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तारीख़: नेताजी सुभाष चंद्र बोस के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पूरी कहानी?

इस मामले पर सुभाष बाबू का सरदार वल्लभ भाई पटेल से विवाद हो गया.

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साल 1924 की बात है. एक प्रोटेस्ट मार्च के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनके साथियों को गिरफ्तार कर बर्मा की मंडले जेल में भेज दिया गया. यहां रहते हुए नेताजी को टीबी हो गया. हालांकि घर वालों को खत में लिखते थे कि यहां मस्त होटल वाला माहौल है. मैनेजर को पपीता बहुत पसंद है, इसलिए उसने पपीता को सब्जियों की रानी घोषित कर दिया है. सब्जी, फल, अचार सब जगह पपीता प्रयोग में लाया जाता है. पालक-बैगन-पपीता और बैगन-पालक... यही मेन्यू है. मंडले जेल का एक और किस्सा सुभाष बाबू ने यूं लिखा कि यहां पहले बिल्लियों की फौज थी. एक दिन उन बिल्लियों को पकड़कर दूर छोड़ दिया गया. कुछ दिन बाद उनमें से तीन वापिस लौट आई. उनमें से एक, जिसका नाम टॉम कैट था उसने एक कबूतर को मार डाला. फिर जेल में सुनवाई हुई. टॉम कैट के खिलाफ मुकदमा चलाया गया, जिसमें उसे कड़ी सजा देने का फैसला हुआ. हालांकि आखिर में उसे माफी दे दी गई. यहां से बोस भारत लौटे तो कांग्रेस के महासचिव बनाए गए. उन्होंने कांग्रेस वॉलंटियर कॉर्प्स नामक वर्दीधारी स्वयंसेवकों का दल भी बनाया. खुद इसकी कमान संभाली. 1930 में कलकत्ता के मेयर का पदभार भी संभाला. सविनय अवज्ञा आंदोलन में फिर गिरफ्तार हो गए. हालांकि इस बार मामला कुछ अलग था. फ्रैक्चर होने से बिगड़ी तबीयत ने उनको ऑस्ट्रिया पहुंचा दिया. वहां मुलाक़ात हुई विट्ठल भाई पटेल से. विट्ठल भाई सरदार पटेल के बड़े भाई थे. विट्ठल भाई बीमार थे. बोस ने उनकी खूब सेवा की. विट्ठल भाई, सुभाष बाबू से प्रभावित हुए. और अपनी जायदाद का एक हिस्सा देशहित के कामकाज चलाने के लिए उनको लिख गए. इस मामले पर सुभाष बाबू का सरदार वल्लभ भाई पटेल से विवाद हो गया. सरदार ने सुभाष बाबू पर केस ठोक दिया. और सुभाष केस हार गए. देखिए वीडियो.

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