एक लड़के और लड़की का अपनी मर्जी से साथ होना, सबसे ज्यादा खतरनाक होता है. उस वक़्त कुछ बड़ा नहीं हो रहा होता. दो देश एक-दूसरे पर बारूद नहीं बरसाते. एक लड़का और एक लड़की जब साथ होते हैं तब कोई धर्म खुद को बड़ा बताने की लड़ाई में नहीं होता. कोई जाति दूसरी जाति के आगे बड़ी नहीं बनती. एक लड़का और एक लड़की जब साथ होते हैं तो किसी पार्टी का वोट बैंक नहीं पकता. एक लड़का जब एक लड़की के साथ होता है, तो कहीं कुछ गलत नहीं होता. यही सबसे ज्यादा बुरा है. सब इसी से डरते हैं.एक पार्क में बैठना आपके लिए इतना खतरनाक क्यों हो जाता है? मैं रीवा में था. मुझे लगता था इश्क करने के लिए छोटे शहरों में गुंजाइश नहीं होती. इश्क ही क्यों, एक लड़के और एक लड़की के बैठ के बतियाने की गुंजाइश नहीं होती. आप कॉलेज में बात नहीं कर सकते. आप कॉफी हाउस जाओ, वहां का वेटर आपको अजीब नजर से देखता है. वो आपको देख आपस में खुसफुसाते हैं. दबी हंसी हंसते हैं. जैसे आपने कोई गुनाह किया हो. आप होटल जाने की सोच नहीं सकते.
मैं बारहवीं में पढ़ने वाली अपनी कजिन को इंजीनियरिंग का कोई एक्जाम दिलाने जबलपुर ले गया था. ये बताने और आईकार्ड दिखाने के बाद भी कोई होटल वाला कमरा देने को तैयार नहीं था. वो कहते थे, पुलिस आकर परेशान करती है. जब मैंने घर पर बात कराई तब जाकर एक महंगे होटल का पढ़ा-लिखा मैनेजर तैयार हुआ.मैंने देखा है. बच्चे मिलने के लिए इंटरनेट कैफ़े जाते. एक दौर ऐसा आया है कि जब कैफ़े वाले एमएमएस खूब आते थे. लड़का-लड़की क्या करते थे? किस करते थे. छूते थे. कैफ़े में एक चेंबर सरीखा होता. सारे शहर में उन्हें सुकून के दो पल वहीं मिलते लेकिन वहां भी कैमरा होता. छुपाकर रखा होता. होटल्स में कैमरे होते. लॉज में कैमरे होते. पंखे, टीवी के पीछे भी कैमरे होते. एक बंद कमरा भी एक लड़की के लिए सेफ नहीं होता. आप मसान फिल्म का उदाहरण ले लीजिए. चीजें फिल्मों से तय नहीं होती लेकिन आम जिंदगी में वैसा होता है. किसी होटल के कमरे में छापा मारने के पीछे करप्ट पुलिस वालों का मुख्य उद्देश्य पैसा कमाना होता है. डरा-धमकाकर. धमकी दी जाती है कि घर पर बताएंगे. मोरल पुलिसिंग हो रही होती. लड़की को खुद लगता है उसने कितनी बुरी हरकत कर दी. यहीं से वो कमजोर पड़ने लगती है. ये समझना भी मुश्किल हो जाता है कि उसने कुछ गलत नहीं कर दिया.
बड़े शहरों के कॉलेज में यूनिवर्सिटी के रूल होते हैं. लड़का-लड़की हाथ पकड़कर चल नहीं सकते. कॉलेज के हिसाब से ये मर्यादित नहीं है. मॉल्स में मिडिल क्लास, बच्चों के साथ शॉपिंग पर आता है. फैमिली के साथ घूमने आता है. कुछ भी करिए आप मिडिल क्लास आस्था को हाथ पकड़कर ठेस नहीं पहुंचा सकते. थिएटर के अंधेरे कोनों में नाईट विजन कैमरा आपको खोजता है.ऐसे में एक ही तरीका बचता किसी पार्क में चले जाओ. इसे समंदर का किनारा भी मान सकते हैं. हर शहर में ऐसे 'बदनाम पार्क' जरूर होते हैं. बदनाम सिर्फ इसलिए कि लड़के-लड़कियां वहां जाकर बैठते हैं. वहां सबसे ज्यादा चौकसी और सबसे ज्यादा असुरक्षा रहती है. पुलिस की दबिश सबसे ज्यादा वहीं पड़ती है. हर पन्द्रहवें दिन अखबार में एक खबर झपती है. 'रानीतालाब में मजनू पकड़ाए'. लड़के-लड़कियां रिरियाते. फोटोग्राफर उनकी तस्वीरें उतारते. लड़कियों का मुंह बांध दिया जाता. लड़के हाथ से मुंह छपाते. पुलिस डग्गा में बिठाकर ले जाती. दोनों के घरवालों को बुलाया जाता. तब उन्हें छोड़ा जाता. इन्हें इतनी सी बात क्यों समझ नहीं आती कि घरवालों को बताना ही होता. उन्हें समझा ही पाते तो घर पर ही न बैठे होते? पुलिस के अपने तर्क हैं. ऐसी जगहों पर लड़कियों से छेड़छाड़ होती है. इसलिए वो ऐसा करते हैं. तब पुलिस का काम उन्हें सुरक्षा देना होना चाहिए या बेइज्जत करना.
क़ानून की किस किताब में लिखा है कि एक लड़की अपने कन्सेंट से एक लड़के के साथ सिर्फ बैठी है, तो उन्हें पुलिस धर ले. पार्क में बैठे मजनू धराए जैसी हेडलाइन लगाने वाले हमारे अखबार भी मोरैलिटी के कितने मारे, और कितने जजमेंटल होते हैं. आप समझ सकते हैं.एक लड़की किसी लड़के के साथ अगर पब्लिक प्लेस में है. तो उसे 'खराब कैरेक्टर वाली' मान लिया जाता है. माना जाता है कि अगर वो पब्लिक में एक लड़के के साथ कंफर्टेबल है तो वो हर किसी के लिए 'उपलब्ध' है. कोई भी उससे 'रेट' पूछ सकता है. उसके साथ बदतमीजी कर सकता है. ऐसा क्यों होता है कि किसी लड़की को मुंह बांधकर पार्क में जाना पड़ता है. क्यों एक लड़के के साथ हो तो चार लोगों को साथ आते देख लड़की डर जाती है. उसके होने न होने, उसके किसी जगह पर किसी के साथ होने, और उसके कुछ भी करने को कैसे कोई और प्रभावित करने लगता है.
ऐसी तमाम जगहें गुंडा दलों के निशाने पर भी होतीं. चार उचक्के वैलेन्टाइन्स डे पर किसी भी पार्क में बैठे कपल को बेइज्जत कर सकते हैं. उनसे उठक-बैठक लगवा सकते हैं. उनकी शादी तक करा सकते हैं. सारी क़ानून उनके हाथ में होते हैं. आप कुछ नहीं कर सकते. न दबिश देने वाली पुलिस कुछ करती है. कैसा तो होता है न, सारी अथॉरिटी राह चलते लोगों के हाथ में आ जाती है. वो कितना भी बुरा करें. ज्यादातर लोग उन्हीं के पाले में खड़े होते हैं, क्योंकि सब मानते हैं वो कुछ गलत होने से रोक रहे हैं. दुनिया में सबसे बुरा एक लड़के और एक लड़की का साथ होना होता है.
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