अमेरिका पैसे, सेना और डिप्लोमैटिक दखल के मामले में दुनिया का सबसे प्रभावशाली देश है. और, वहां का राष्ट्रपति दुनिया का सबसे ताक़तवर शख़्स माना जाता है. लेकिन आज के दिन में वो ताक़त उसके किसी काम नहीं आ रही. उसका चेहरा लटका हुआ है. उसके चेहरे से बेबसी और लाचारी झलकती है. उसके पास कई सवालों के सटीक जवाब तक नहीं है. अगर भाषा में थोड़ी क्रूरता बरतें तो, वो किसी रट्टू तोते की तरह कुछ पंक्तियां दोहराए जा रहा है. इस लालच में कि उसके सिर पर डोल रही तलवार से पीछा छूट जाए.
जो बाइडन के ख़िलाफ़ किसने जांच बिठा दी, पूरी कहानी क्या है?
जो बाइडन के घर और निजी दफ़्तर में मिले सीक्रेट दस्तावेजों की पूरी कहानी क्या है?


ये सब किसके साथ और क्यों हो रहा है? ये हो रहा है, अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ. नवंबर में उनके थिंक-टैंक वाले दफ़्तर में और कुछ समय बाद उनके निजी घर से कुछ सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स बरामद हुए. ये तय कानून के ख़िलाफ़ था. 12 जनवरी 2022 को बरामदगी पूरी हो गई. इसके बाद ही ऑपरेशन को लेकर पूरी जानकारी पब्लिक डोमेन में आई. इस देरी को लेकर अमेरिकी मीडिया ने बाइडन और वाइट हाउस को जमकर लपेटा. केंद्र में विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी ने भी पूरे मामले पर बाइडन को घेरना शुरू किया है. रिपब्लिकन पार्टी में डोनाल्ड ट्रंप हैं. उनके ऊपर ऐसे ही एक आरोप में जांच चल रही है. ट्रंप के घर से 10 हज़ार से अधिक सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स मिले थे. कानूनन, कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें इन दस्तावेजों को यूएस नेशनल आर्काइव्स को लौटाना था. मगर उन्होंने प्रोटोकॉल को ठेंगा दिखा दिया था. जबसे बाइडन वाली ख़बर बाहर आई है, ट्रंप अपने ऊपर चल रही जांच को बंद करने के लिए कह रहे हैं. ऐसा होना तो बेहद मुश्किल है. हालांकि, अमेरिका के अटॉर्नी जनरल ने जो बाइडन के ख़िलाफ़ जांच ज़रूर शुरू करवा दी है. बाइडन ने कहा है कि वो इसमें पूरा सहयोग करेंगे.
तो आइए जानते हैं,
- जो बाइडन के घर और निजी दफ़्तर में मिले सीक्रेट दस्तावेजों की पूरी कहानी क्या है?
- सीक्रेट दस्तावेजों की बरामदगी के बाद डोनाल्ड ट्रंप क्यों हमलावर हुए जा रहे हैं?
- और, इस घटना का बाइडन और अमेरिका की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
आज कहानी अमेरिका में मचे राजनैतिक हंगामे की. अमेरिका के इतिहास में शायद ये पहली बार हो रहा होगा कि, एक साथ दो-दो राष्ट्रपतियों के ख़िलाफ़ स्पेशल जांच बिठाई गई हो. मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन और उनसे पहले राष्ट्रपति रहे डोनाल्ड ट्रंप, दोनों पर सीक्रेट फ़ाइल्स को चुराने का आरोप लगा है. और, उनके ख़िलाफ़ कानूनी जांच शुरू भी हो चुकी है.
पहले डोनाल्ड ट्रंप वाला केस समझ लेते हैं.ट्रंप 21 जनवरी 2017 को अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति बने. उनका कार्यकाल 20 जनवरी 2021 को खत्म हुआ. वो राष्ट्रपति चुनाव पहले ही हार चुके थे. उन्हें दूसरा कार्यकाल नहीं मिलने वाला था. इसलिए, उन्होंने वाइट हाउस से अपना निजी सामान शिफ़्ट करना पहले ही शुरू कर दिया था. वाइट हाउस, अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक दफ़्तर और घर है. इसी इमारत के पश्चिमी हिस्से में ओवल ऑफ़िस है. ओवल ऑफ़िस में ही राष्ट्रपति बैठते हैं. ट्रंप के बारे में ये बात चर्चित थी कि, वो ऑफ़िशियल दस्तावेज लेकर पूरे वाइट हाउस में घूमते हैं. वो उन दस्तावेजों को अक्सर अपने बेडरूम में भी ले जाया करते थे. कहा जाता है कि शिफ़्टिंग के दौरान वे सारे डॉक्यूमेंट्स ट्रंप के फ़्लोरिडा वाले घर तक पहुंच गए. इनमें से कई सीक्रेट और कॉन्फ़िडेंशियल फ़ाइल्स थीं. अमेरिका के प्रेसिडेंशियल रेकॉर्ड्स ऐक्ट (PRA) के तहत, ट्रंप को उन फ़ाइलों को नेशनल आर्काइव्स एंड रेकॉर्ड्स एडमिनिस्ट्रेशन (NARA) के पास जमा कराना था. NARA एक स्वतंत्र फ़ेडरल एजेंसी है, जो सभी सरकारी और ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट्स का संरक्षण करती है.

आपने NARA समझा. अब प्रेसिडेंशियल रेकॉर्ड्स ऐक्ट (PRA) के बारे में जान लीजिए. ये क्या है?
अमेरिका में 1978 से पहले तक राष्ट्रपति से जुड़े डॉक्यूमेंट्स उनकी निजी संपत्ति होते थे. ये राष्ट्रपति की मर्ज़ी पर निर्भर था कि वे डॉक्यूमेंट्स के साथ क्या करना चाहते हैं? वे उन्हें अपने साथ ले जा सकते थे. या, मन हो तो नेशनल आर्काइव्स में जमा भी कर सकते थे.
फिर 1972 में वॉटरगेट स्कैंडल का चैप्टर शुरू हुआ. वॉशिंगटन पुलिस ने डेमोक्रेटिक नेशनल कमिटी (DNC) के हेडक़्वार्टर में घुसपैठ करते पांच लोगों को गिरफ़्तार किया. इनमें से चार सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) के एजेंट के तौर पर काम कर चुके थे. पांचवां व्यक्ति तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के पूर्व वकील की कमिटी का सिक्योरिटी चीफ़ था. निक्सन प्रशासन ने इस स्कैंडल से पल्ला झाड़ने की पूरी कोशिश की. लेकिन वे नाकाम रहे. निक्सन के ऊपर महाभियोग का ख़तरा मंडराने लगा. आख़िरकार, अगस्त 1974 में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. रिचर्ड निक्सन अमेरिका के अब तक के इतिहास में इस्तीफा देने वाले इकलौते राष्ट्रपति हैं.
निक्सन के इस्तीफे के बाद जेराल्ड फ़ोर्ड राष्ट्रपति बने. उन्होंने निक्सन को क्षमादान दे दिया. इसके बाद अमेरिका में ये बहस चली कि, अगर वॉटरगेट की जांच से जुड़ी फ़ाइल्स निक्सन के हाथ लग गईं तो, वे उनको बर्बाद कर सकते हैं या रेकॉर्ड से मिटा सकते हैं. अमेरिका की संसद ‘कांग्रेस’ उन्हें ऐसा करने से रोकना चाहती थी. इसलिए, उन्होंने एक नया कानून बनाने का फ़ैसला किया. 1978 में कांग्रेस ने प्रेसिडेंशियल रेकॉर्ड्स ऐक्ट को मंज़ूरी दे दी. PRA में नए प्रावधान लाए गए. इसमें सबसे अहम ये था कि, प्रेसिडेंशियल रेकॉर्ड्स किसी राष्ट्रपति का कार्यकाल खत्म होने के बाद उसकी निजी संपत्ति नहीं रहेंगे. उन रेकॉर्ड्स को पब्लिक प्रॉपर्टी माना जाएगा. और, वाइट हाउस छोड़ने से पहले उन्हें नेशनल आर्काइव्स के पास जमा कराना होगा.
आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि, प्रेसिडेंशियल रेकॉर्ड्स क्या होते हैं?
PRA के मुताबिक, इसमें वे चीजें शामिल हैं, जिन्हें राष्ट्रपति या उनके स्टाफ़्स ने ड्यूटी पर रहते हुए कहीं से रिसीव किया हो या ख़ुद से तैयार किया हो. इसमें विदेशी नेताओं के साथ मुलाक़ात के मिनट्स हो सकते हैं. इसमें राष्ट्रपति का कोई आधिकारिक आदेश हो सकता है. किसी दूसरे देश के साथ संबंध को लेकर बना प्लान हो सकता है. इसकी कोई लिमिट नहीं है.
प्रेसिडेंशियल रेकॉर्ड्स में क्या चीजें शामिल नहीं हैं?राष्ट्रपति के निजी डॉक्यूमेंट्स को प्रेसिडेंशियल रेकॉर्ड्स का हिस्सा नहीं माना जाता. मसलन, पर्सनल डायरी, पोलिटिकल कैंपेन से जुड़ी फ़ाइल्स, खुफिया एजेंसियों से मिलने वाली फ़ाइल्स. खुफिया फ़ाइल्स PRA का हिस्सा नहीं हैं. उन्हें फ़ेडरल रेकॉर्ड्स ऐक्ट के तहत रखा जाता है. इस तरह के डॉक्यूमेंट्स को 1978 से पहले भी कुर्सी छोड़ रहे राष्ट्रपति अपने साथ नहीं ले जा सकते थे.
ट्रंप ने PRA का उल्लंघन किया था. उन्हें जनवरी 2021 में सारे प्रेसिडेंशियल रेकॉर्ड्स NARA के पास जमा कराने थे. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. इसकी बजाय वे उन्हें अपने फ़्लोरिडा वाले घर ले गए. कुछ समय बाद NARA ने अपने रेकॉर्ड्स का मिलान किया. उन्हें पता चला कि ट्रंप ने सैकड़ों फ़ाइल्स नहीं लौटाई हैं. उन्होंने ट्रंप से उन्हें लौटाने के लिए कहा. तब ट्रंप की टीम ने 15 बक्से वापस किए. इनमें से कई क्लासीफ़ाइड फ़ाइल्स भी थीं. हालांकि, NARA इतने से ही संतुष्ट नहीं थी. उन्होंने यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट से मदद मांगी. जस्टिस डिपार्टमेंट ने समन भेजा. फिर उन्हें और दस्तावेज मिले. ये भी नाकाफ़ी थे. आख़िरकार, अगस्त 2022 में फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने ट्रंप के फ़्लोरिडा वाले घर पर छापा मारा. उस समय ट्रंप अपने घर पर नहीं थे. इस छापेमारी में 11 हज़ार से अधिक डॉक्यूमेंट्स और तस्वीरें जब्त की गईं. मीडिया रपटों के मुताबिक, ट्रंप के पास से तीन सौ से अधिक क्लासीफ़ाईड डॉक्यूमेंट्स मिले थे. जिन्हें किसी सरकारी दफ़्तर के अंदर ही एक्सेस किया जाना था. कुछ दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ के सबूत भी मिले थे. इन सबके अलावा, इस बात की पूरी आशंका है कि ट्रंप ने कई डॉक्यूमेंट्स हमेशा के लिए गायब कर दिए. इस मामले की जांच अभी भी चल रही है.
अब जो बाइडन वाला मामला समझते हैं.वाइट हाउस की इमारत के पास पेन-बाइडन सेंटर नाम के एक थिंक-टैंक का दफ़्तर है. जो बाइडन जनवरी 2009 से जनवरी 2017 तक अमेरिका के उप-राष्ट्रपति रहे. 2018 में पेन-बाइडन सेंटर बना. तब से लेकर चुनाव जीतने तक ये सेंटर जो बाइडन का दफ़्तर बना रहा. इस अवधि में वो सरकार में किसी भूमिका में नहीं थे.
जनवरी 2021 में बाइडन वाइट हाउस में रहने चले गए. 02 नवंबर 2022 को पेन-बाइडन सेंटर में कुछ बक्से मिले. इनमें लगभग 10 सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स थे. बाइडन की टीम का दावा है कि, इसका पता लगते ही उन्होंने तुरंत जस्टिस डिपार्टमेंट से संपर्क किया. और, उन्हें स्थिति से रूबरू करा दिया. FBI ने इसका आकलन शुरू किया.
20 दिसंबर को वाइट हाउस ने जस्टिस डिपार्टमेंट को बताया कि, बाइडन के घर पर कुछ और सीक्रेट दस्तावेज मिले हैं. उन्हें भी बरामद कर लिया गया. 11 जनवरी की शाम बाइडन के डेलावेयर वाले घर में भी पड़ताल चली. इसके बाद ये जानकारी पब्लिक डोमेन में आई. सबसे पहले CBS न्यूज़ ने इसकी रिपोर्ट छापी. उसके बाद बाकी मीडिया संस्थानों ने वाइट हाउस को लपेटना शुरू किया. उन्होंने राष्ट्रपति पर जानकारी छिपाने के आरोप लगाए. इस मामले पर बाइडन ने कहा कि उन्हें इन दस्तावेजों के बारे में पहले से पता नहीं था. वो जांच में पूरा सहयोग करेंगे.

अमेरिका के अटॉर्नी जनरल मेरिक गारलेन्ड ने बाइडन वाले दस्तावेजों की जांच के लिए रॉबर्ट हूर को स्पेशल काउंसिल नियुक्त कर दिया है. रॉबर्ट हूर कोरियाई मूल के अमेरिकी नागरिक हैं. उन्हें ट्रंप सरकार ने 2017 में मेरिलेण्ड का अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया था. 2021 के बाद से वो प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे थे. उन्होंने अपने बयान में कहा है कि वो निष्पक्ष जांच करेंगे. स्पेशल काउंसिल विशेष परिस्थिति में ही नियुक्त किए जाते हैं. वो भी तब जब हितों के टकराव की स्थिति पैदा हो रही है. जस्टिस डिपार्टमेंट में अधिकतर लोग बाइडन सरकार द्वारा नियुक्त किए गए हैं. इसी वजह से एक स्वतंत्र अटॉर्नी को जांच की कमान सौंपी गई है.
स्पेशल काउंसिल को ये पता करना है कि, बाइडन के घर और निजी दफ़्तर में सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स कैसे पहुंचे? क्या उन डॉक्यूमेंट्स का कोई ग़लत इस्तेमाल हुआ? और, इस पूरे ऐपिसोड में बाइडन की क्या भूमिका थी?
एक तरफ तो जांच चलेगी, मगर दूसरी तरफ विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी ने बाइडन की नींद उड़ा रखी है. हालिया मिड-टर्म इलेक्शन के बाद से रिपब्लिकन निचले सदन में बहुमत में हैं. इस नाते वे राष्ट्रपति और उनकी कैबिनेट के ख़िलाफ़ जांच शुरू करवा सकते हैं और उन्हें पूछताछ के लिए भी बुला सकते हैं. हाउस ऑफ़ रेप्रजेंटेटिव्स के स्पीकर केविन मैक्कार्थी ने क्या कहा? जानकारों का कहना है कि, भले ही इस मामले में बाइडन सहयोग देने की बात कर रहे हैं, फिर भी उन्हें अगले दो बरस तक सहमकर काम करना होगा. विपक्ष उनके ऊपर ज़्यादा हमलावर होगा. इसका असर 2024 के राष्ट्रपति चुनाव पर भी पड़ सकता है.
वीडियो: दुनियादारी: बोको हराम वाले नाइजीरिया में नौजवान लोग अपहरण के धंधे में क्यों शामिल हो रहे हैं?


















