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तारीख़: CIA ने जिसे 634 बार मरवाने की कोशिश की, क्यों खुद को भारत का सबसे बड़ा दोस्त कहता था?

सैकड़ों लोगों के आगे वो शख्स और इंदिरा आमने-सामने आते हैं. इंदिरा हथौड़ी लेने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाती हैं.

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 साल 1983. मौका है गुटनिरपेक्ष देशों के सम्मलेन का. इस बार इस सम्मलेन की मेजबानी भारत को करनी है. पूरा आयोजन विज्ञान भवन दिल्ली में रखा गया है. करीब 100 से ज्यादा देशों के राष्ट्रध्यक्ष मौजूद हैं. पूरा मीडिया मौजूद है. इस बीच सामने स्टेज पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आती हैं. इंदिरा के सामने खड़ा एक है एक शख्स, जिसके हाथ में एक लकड़ी की हथौड़ी है. हथौड़ी इंदिरा को दी जानी है. जिसका मतलब होता, अध्यक्षी अब भारत को सौंप दी जाएगी. सैकड़ों लोगों के आगे वो शख्स और इंदिरा आमने-सामने आते हैं. इंदिरा हथौड़ी लेने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाती हैं. लेकिन दूसरी तरफ से हाथ आगे नहीं बढ़ता. इंदिरा एक और बार कोशिश करती हैं, लेकिन सामने खड़ा शख्स बस मुस्कुराता रहता है. हथौड़ी अभी भी उसी के हाथ में है. पशोपेश में आ चुकी इंदिरा इससे पहले कुछ समझ पाती, वो शख्स एक कदम आगे बढ़ता है और इंदिरा को गले लगा लेता है. अचानक तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा माहौल गूंज उठता है. जिस इंदिरा गांधी के सामने दुनिया के बड़े-बड़े नेता भी अदब से पेश आते थे, उन्हें गले लगाने वाला ये शख्स कोई आम नेता नहीं था. ये वो शख्स था, जिसे 638 बार मारने की कोशिश की गई थी. वो भी अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी अमेरिका द्वारा. इसके बावजूद इस शख्स ने 47 साल अपने देश पर राज किया. इस शख्स का नाम था, फिदेल कास्त्रो. कास्त्रो ने बाद में बताया था कि उनके लिए इंदिरा भारत की प्रधानमंत्री बाद में और नेहरू की बेटी पहले थीं. नेहरू, जिनके बारे में कास्त्रो का कहना था,

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“जब मुझे राजनीति की कोई समझ नहीं थी, नेहरू ने मेरा हौंसला बढ़ाया था. मैं उनका अहसान कभी नहीं भूल सकता”

आज 16 फरवरी के रोज़ कास्त्रो क्यूबा के प्रधानमंत्री बने थे. साल था 1959. अगले 47 साल तक इस पद पर बने रहे. आज बात करेंगे क्यूबा के इस करिश्माई नेता और भारत के रिश्ते की. देखिए वीडियो.

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