कौन हैं पद्म बंदोपाध्याय?
डॉ. पद्म बंदोपाध्याय का जन्म 4 नवंबर 1944 के दिन आंध्र प्रदेश के तिरुपति में हुआ था. वे महज चार-पांच साल की थीं जब उनकी मां टीबी की बीमारी से पीड़ित हो गईं. तभी से मां की देखभाल करने की जिम्मेदारी पद्म बंदोपाध्याय ने संभाल ली थी. मां की बीमारी के समय से ही पद्म के मन में डॉक्टर बनने की प्रेरणा जागने लगी. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में प्री-मेडिकल की पढ़ाई की. 1963 में पद्म बंदोपाध्याय ने आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज, पुणे में दाखिला लिया.इसके पांच साल बाद 1968 में पद्म बंदोपाध्याय भारतीय वायु सेना में शामिल हुईं. 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान अच्छे आचरण के लिए उन्हें विशिष्ट सेवा पदक (वीएसएम) से सम्मानित किया गया. साल 2002 में वह एयर वाइस मार्शल (टू-स्टार रैंक) पर पदोन्नत होने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं. वह एयर कॉमडोर (नेवी की एक रैंक) पद पर भी प्रमोट होने वाली पहली महिला अधिकारी हैं.

पुरस्कार समारोह के दौरान पद्म बंदोपाध्याय से मिलते पीएम नरेंद्र मोदी. (तस्वीर- पीटीआई)
डॉक्टर पद्म बंदोपाध्याय उत्तरी ध्रुव पर वैज्ञानिक शोध करने वाली पहली भारतीय महिला भी हैं. इस सबके अलावा उनकी एक और उपलब्धि है. वह रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज कोर्स पूरा करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं. साथ ही एक विमानन चिकित्सा विशेषज्ञ और न्यूयॉर्क विज्ञान अकादमी की सदस्य भी हैं.
'सेना रोमांच ढूंढ रही महिलाओं के लिए नहीं'
डॉ. पद्म बंदोपाध्याय का मानना है कि सेना की वर्दी उन युवतियों के लिए नहीं है जो महज रोमांच के लिए इस सेवा में आना चाहती हैं. 2006 में नवभारत टाइम्स में छपे एक पीस में वह कहती हैं,सेना की वर्दी उन युवतियों के लिए नहीं है जो महज रोमांच के लिए इस सेवा में आना चाहती हैं. अगर कोई लड़की मानसिक रूप से तैयार नहीं होगी तो यह सेवा उसके लिए एवरेस्ट को फतेह करने से कहीं ज्यादा मुश्किल साबित हो सकती है. सेना में कई मुश्किल हालात का सामना करना पड़ सकता है. इनसे उन्हें एक आम सैनिक की तरह निपटना होता है और महिला होने के नाते वे इससे बच नहीं सकतीं...डॉ. बंदोपाध्याय का ये भी कहना था कि इस सर्विस में आने वाली कठिनाइयों को चैलेंज के रूप में भी लिया जा सकता है और सजा के तौर पर भी.
(ये स्टोरी हमारे यहां इंटर्नशिप कर रहीं आरुषि ने लिखी है.)














