नहीं था कि कमरे के अन्दर दो लोग हैं.'
शीलम के पापा भी अपनी छत से देख रहे थे कि किस तरह से लोग वकील खान के घर के बाहर जुट रहे हैं. थोड़ी ही देर में उनको पता चला कि उनकी बेटी घर से गायब है. शीलम के पिता रामू ने कहा,
'शीलम के ससुराल वाले 8 बजे आये. मैंने उन्हें बताया क्या हुआ है? मैं सोनू के घर गया और शीलम का जला हुआ शरीर देखा. सोनू को घर के पास ही दफना दिया गया है. शीलम को उसके ससुराल वालों के सामने जलाया गया. दोनों घरों के लिए ये बहुत दुख की बात है.'
दोनों ही घरों में मां को संभालना मुश्किल है. लोग आपस में बातें कर रहे हैं कि क्या इतनी उम्र में इन बच्चों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए थी? सोनू के पापा वकील खान अपना सिर हिलाते हुए बस एक ही बात दोहरा रहे हैं,
'पानी के पास तब क्यों जाना, जब नहीं जानते कि तैरना कैसे है?'
लेकिन जबरदस्ती शादी न करवाई जाती तो क्या वे पानी या आग के पास जाते?

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