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गुलाम नबी आजाद के समर्थन में जम्मू-कश्मीर के 5 पूर्व विधायकों ने छोड़ी कांग्रेस

आज ही गुलाम नबी आजाद ने दिया था कांग्रेस से इस्तीफा

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नई पार्टी बनाएंगे गुलाम नबी आजाद | फोटो: आजतक

कांग्रेस (Congress) से गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) के इस्तीफे के बाद पार्टी को झटके लगने शुरू हो गए हैं. आजाद के समर्थन में पार्टी के 5 पूर्व विधायकों ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. ये सभी पूर्व विधायक जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) से हैं.

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इन विधायकों ने एक चिट्ठी जारी कर कहा,

'हम सभी जम्मू-कश्मीर की भंग विधानसभा के विधायक और पूर्व मंत्री हैं. हम लोग कांग्रेस पार्टी में अपने पदों के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे रहे हैं. ये फैसला हमने गुलाम नबी आजाद के समर्थन में लिया है.'

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कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले इन विधायकों के नाम जीएम सरूरी, हाजी अब्दुल रशीद, मोहम्मद अमीन भट्ट, गुलज़ार अहमद वानी और चौधरी मोहम्मद अकरम हैं.

Ghulam Nabi Azad इस्तीफे के बाद क्या बोले?

आज ही जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस से इस्तीफे दे दिया था. इसके बाद उन्होंने कहा कि वे अपनी पार्टी बनाएंगे. आजाद ने बीजेपी में शामिल होने की खबरों का खंडन कर दिया है.

गुलाम नबी आजाद ने आज तक से बातचीत में कहा,

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‘मेरे विरोधी पिछले 3 साल से कह रहे हैं कि मैं भाजपा में जा रहा हूं. यहां तक कि उन्होंने तो मुझे राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति भी बनवा दिया. मैं अब जम्मू भी जाऊंगा, कश्मीर भी जाऊंगा. जम्मू-कश्मीर में हम अपनी पार्टी बनाएंगे. इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर भी देखेंगे.’

Ghulam Nabi Azad ने Rahul Gandhi के लिए क्या कहा?

गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजे गए इस्तीफे में राहुल गांधी पर निशाना साधा है. उन्होंने लिखा,

राहुल गांधी अपने आस-पास अनुभवहीन लोगों को रखते हैं और उन्होंने वरिष्ठ नेताओं को साइडलाइन कर दिया. ऐसा लगता है कि कांग्रेस में राहुल गांधी के सुरक्षाकर्मी और पर्सनल स्टाफ ही सारे फैसले ले रहे हैं. दुर्भाग्य से राहुल गांधी के राजनीति में आने के बाद जब उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया था, उन्होंने कांग्रेस के कार्य करने के तौर-तरीकों को खत्म कर दिया. उन्होंने संपूर्ण सलाहकार तंत्र को ही ध्वस्त कर दिया.

गुलाम नबी ने अपने इस्तीफे में ये भी लिखा कि राहुल गांधी का प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा जारी किया गया अध्यादेश फाड़ना, उनकी अपरिपक्वता दिखाता है. इससे 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा.

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