मणिपुर में महीनों से चल रही हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य के 10 विधायकों ने पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है. कुकी-ज़ोमी समुदाय से आने वाले इन विधायकों ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि मणिपुर के पांचों पहाड़ी जिलों के लिए अलग से मुख्य सचिव और डीजीपी पद पर लोगों को नियुक्त किया जाना चाहिए. विधायकों का दावा है कि दो समुदायों के बीच हो रही हिंसा के चलते इन जिलों का राजधानी इंफ़ाल से संपर्क टूट गया है. इन 10 में से 7 विधायक भाजपा के नेता हैं. सभी ने पीएम रिलीफ फंड से 500 करोड़ की सहायता भी मांगी है. ये पैसे कुकी-ज़ो लोगों के पुनर्वास पर खर्च किए जाएंगे.
मणिपुर पर PM मोदी को BJP विधायकों की चिट्ठी, 'CM बीरेन सिंह ने कुकी समुदाय के खिलाफ जंग छेड़ी'
चिट्ठी लिखने वाले 10 कुकी-समुदाय के विधायकों में 7 बीजेपी के नेता हैं. उन्होंने CM बीरेन सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
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इंडिया टुडे से जुड़े सारस्वत कश्यप की रिपोर्ट के मुताबिक 16 अगस्त को पीएम को भेजे गए इस ज्ञापन में इन विधायकों ने कहा है कि चुराचांदपुर, कांगपोकपी, चंदेल, टेंग्नौपाल और फेरजॉल जिलों में मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक पद पर अधिकारियों को नियुक्त किया जाना चाहिए. इन विधायकों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में अच्छे प्रशासन के लिए ये कदम जरूरी है. इस ज्ञापन में लिखा गया,
'3 मई के बाद से ही मैतेई मिलिशिया इंफ़ाल में रह रहे कुकी-ज़ोमी समुदाय के लोगों पर भीषण हमला करते रहे हैं. सरकारी कर्मचारी, व्यापारी, दैनिक वेतन कमाने वाले लोग - सब पर हमले किए गए हैं. विधानसभा के सदस्यों को भी नहीं बख़्शा गया. दो मंत्रियों के घर जला दिए गए थे.'
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक ज्ञापन में विधायक मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह पर भी हमलावर दिखे. लिखा कि बीरेन सिंह लगभग रोज़ कुकी-ज़ो समुदाय के खिलाफ जंग छेड़ रहे हैं और पहाड़ियों पर बसे ट्राइबल्स के गावों पर हमले करवा रहे हैं. इस ज्ञापन में मणिपुर की हिंसा को 'राज्य प्रायोजित' बताया गया. कई ऐसे उदाहरण भी बताए गए, जिनमें सीएम बीरेन सिंह और मैतेई नेताओं ने कथित तौर पर कुकी-ज़ोमी लोगों के खिलाफ हिंसा की बात कही है. ज्ञापन में लिखा गया,
'कुकी-ज़ोमी लोग इंफ़ाल नहीं जा सकते. इंफ़ाल में कार्यरत सरकारी कर्मचारी या दूसरी घाटी जिलों में कार्यरत अधिकारी अपने ऑफिस नहीं जा सकते. कुकी-ज़ो समुदाय के आईएएस, एमसीएस और आईपीएस अधिकारी अपना काम नहीं कर पा रहे हैं.'
इस चिट्ठी में कुकी-ज़ोमी लोगों के लिए इंफ़ाल को 'valley of death and destruction' कहा गया, यानी 'मौत और विनाश की घाटी'.
इस ज्ञापन को भेजने वाले 10 विधायकों के नाम हैं - हाओखोलेत किपजेन, लेटपाओ हाओकिप, एलएम खाउते, नेमचा किपजेन, एन सनाते, पाओलिएनलाल हाओकिप, चिनलुनथांग, लेटजमांग हाओकिप, किमनिओ हाओकिप और वुंगजागिन वाल्टे (Haokholet Kipgen, Letpao Haokip, LM Khaute, Nemcha Kipgen, Ngursanglur Sanate, Paolienlal Haokip, Chinlunthang, Letzamang Haokip, Kimneo Haokip Hangshing and Vungzagin Valte).
वीडियो: मोदी, मणिपुर और अविश्वास प्रस्ताव पर विदेशी मीडिया ने क्या-क्या छाप दिया?
















