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तारीख़: छोटे से कमरे में ख़त्म हुआ 236 साल का साम्राज्य?

जिसके बारे में कहा जाता था कि यदि केवल उसके ख़ज़ाने के मोती-मोती निकालकर चादर की तरह बिछाए जाएं

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 पी. बी. शेली नाम के एक अंग्रेज़ी लेखक हुए. ओज़ीमेंडियस नाम की उनकी एक कविता बड़ी फेमस है. ओज़ीमेंडियस मिश्र के एक राजा का नाम था. कविता कुछ यूं है कि ओज़ीमेंडियस की एक मूर्ति रेगिस्तान में पड़ी है. मूर्ति का सर टूट के रेत में धंसा हुआ है. और बगल में लिखी हैं ये पंक्तियां

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“मेरा नाम ओज़ीमेंडियस है, मैं राजाओं का राजा हूं
मैंने जो काम किए हैं, हे शक्तिमान लोगों देखो,
और मायूसी में जियो!”

दुनिया को अपनी मुट्ठी में समझने वाले ऐसे जितने भी शासक हुए, तारीख ने उन सब का अंजाम यही बताया, उनके महलों पर वक्त की रेत जम गई और साम्राज्य धूल में उड़ गए. आज कहानी एक ऐसे ही साम्राज्य की. जिसके बारे में कहा जाता था कि यदि केवल उसके ख़ज़ाने के मोती-मोती निकालकर चादर की तरह बिछाए जाएं, तो पिकाडिली सरकस के सारे फुटपाथ ढक जाएं. जिसके ख़ज़ानों में माणिक, मुक्ता, नीलम, पुखराज आदि के टोकरे भर-भर कर तलघरों में रखे हुए थे- जैसे कि कोयले के टोकरे भरे हुए हों. 14 जनवरी 2023 - ये वो तारीख थी जिस दिन 236 साल पुराने इस साम्राज्य ने अपने आठवें निज़ाम का अंत देखा. हम बात कर रहे हैं हैदराबाद रियासत की. 14 तारीख को हैदराबाद के आख़िरी निज़ाम नवाब मीर बरकत अलीख़ान वालाशन मुकर्रम जाह बहादुर का इंस्ताबुल में इंतकाल हो गया. क्या थी उनकी कहानी और क्या हुआ उनकी हैदराबाद रियासत की अकूत धन दौलत का. देखिए वीडियो.

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