
हर्षवर्धन जाला, फोटो- ट्विटर
हर्षवर्धन ने जो ड्रोन बनाया है, उसमें मैकेनिकल शटर वाला 21 मेगापिक्सल का एक कैमरा लगा हुआ है. इसमें इन्फ्रारेड, आरजीबी सेंसर और थर्मल मीटर लगा है. ये ज़मीन से दो फीट ऊपर उड़ेगा और आठ स्क्वायर मीटर में रेडिएशन भेज सकेगा. ये ड्रोन लैंडमाइंस को डीएक्टिवेट करने के लिए 50 ग्राम का बम भी अपने साथ ढो सकता है. इस प्रोजेक्ट पर हर्षवर्धन ने 2016 में काम शुरू किया था.
कम उम्र में इस तरह का इनोवेशन करने वाले हर्षवर्धन अकेले नहीं हैं. टैलेंट भरा पड़ा है इंडिया में. कुछ और होनहारों के बारे में बताए देते हैं आपको.
तेनिथ आदित्य
तेनिथ आदित्य
16 साल के तेनिथ ने 14 साल की उम्र में एक एक्सटेंशन बोर्ड बनाया था. नए तरीके का. तेनिथ का दो बार वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए नाम जा चुका है. उन्हें दो नेशनल अवार्ड्स, 7 अवार्ड, 5 स्टेट अवॉर्ड और कई डिस्ट्रिक्ट अवॉर्ड भी मिले हैं. इसके अलावा नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन इंडिया की तरफ से दिया जाने वाला IGNITE अवॉर्ड भी उन्हें मिला है.

तेनिथ आदित्य का बनाया एक्सटेंशन बोर्ड
तेनिथ कहते हैं, ''मैं समस्याओं के साथ नहीं रहना चाहता.'' तेनिथ के नाम अब तक 17 छोटी-बड़ी खोजें हैं. तेनिथ को सिक्के इकट्ठे करने का शौक है, सॉफ्टवेयर डेवलपर हैं, वीडियो गेम खेलने और पढ़ाने का भी शौक है. 35 कंप्यूटर एप्लीकेशन और 6 भाषाओं पर उनकी कमांड है. तेनिथ लियोनार्डो दा विंसी को अपना आइडियल मानते हैं. तेनिथ कहते हैं कि लियोनार्डो को पढ़ने के बाद मैंने सोचा कि मैं ना सिर्फ साइंटिस्ट बनूंगा बल्कि नई खोजें भी करूंगा, जिससे लोगों की लाइफ बेहतर बन सके.
अर्श शाह दिलबागी

अर्श शाह दिलबागी
अर्श की उम्र 18 साल है. जिन लोगों को बोलने में दिक्कत है उनके लिए अर्श ने 'TALKing' डिवाइस बनाया है. ये डिवाइस दुनिया में अकेला ऐसा है जो बातचीत के लिए सांस का इस्तेमाल करता है. अर्श को रोबो के नाम से भी जाना जाता है. फिलहाल यूएस की प्रिन्सटन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रहे हैं. उनके TALKing डिवाइस को कैलिफ़ोर्निया में गूगल साइंस फेयर 2014 में वोटर्स चॉइस अवॉर्ड मिला था. इसके अलावा उन्हें इंटेल इंटरनेशनल साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर 2015 में भी चार अवॉर्ड मिले.

अर्श का बनाया TALKing डिवाइस.
अप्रैल 2015 में दिलबागी को इंडिया के STEM फाउंडेशन का ब्रांड अम्बेसडर बनाया गया. ये फाउंडेशन रोबोटिक्स से एजुकेशन को प्रमोट करता है और वर्ल्ड रोबोट ओलंपियाड जैसे कम्पटीशन करवाता है. अगस्त 2015 में दिलबागी ने एक घरेलू रोबोट डॉग बनाया जिसे वो CLUMSY कहते हैं. इसे प्रेसिडेंट हाउस के म्यूजियम में रखा गया है. इसकी प्रदर्शनी को 'A Day in the Life of a Robot Dog-CLUMSY' कहा जाता है. हर हफ्ते हजारों लोग इसे देखने आते हैं. प्रेसिडेंट प्रणब मुखर्जी ने ये म्यूजियम 5 अगस्त 2015 को शुरू किया था.
अंगद दरयानी
अंगद दरयानी
इस समय 18 साल के हैं. खुद को सिर्फ 'मेकर' कहते हैं. अंगद को मार्केट में मौजूद कटिंग एज टूल से डिवाइस डेवलप करना अच्छा लगता है. इस समय मेसाचुएट्स यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग और मैथ्स की पढ़ाई कर रहे हैं. अंगद MIT Media Lab, IIT और इनोवेटर्स क्लब ऑफ़ इंडिया के साथ काम कर चुके हैं. उनकी खोजों में मोबाइल इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम, वर्चुअल ब्रेल 3D प्रिंटर, सोलर पॉवर वाली बोट, ऑडियो सेंसिटिव LED डिस्प्ले शामिल हैं.
सुशांत पटनायक

प्रणब मुखर्जी के साथ सुशांत.
23 साल के सुशांत पटनायक के नाम 39 पेटेंट हैं. इसमें पहली एक व्हीलचेयर है जिसे एक विकलांग आदमी अपनी सांसों से चला सकता है. दूसरी, एक कारों के लिए एंटीथेफ़्ट मशीन जिसे मोबाइल से ऑपरेट किया जा सकता है. इसे घर के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. ये भी बाकियों की तरह हाईस्कूल से ही कई सारे अवॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं. भुवनेश्वर के हैं और इनके पिता एक डॉक्टर हैं. उन्हें MIT के इन्वेन्टर लिस्ट में रखा गया था. 20 साल की उम्र में उन्होंने सातवां नेशनल ग्रासरूट्स इनोवेशन अवॉर्ड जीता था.
रेम्या जोज

रेम्या जोज
केरल की रेम्या ने वाशिंग मशीन के साथ एक्सरसाइज मशीन जोड़ दी. इसके लिए इन्हें नेशनल अवार्ड मिला है. उन्होंने 14 साल की उम्र में इसे बनाया था.
इन सबके अलावा प्रणव मिस्त्री, अजित नारायण, अलेफिया मर्चेंट जैसे यंग इनोवेटर हैं जिन्हें बहुत कम उम्र में अपनी अलहदा सोच की वजह से पहचान मिली. इस तरह की नई जनरेशन हो तो कोई भी देश साइंस-टेक की फील्ड में अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है, बस इन सारे टैलेंट का सही से इस्तेमाल किया जाए. उन्हें पहचाना जाए ताकि वो गुमनामी में ना खो जाएं या 'ब्रेन ड्रेन' के शिकार ना हो पाएं.
ये स्टोरी निशांत ने की है.










