'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट
मुताबिक़, जम्मू कश्मीर पुलिस ने 20 अप्रैल को जारी बयान में कहा-
कश्मीर जोन के साइबर पुलिस स्टेशन में यूएपीए की धारा 13 और आईपीसी की धारा 505 के तहत मसरत जहरा के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है. साइबर पुलिस स्टेशन को भरोसेमंद सोर्स से जानकारी मिली कि एक फेसबुक यूजर 'मसर्त जहरा' युवाओं को प्रेरित करने और सार्वजनिक शांति के खिलाफ अपराधों को बढ़ावा देने के लिए आपराधिक इरादे के साथ सोशल मीडिया पर एंटी-नेशनल पोस्ट्स कर रही है. माना जाता है कि मसरत के ये फोटोज़ कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के लिए जनता को उत्तेजित कर सकते हैं. यूजर एंटी-नेशनल गतिविधियों के गुणगान करने वाले पोस्ट करती हैं.इससे पहले श्रीनगर के आसिफ सुल्तान पर इसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था. उन पर आरोप है कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन को लॉजिस्टिकल मदद पहुंचा रहे थे. आसिफ अभी भी डिटेंशन में हैं.
मसरत का क्या कहना है?
मसरत 26 साल की फोटो जर्नलिस्ट हैं. कई न्यूज़ ऑर्गनाइजेशन के साथ काम कर चुकी हैं. मसरत की फोटो वाशिंगटन पोस्ट, अल जज़ीरा, कारवां, दी सन, टीआरटी आदि में छपती रही है. मामले को लेकर इंडियन एक्सप्रेस
से बात करते हए मसरत ने कहा-
मैंने अपने काम के अधिकतर लिंक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किए हैं. मैं इन आरोपों को देखकर हैरान हूं. मैं एक प्रोफेशनल फोटो जर्नलिस्ट हूं. मेरा कोई पॉलिटिकल या सोशल एजेंडा नहीं है. यह कश्मीर के पत्रकारों को दबाने की कोशिश है.

मसरत जहरा (फोटो: Facebook | Masrat Zahra)
मसरत ने बताया-
18 अप्रैल की शाम पुलिस ने मुझे साइबर पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने को कहा. मैंने तुरंत पहुंचने को लेकर अपनी दिक्कतें बताई. इसके बाद मैंने कश्मीर प्रेस को मामले की जानकारी दी. फिर मुझे पता चला कि मामले को सुलझा लिया गया है और मुझे जाने की जरूरत नहीं है. दोस्तों के जरिए मुझे 20 अप्रैल को पता चला कि मुझ पर UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया है.21 अप्रैल की शाम मसरत ने ट्वीट करके जानकारी दी कि मामले को लेकर मैं संबंधित पुलिस अधिकारियों से मिली. जांच के दौरान उनके सवालों के जवाब दिए. मुझे अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है. जांच अभी जारी है.
साइबर सेल के एसपी ताहिर अशरफ भट्ट ने इंडियन एक्सप्रेस
से बातचीत करते हुए बताया-
मसरत जहरा के खिलाफ सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ फैलाने और आतंकवाद और आतंकवादियों के महिमामंडन करने के लिए मामला दर्ज किया गया है.पुलिस सूत्रों ने बताया कि मसरत जहरा के सोशल मीडिया पोस्ट सिक्योरिटी फोर्स को नीचा दिखाते हैं.
कश्मीर प्रेस क्लब ने स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा-
जम्मू-कश्मीर सरकार, खासकर पुलिस को यह समझने की जरूरत है कि पत्रकारिता और साइबर क्राइम के बीच एक बड़ा अंतर है. सरकार के पास किसी भी पत्रकार के स्टोरी को खंडन और उस पर रेस्पॉन्ड करने का हर अधिकार है, लेकिन पत्रकारों या उनके काम के खिलाफ मामले गैरकानूनी और गलत हैं.पीडीपी और पीपल्स कॉन्फ्रेंस जैसी पार्टियों ने इस मामले को लेकर कहा है कि यह कश्मीर में मीडिया को चुप कराने की कोशिश है. अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला है.
आसान भाषा में समझते जाइए कि UAPA क्या है?
1967 में बना ये कानून कई सारे संशोधनों के बाद अब भी लागू है. इसके तहत जब भी देश की संप्रुभता और अखंडता पर ख़तरा मंडराने लगे, तो सरकार नागरिकों पर कुछ पाबंदियां लगा सकती है. कुछ गतिविधियों पर रोक लगा सकती है या उन्हें मॉनिटर कर सकती है. गतिविधियां जैसे,
# एक जगह इकट्ठे होना या शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन.विपक्ष के भारी हंगामे के बावजूद UAPA संशोधन बिल 2019 में दोनों सदनों में पास हुआ था. 9 अगस्त को राष्ट्रपति के साइन के बाद बिल में जो भी संशोधन थे, वो UAPA में शामिल हो गए. इस कानून की दो सबसे बड़ी बातें हैं- NIA (नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी) के पास किसी भी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने और प्रॉपर्टी सीज़ करने का अधिकार. कोई व्यक्ति अगर किसी आतंकी घटना में शामिल पाया जाता है, या आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले संगठन से जुड़ा है, तो उसे आतंकी घोषित किया जा सकता है. वहीं, अब किसी आतंकी या आतंकी संगठन की संपत्ति सीज करने करने के लिए NIA के डीजी की अनुमति काफी होगी. वहीं, अब NIA के इंस्पेक्टर रैंक के अफसर भी आतंकी मामलों की जांच कर सकेंगे.
# किसी भी संस्था या यूनियन का गठन.
# अभिव्यक्ति की आज़ादी.
विडियो- UAPA संशोधन बिल 2019: NIA मजबूत हुई या मोदी सरकार का जोर बढ़ा?










