पिछले शनिवार की शाम इंशा अपने घर की किचन में थी. एक पैलेट गन का गोला खिड़की से भीतर आया और उसके माथे पर जा फटा. इंशा का चेहरा लहूलुहान हो गया और बाईं आंख उसी वक्त बाहर निकल आई. दाईं आंख की हालत भी बुरी है. उसका इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि दोबारा रौशनी आने की कोई संभावना नहीं है. पैलेट के घावों से उसे सांस की दिक्कतें होने लगी हैं. उसे ICU में भर्ती कराया गया है.कश्मीर में सेना प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल कर रही है. ये छोटे-छोटे छर्रे होते हैं जो आंखों में घुस जाती है तो जिंदगी नरक हो जाती है. शरीर पर इसका क्या असर होता है, आप नीचे की तस्वीरों में देखें.
37 मारे गए, 1838 घायल
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अलग-अलग जगहों पर अब तक 1838 लोग घायल हो चुके हैं, जिनमें से 138 लोगों की आंखों में चोट आई है. इनमें से 46 लोगों की आंख में गंभीर चोट है और हो सकता है कि उनकी आंख की रौशनी कभी न लौटे.पूरे सूबे में प्रदर्शनकारियों और सेना के बीच झड़पों में 37 लोग मारे गए हैं. जिन लोगों की आंखों में चोटें आई हैं उनके इलाज के लिए प्रधानमंत्री के दखल के बाद एम्स की स्पेशल टीम कश्मीर पहुंची है. श्रीनगर के SMHS हॉस्पिटल में पैलेट से जख्मी हुए 105 लोग भर्ती कराए गए थे. इनमें से 90 का ऑपरेशन किया गया और डॉक्टरों के मुताबिक, लगभग सभी की आंखें चली गईं. एक 25 साल के नौजवान के दिल में पैलेट घुस गई. एक के रीढ़ की हड्डी में पैलेट लगने से उसका पांव पैरालाइज्ड हो गया.
पुलिस और पैलेट गन यानी नॉन-लीथल हथियार
कश्मीर में पत्थरबाजों और हिंसक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस और सेना 2010 से ही पैलेट गन का यूज कर रही है. एक नॉन-लीथल हथियार होने की वजह से इसका इस्तेमाल शुरू किया गया था. नॉन-लीथल हथियार उन्हें कहा जाता है, जिसके इस्तेमाल से मरने के चांसेस बहुत कम होते हैं. पर साल दर साल पुलिस इनका यूज बढ़ाती गई.पैलेट गन में लगने वाले पैलेट्स की रेंज 5 से 12 के बीच होती है. 5 सबसे ज्यादा खतरनाक होता है. वैसे प्रदर्शन कर रही भीड़ को कंट्रोल करने के लिए 9 रेंज का पैलेट रिकमेंडेड है. पर पुलिस भीड़ को काबू करने को कई बार 6 या 7 रेंज के पैलेट भी यूज करती है.
500 रुपये में किराए पर मिलते हैं पत्थरबाज़?
इससे पहले 'इंडिया टुडे टीवी' ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के हाथ लगे एक वीडियो के हवाले से दावा किया था कि घाटी में किराए के पत्थरबाजों से माहौल खराब किया जा रहा है. वीडियो में एक पत्थरबाज़ का कहना था कि अलगावादी नेता गिलानी के लोग पत्थर फेंकने के लिए रोज के 500 रुपए देते हैं. चैनल ने अपने सूत्रों के हवालों से लिखा था कि हवाला के जरिए पाकिस्तान से 60 करोड़ रुपए कश्मीर भेजे गए थे. ISI इस रकम का इस्तेमाल कश्मीर के माहौल में जहर घोलने के लिए कर रही है. पैसा भेजने के लिए जमात-उद-दावा चीफ हाफिज सईद और हिजबुल के आका सलाहुद्दीन के नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया. लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल के स्थानीय संपर्कों के सहारे 60 करोड़ की रकम आतंकियों तक पहुंची. पत्थर फेंकने पर पैसे मिलते हैं. भारतीय सेना पत्थरबाज़ों को पैलेट से जवाब देती है. लेकिन इस आंच में जल रहीं इंशा जैसी बेकसूर लड़कियों का क्या?ये भी पढ़ें: कश्मीर में कर्फ्यू तोड़ मुसलमानों ने बचाई अमरनाथ तीर्थयात्रियों की जान मस्जिद है दूर चलो यूं कर लें, अमरनाथ यात्रियों की जान को बचाया जाए 'प्यारे बुद्धिजीवियों, बुरहान वानी कश्मीर वाणी नहीं है'























