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पाकिस्तान में ऐसी बाढ़ आई कि 80 हज़ार करोड़ रुपये बह गए!

यूनाइटेड नेशंस ने पाकिस्तान के लिए 160 मिलियन डॉलर्स की फ़्लैश अपील जारी की है

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पाकिस्तान की बाढ़ का एक दृश्य (AP)

इन दिनों पाकिस्तान बाढ़ के कहर से जूझ रहा है. देश की 15 प्रतिशत आबादी सीधे तौर पर बाढ़ से प्रभावित हुई है. 

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आज के ताज़ा अपडेट्स इस प्रकार हैं.

- पाकिस्तान में बाढ़ से लगभग 80 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. ये पाकिस्तान की कुल जीडीपी का तीन प्रतिशत है. सिंध में सबसे ज़्यादा बारिश और तबाही हुई है. अकेले सिंध में लगभग 15 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है.

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- पाकिस्तान की बाढ़ पर पूरी दुनिया से प्रतिक्रिया आ रही है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, सऊदी किंग सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ ने सहानुभूति जताई है. भारत ने मदद की पेशकश भी की है.

- यूनाइटेड नेशंस ने पाकिस्तान के लिए 160 मिलियन डॉलर्स की फ़्लैश अपील जारी की है. फ़्लैश अपील क्या होती है? UN इस तरह की अपील किसी आपातकाल की स्थिति में जारी करता है. इसमें UN दुनियाभर के देशों और इंटरनैशनल डोनर्स से दान की अपील करता है.

 इस बीच एक राहत की खबर ये रही कि IMF ने पाकिस्तान को 1.1 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज पास कर दिया है. इससे पाकिस्तान को राहत मिलने की उम्मीद जग गई है. 

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दुनिया की ख़बरों में आज सुर्खी अंगोला देश ने भी बनाई. 

साउथर्न अफ्रीका के वेस्ट कोस्ट में एक देश पड़ता है. अंगोला. हाल ही में अंगोला में चुनाव हुए. चुनाव के नतीजे आए. फिर हारी हुई पार्टी ने चुनावी नतीजों को ख़ारिज कर दिया. लेकिन चुनाव आयोग ने पीपुल्स मूवमेंट फ़ॉर द लिबरेशन ऑफ़ अंगोला (MPLA) को विजेता घोषित कर दिया.

MPLA पार्टी पांच दशक से अंगोला पर राज कर रही है. राष्ट्रपति जोआओ लौरेंको फिर से शपथ लेने जा रहे हैं. लेकिन उनकी पार्टी को कैरियर के सबसे मुश्किल चुनाव का सामना करना पड़ा. चुनाव में MPLA की मुख्य विपक्षी पार्टी यूनिटा को इस बार 44% वोट मिले हैं. वहीं MPLA को 51.2 फीसदी वोट मिले.

दरअसल, अंगोला पिछले कुछ वक्त से गरीबी और बेरोज़गारी से जूझ रहा है. इसके लिए MPLA की आलोचना भी होती रही है. इसी वजह से इस बार के चुनाव में यूनिटा को जनता का जमकर समर्थन भी मिला. लेकिन अंतिम परिणाम MPLA के पक्ष में ही रहा.

अंगोला 1975 में पुर्तगाल से आज़ाद हुआ था. तभी से सत्ता की कमान MPLA के हाथों में रही है. आज़ादी के तुरंत बाद देश में सिविल वॉर शुरू हो गया था. ये 2002 तक चला. फिर दोनों पार्टियां चुनावी मैदान में एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी बन गई.

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