अप्रैल, 2013. चीन के मंगोलिया की 18 साल की लिली को पता चला कि वो प्रेग्नेंट है. उसने 35 हफ़्ते तक किसी को कुछ नहीं बताया. उसके भाई को पता चला तो उसने अबॉर्शन की सलाह दी. अस्पताल में पूरी प्रक्रिया हुई. बताया गया कि अबॉर्शन हो गया है. फिर तीन दिन बाद पुलिस ने उसे बताया कि नर्स ने उसका बच्चा बचा लिया था.
रिपोर्ट के मुताबिक, लिली का अबॉर्शन आसानी से हो गया था. इसके लिए उसने 20 युवान (लगभग 190 रुपए) भी खर्च किए.
नर्स ने कुबूला
नर्स लियांग ज़ियाओहुआ ने ये बात कुबूल की है. उसे लगा कि गर्भ को बचाया जा सकता है. उसने कहा कि उसे बच्चे के रोने की आवाज़ सुनाई दी. उसने बच्चे को बचाने के लिए उसे प्लास्टिक बैग से बाहर निकाला. उसे ऑक्सीजन मास्क लगाया. पानी पिलाया. उसने कई लोगों से पूछा कि कोई उस बच्चे को गोद लेना चाहेगा. उसने किसी को नहीं बताया कि बच्चा लड़का है या लड़की.
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नर्स ने अपने एक रिश्तेदार बहन को बच्चा बेच दिया. वो उसे अपने घर ले गई. लेकिन गांव वालों को कुछ शक हुआ तो उन्होंने पुलिस को बच्चे के बारे में बताया. फिर पुलिस ने लिली को सारी जानकारी दी. लिली पुलिस से बच्चे के बारे में पूछती रही लेकिन उसे कुछ नहीं बताया गया. उसने पुलिस पर गैर जिम्मेदार होने का आरोप भी लगाया. लिली ने कई हेल्थ ब्यूरो और फैमिली प्लानिंग ब्यूरो के चक्कर काटे पर उसे कुछ पता नहीं चला.
हॉन्गशान डिस्ट्रिक्ट पब्लिक सिक्योरिटी ब्यूरो के डिप्टी कमांडर ज़ैंग ने कहा कि हमारे हिसाब से बच्चे का अपहरण हुआ था. हालांकि ऐसी कोई याचिका दायर नहीं की गई है.नर्स लियांग ज़ियाओहुआ को बच्चे के अपहरण के आरोप में 8 जनवरी 2014 को गिरफ्तार कर लिया गया. लिली ने लियांग से मेडिकल खर्च, वकीलों की फ़ीस के लिए मुआवज़े की मांग की है. लियांग को दो साल कैद की सजा दी गई है. हालांकि लिली को मुआवज़ा मिलेगा या नहीं, अब तक ये तय नहीं है.
फरवरी 2014 में हॉन्गशान डिस्ट्रिक्ट पब्लिक सिक्योरिटी ब्यूरो के डिप्टी कमांडर ज़ैंग के साथ तीन और सदस्यों ने नर्स को फ़र्ज़ में लापरवाही करने का आरोपी माना. आखिरकार मई 2017 में ये केस बंद कर दिया गया.
चीन में बर्थ पॉलिसी
2015 तक चीन में एक बेबी ही कर सकते थे. क्योंकि यहां की जनसंख्या बहुत ज़्यादा है. लेकिन इसके बाद दो बच्चों को मंजूरी मिल गई. इसीलिए यहां अबॉर्शन वैध हैं. लेकिन लिंग की जांच करने के लिए किए गए अबॉर्शन वैध नहीं हैं. 2001 में चीन का सेक्स रेशियो 100 लड़कियों पर 117 लड़के था. इसके बाद चीन सरकार ने सख्ती की और सेक्स-सेलेक्टिव अबॉर्शन पर रोक लगी. इसके लिए कड़ी सजा का भी प्रावधान है लेकिन फिर भी ये काम जारी है. लोग मोटी फ़ीस देकर प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स जानने की कोशिश करते हैं.
ऐसे मामले पहले भी सामने आए हैं. कभी दम्पति को बच्चे के मर जाने की ख़बर देकर बच्चा बेच दिया जाता है तो कभी अबॉर्शन के बाद भी प्रेग्नेंसी रुक जाती है. अस्पताल की ऐसी लापरवाही से कई बार लोग दिमागी और जज़्बाती तौर पर काफी कुछ सहते हैं. रोज़ एक जैसा काम करते-करते कई बार कुछ डॉक्टर और नर्स भूल जाते हैं कि वो इंसानी ज़िंदगी से जुड़े 'पेशे' में हैं. लिली वाले मामले में नर्स के काम को मेरे हिसाब से ग़लत नहीं माना जाना चाहिए. हालांकि उसने बच्चे को बेचकर गलती की लेकिन जान भी तो उसी ने बचाई. इस मामले पर कोर्ट को और सोचना चाहिए.
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