तो आपकी सैलरी में इस बार बढ़िया वाला इन्क्रीमेंट लगा है? खुश हो. नया फोन खरीदना है? I-PHONE टाइप का धांसू सा. बहुत सही. वैसे कहां से खरीद रहे हैं? शॉप पर जाने का टाइम नहीं है? ओह्हो, तो ऑनलाइन ऑर्डर कर दिया है? शाबाश. लेकिन जब आपका नया वाला फ़ोन आए तो एक बार चेक कर लेना. ऑनलाइन कंपनियां चाहे कित्ते भी वादे कर लें कि एकदम ओरिजिनल सामन पहुंचाएंगे. हो सकता है कि आपको जो फ़ोन मिला हो वो नकली हो. माने पालिका बाजार या नेहरु प्लेस से खरीदा गया हो, 560 रुपये में. होने को तो कुछ भी हो सकता है.
फ्लिपकार्ट का ऐड कहता है. फ्लिपकार्ट मतलब बिलकुल पक्का-100% ओरिजिनल प्रोडक्ट. https://www.youtube.com/watch?v=0ZNwJ987zSU
लेकिन इसी कंपनी के एक डिलीवरी बॉय ने इस सिस्टम में सेंध लगा दी. ढेर सारे फ़ोन चुरा लिए. I-Phone. और उसके बदले में डिब्बों में नकली फ़ोन भर दिए.
बी नवीन 21 साल का है. B.Com ग्रेजुएट हैं. चेन्नई के फ्लिपकार्ट में अपने एरिया का सेल्स हेड था. उसने 5 लाख रुपये के फ़ोन चुरा लिए. नवीन खुद गलत एड्रेस से फ़ोन आर्डर करता था. फिर जब उस एड्रेस पर फ़ोन आ जाते थे. वहां नवीन डिब्बों से असली फ़ोन निकाल लेता था. उसकी जगह नकली फ़ोन डाल कर कंपनी को वापस कर देता था. कहता था कि कस्टमर ने वापस कर दिया. क्योंकि फ़ोन सही नहीं था. इस तरह से कंपनी के पास बहुत सारे नकली फ़ोन इकट्ठे हो गए थे.
लेकिन फंस ही गया...
कंपनी के मैनेजर को कुछ डाउट हुआ. चेक करवाया कि पिछले कुछ समय से ढेर के ढेर फ़ोन वापस आ रहे हैं. कई सारे कस्टमर फ़ोन लौटा दे रहे हैं. इन्क्वाइरी की गई. जो फ़ोन नवीन ने कंपनी को वापस किए थे. उनकी जांच हुई. सब नकली थे. शक नवीन पर गया. पूछताछ हुई. थोड़ी ही झड़क में नवीन ने अपना फ्रॉड कबूल लिया. नवीन ने 4 महीने पहले ही कंपनी जॉइन की थी. पिछले एक महीने से वो ये काम कर रहा था. इन्वेस्टिगेशन में पुलिस को नवीन से बहुत सारी बातें पता चलीं. पुलिस के एक ऑफिसर ने कहा. नवीन के ऊपर काफी सारा लोन था. उसकी सैलरी कम थी. अपना लोन चुकाने के लिए उसने ये धांधली की. उसके अपने ऑफिस में तो CCTV कैमरा लगा था. इसीलिए ये पूरा काम वो किसी और जगह जा कर करता था. ताकि किसी को भी भनक ना लगे. पुलिस कह रही है कि नवीन का कोई भी पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है. फिलहाल अब उसको मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा.
हमारे पापा मम्मी या उस जनरेशन के कई लोग हैं. जिनको ऑनलाइन सामान मंगवाना पसंद ही नहीं हैं. जब तक खुद आंखो से देख ना लें. बीस पच्चीस सामान निकलवा के ना देख लें. सामान खरीद ही नहीं सकते. लेकिन हम लोगों के लिए चीज़ें थोड़ी अलग हैं. आज की जो इत्ती बिजी वाली लाइफ स्टाइल है. दुकान पर जा कर शॉपिंग करने का टाइम तो होता नहीं है. हमारे ऑफिस में ही दिन भर में कित्ते सारे पार्सल्स आते रहते हैं. कभी अमेज़न, कभी फ्लिपकार्ट, शॉपक्लूज़, हर जगह से. फटाफट पेमेंट किया. और सामान खुद आपके दरवाज़े पर. खुद को गिफ्ट देने जैसा होता है ये.
लेकिन ये जो पेमेंट करते हैं न हम लोग. कभी डेबिट कार्ड से. कभी क्रेडिट कार्ड से. कभी नेट बैंकिंग. हैकर लोगों के लिए डिटेल चुराना बहुत ही आसान होता है. ऊपर वाले केस में तो डिलीवरी वाला लड़का घपला करता था. लेकिन कई बार कुछ बिचौलिए भी बैठे होते हैं. जैसे ही आपने अपना कार्ड नंबर और डिटेल डाले पेमेंट करने के लिए. बस वहीँ से उन्होंने छाप लिया. अकाउंट और आइडेंटिटी चुरा ली. आपके अकाउंट से पेमेंट करते रहे. और एक दिन अचानक से बैंक का मैसेज आएगा. आपके अकाउंट में जीरो बैलेंस है.
एक नाम बहुत जगह पढ़ा होगा अपने. फिशिंग. अमां मछली पकड़ने वाली बात नहीं कर रहे हैं. फिशिंग माने डिटेल्स चुराना. डिटेल्स किसी के डेबिट या क्रेडिट कार्ड की. फिर उसको यूज़ करके हैकर लोग अकाउंट से पैसा चुरा लेते हैं. ऐसे में जब भी पेमेंट करो. जहां वेबसाइट का एड्रेस होता है, www पर जब हरा-हरा रंग आ जाये. वेबसाइट और पोर्टल सेफ है, ये लिखा हो तभी पेमेंट करना. और जब भी सामान डिलीवर हो जाए. उसको भी ठोक बजा कर देख लो. और अगली बार जब भी ऑनलाइन पेमेंट करना. या ऑनलाइन कोई सामान मंगवाना. बहुत ध्यान से. सोच समझ के. और सावधानी से. समझ रहे हो न.