चार साल बीत गए हैं. समय इतना कष्टकारी हो गया है कि बर्दाश्त नहीं हो रहा है. हमारी कोई गलती भी नहीं है. हमने तैयारी की. लिखित परीक्षा दी. परीक्षा पास किया. इंटरव्यू दिया. इसी दौरान सरकार बदल गई और भर्ती रोक दी गई. जांच हुई. डेढ़ साल बाद फिर भर्ती शुरू हुई. दोबारा इंटरव्यू दिया. लेकिन अब तक फाइनल रिजल्ट नहीं आया. विभाग में पद खाली हैं. इसके बावजूद भर्ती को निरस्त करने की घोषणा कर दी गई.ये कहना है चार साल से सहायक कोषागार लेखाकार के पद पर भर्ती की बाट जोह रहे अनुराग शुक्ला का. अनुराग की ही तरह उत्तर प्रदेश के 15 हजार से ज्यादा युवा सहायक कोषागार लेखाकार भर्ती के पूरे होने की बाट जोह रहे हैं.
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी UPSSSC ने जुलाई 2016 में सहायक कोषागार लेखाकार के 540 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया. 11 सितंबर 2016 को इसकी लिखित परीक्षा संपन्न हुई. रिजल्ट आया 29 अक्टूबर 2016 को. इंटरव्यू के लिए 15,162 कैंडिडेट को पास घोषित किया गया. 23 फरवरी से 25 मई 2017 तक इन कैंडिडेट का इंटरव्यू शेड्यूल हुआ. इसी बीच उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव हुए. सरकार बदल गई. बीजेपी सत्ता में आई और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने. 30 मार्च 2017 को नई सरकार ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की सभी भर्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए विजिलेंस जांच बैठा दी.
करीब सवा साल बाद 24 जनवरी 2018 को उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का फिर से गठन किया गया. नए अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति हुई. इसके बाद अधर में लटकी भर्तियों की प्रक्रिया को फिर से शुरू किया गया. UPSSSC ने सहायक कोषागार लेखाकार का इंटरव्यू फिर से कराने का फैसला किया. 28 अगस्त 2018 से 10 दिसम्बर 2018 तक फिर से इंटरव्यू लिया गया. लेकिन रिजल्ट अब तक नहीं आया.
कुशीनगर के रहने वाले अनीष कहते हैं,
लगभग 60 प्रतिशत लोगों का इंटरव्यू हो चुका था. तभी सरकार बदल गई. सरकार बदलने के बाद UPSSSC की जितनी भर्तियां पिछली सरकार से चल रही थीं, उन्हें रोक दिया गया. रोक लगने के बाद अलग-अलग जांच एजेंसियों से जांच कराए. हम लोग की भर्ती भी रुकी हुई थी, जिसकी विजिलेंस ने जांच की. जांच के बाद दोबारा इंटरव्यू हुआ. लेकिन रिजल्ट नहीं आया. जब हमने पता किया, तो जानकारी मिली कि हाईकोर्ट ने रिजल्ट जारी करने पर रोक लगा रखी है.हाईकोर्ट ने क्यों लगाई रोक
सहायक कोषागार लेखाकार के 540 पदों की भर्ती प्रक्रिया का फाइनल रिजल्ट जारी करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रोक लगा रखी थी, क्योंकि विभाग के ही कुछ जूनियर असिस्टेंट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सहायक कोषागार लेखाकार के पद को प्रमोशन का पद बताया था.
अनुराग बताते हैं,
विभाग के कुछ क्लर्कों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दायर की. इनका कहना था कि सहायक कोषागार लेखाकार के पद पर जो वैकेंसी निकली है, वो प्रमोशन का पद है. हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि भर्ती प्रक्रिया को न रोका जाए, ये यथावत चलती रहे. बस फाइनल रिजल्ट न घोषित किया जाए. 8 फरवरी 2018 को दिए अपने आदेश में हाईकोर्ट ने सरकार को उचित निर्णय लेने के लिए कहा.

वित्त विभाग का लेटर जिसमें भर्ती को निरस्त करने की बात कही गई.
सरकार का निर्णय आया लगभग 17 महीनों के बाद. वित्त विभाग ने 25 जुलाई 2019 को एक लेटर में इस भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करने की बात कही. फिर दिसंबर 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक नियमावली पारित की. सहायक लेखाकार कोषागार संवर्ग 2019. इसमें ये कहा गया कि 96 प्रतिशत पद सीधी भर्ती यानी सामान्य चयन से भरे जाएंगे. चार प्रतिशत पद प्रमोशन से भरे जाएंगे. इस नियमावली के आधार पर चार प्रतिशत लोगों को प्रमोशन भी दे दिया गया. लेकिन जो पिछली भर्ती फंसी थी, उस पर कोई फैसला नहीं लिया गया.
मेरठ के रहने वाले राहुल कहते हैं,
जितने भी क्लर्क हाईकोर्ट गए थे, उनका प्रमोशन हो चुका है. उन्होंने जिस मुद्दे पर रिट फाइल की थी, वो तो पूरी हो चुकी है. अब जब कोई विवाद ही नहीं रहा, तो फिर भर्ती क्यों नहीं हो रही? मामला जब कोर्ट में है, तो बिना कोर्ट को जानकारी दिए आप अधियाचन कैसे वापस कैसे ले सकते हैं? लिखित परीक्षा, इंटरव्यू सबकुछ हो चुका था. इसके बाद आप कह रहे हैं भर्ती को निरस्त किया जाता है. विभाग ने 15,000 छात्रों को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है.

नियमावली, जिसमें 96 फीसद पद सीधी भर्ती के जरिए और 4 फीसद प्रमोशन से भरने की बात कही गई है.
सरकार ने हाईकोर्ट में दायर जिस याचिका का हवाला देते हुए भर्ती को निरस्त किया, उसका उद्देश्य पूरा हो चुका है. विभाग के क्लर्क प्रमोशन चाहते थे, वो उन्हें मिल चुका है. ऐसे में सरकार का पूरी भर्ती को निरस्त करना समझ से परे है. सहायक कोषागार लेखाकार को प्रमोशन का पद बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले राजकुमार बताते हैं,
जो सर्विस रूल 1978 है, उसके मुताबिक ये पोस्ट शत-प्रतिशत प्रमोशन की पोस्ट है. लेकिन सरकार ने सीधी भर्ती निकाल दी. हम लोग एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा करते हैं. इसलिए पहले हमें प्रमोट करना चाहिए था, फिर भर्ती निकालते या न निकालते, हमें उससे कोई मतलब नहीं. लेकिन बिना हमें प्रमोट किए इन लोगों ने डायरेक्ट भर्ती निकाल दी. तो हमने इस चीज को लेकर हाईकोर्ट में रिट फाइल की. फिलहाल हम लोगों का प्रमोशन हो गया है, तो हमारी तरफ से तो मामला खत्म हो गया है. अब सरकार अगर सीधी भर्ती करती है, तो ये अच्छी बात है, क्योंकि पोस्ट खाली है और वर्कलोड बहुत ज्यादा है.सरकार द्वारा भर्ती को निरस्त किए जाने के विरोध में सफल कैंडिडेट्स ने भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. अनुराग कहते हैं,
जब आप 39 लोगों का प्रमोशन कर सकते हैं, तो हमारी भर्ती का रिजल्ट क्यों नहीं निकाल सकते हैं. जिस विवाद के लिए वो लोग कोर्ट गए थे, जब वो विवाद ही खत्म हो गया, तो हमारा परिणाम भी जारी कर दिया जाए. 2015 में जो भर्ती हुई थी 297 पदों की, इसी उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने की थी. इसी के ठीक बाद 2016 में हमारा ऐडवर्टाइजमेंट आया था. 540 पदों के लिए. इसके पहले भी 2015, 2011,2005 और 1999 में शासनादेश के आधार पर भर्ती हो चुकी है.सहायक कोषागार लेखाकार के 540 पदों को भरने के लिए सफल अभ्यर्थी लगातार कैंपेन चला रहे हैं. लॉकडाउन में भी वे सोशल मीडिया के जरिए अपना विरोध जता रहे हैं. सरकार से रिजल्ट जारी करने की मांग कर रहे हैं. हमने इस मसले पर वित्त विभाग के सचिव संजीव मित्तल से बात की, तो उन्होंने इस पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा,
वो भर्ती तो छह-आठ महीने पहले ही कैंसिल हो गई थी. हमारे हिसाब से वो कैंसिल हो चुकी है. हम अब इसमें कुछ नहीं कर सकते.चार साल से नियुक्ति की बाट जोह रहे अभ्यर्थी परेशान हैं. सरकार से गुहार लगा रहे हैं. अपील कर रहे हैं कि आखिर सारी परीक्षाएं, इंटरव्यू हो जाने के बावजूद क्यों रिजल्ट नहीं जारी किया जा रहा है? दो-दो बार इंटरव्यू लेने के बाद क्यों भर्ती को निरस्त कर दिया गया? जब विभाग में पद खाली हैं, तो फिर भर्ती को पूरा क्यों नहीं किया जा रहा है? लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार इनमें से किसी सवाल का जवाब नहीं दे रही है.
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