The Lallantop

अकाली दल की बीबी जागीर कौर जिन्हें बेटी की मौत के बाद सजा हुई

सुप्रीम कोर्ट ने बोल दिया है कि 2017 का चुनाव नहीं लड़ सकती.

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop

दिन 20 अप्रैल का. साल 2000. पंजाब में 19 साल की एक लड़की की मौत हो गई थी. संदेहास्पद हालात में. आरोप लगा कि उसकी मौत के पीछे उसी की मां का हाथ था. कि अपनी ही बेटी को उसने मार डाला. सबसे बड़ी बात, उसकी मां का नाम पंजाब की राजनीति और धर्म के लिए नया नहीं था. कौन है उसकी मां? वो हैं बीबी जागीर कौर.

पंजाब चुनाव के 'बादल' छा चुके हैं. गिनती के दिन बाकी हैं. 18 जनवरी को नामांकन की लास्ट डेट है.
कैप्टन, जनरल से लेकर 'पैदायशी कांग्रेसी' पूर्व क्रिकेटर, सब जूझने की तैयारी में हैं. बीजेपी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी सब पार्टियां सजी हुई हैं. पंजाब में सबसे बड़ी पार्टी है चीफ मिनिस्टर प्रकाश सिंह बादल की शिरोमणि अकाली दल. लेकिन मंगलवार को अकाली दल को एक शॉक लगा. सुप्रीम कोर्ट की तरफ से.
इसी अकाली दल की नेता हैं बीबी जागीर कौर. कपूरथला की भुलथ सीट से विधायक. जागीर कौर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की पहली महिला अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. उन पर 'ऑनर किलिंग' के चलते अपनी बेटी की हत्या करवाने का आरोप लगा था.
2012 में पटियाला की एक स्पेशल CBI कोर्ट ने उन्हें बेटी की मौत के मामले में पांच साल की जेल और 5,000 रूपए जुर्माने की सजा दी थी.
अब कौर 2017 का चुनाव नहीं लड़ सकतीं. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उनकी सजा पर रोक लगाने की अर्जी खारिज कर दी है.
जागीर कौर पहले पंजाब/हरियाणा हाई कोर्ट गई थीं. कहा था कि उन्हें चुनाव लड़ने दिया जाए और सजा पर रोक लगा दी जाए. सोमवार को हाई कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी. इसके बाद कौर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं कि सजा रोक दो. चुनाव लड़ लेने दो. सुप्रीम कोर्ट भी नहीं मानी.
कौर के वकील श्याम दीवान की दलील थी कि जागीर कौर पर आपराधिक साजिश का आरोप साबित हुआ था लेकिन सीधे मर्डर में उनका हाथ नहीं था. इसके पर्याप्त सबूत नहीं थे. उन्हें चुनाव लड़ने दिया जाए.
चुनाव लड़ने के लिए जागीर ने हाई कोर्ट के सामने सुच्चा सिंह लंगाह का हवाला दिया था. लंगाह को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से करप्शन के मामले में राहत मिली है. अब वो चुनाव लड़ सकते हैं. सुच्चा सिंह लंगाह को मोहाली की एक अदालत ने करप्शन के मामले में तीन साल की सजा सुनाई थी.

बीबी जागीर कौर की कहानी.

एक समय में बीबी जागीर कौर मैथ्स की टीचर थीं. इसके बाद उनका करियर बहुत तेजी से आगे बढ़ा.
बीबी जागीर कौर बीबी जागीर कौर, फोटो-You Tube

1982 में पति की ब्रेन कैंसर से मौत के बाद उन्होंने पढ़ाना जारी रखा.
बीबी जागीर की पब्लिक लाइफ 1987 में शुरू हुई थी. कपूरथला के बेगोवाल गांव में संत प्रेम सिंह डेरा में उन्हें 'मुख सेवादार' बनाया गया.
बीबी जागीर कौर  ने 1995 में अकाली दल जॉइन किया. पार्टी की वर्किंग कमेटी की सदस्य बनीं. 1997 में कपूरथला की भुलथ विधानसभा सीट से विधायक चुनी गईं. तब उन्होंने कांग्रेस के सुखपाल सिंह को 28,000 वोटों से हराया था. तब से उन्हें प्रकाश सिंह बादल का तगड़ा सपोर्ट हासिल है.
प्रकाश सिंह बादल की कैबिनेट में टूरिज्म और कल्चरल अफेयर्स मिनिस्टर रहीं. इसके अलावा उन्हें सोशल वेलफेयर, वीमेन डेवलपमेंट और चिल्ड्रेन वेलफेयर की जिम्मेदारी भी सौंपी गईं. जागीर कौर भुलथ से तीन बार विधायक रही हैं. 1997, 2002 और 2012 में.
विधायक चुने जाने के दो साल बाद ही शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की पहली महिला प्रेसिडेंट बनीं. मार्च 1999 से नवम्बर 2000 तक इस पद पर रहीं.

प्रकाश सिंह बादल के साथ बीबी जागीर कौर, फोटो क्रेडिट- tribuneindia
प्रकाश सिंह बादल के साथ बीबी जागीर कौर.फोटो क्रेडिट- tribuneindia
सितम्बर 2004 में फिर से इस पद के लिए चुनी गईं. सीनियर अकाली नेता सुखदेव सिंह भौर और SGPC के सदस्य हर्षविंदर सिंह ने उनका नाम आगे बढ़ाया. ये पद गुरचरण सिंह तोहरा की मौत के बाद खाली थी. तोहरा इस पद पर 26 सालों तक रहे थे.
माना जाता है तोहरा की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रकाश सिंह बादल ने ही बीबी जागीर को चुना था.
SGPC पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ में गुरुद्वारों और सिख श्राइन और स्कूलों के काम को देखती है. इसे 'सिखों की संसद' भी कहा जाता है. ये समिति अमृतसर के हरमंदिर साहब (गोल्डन टेम्पल) को भी देखती है.
दिल्ली के गुरुद्वारों को दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमिटी संभालती है. इन समितियों के लोगों को हरमिंदर साहब में होने वाले सम्मलेन में चुना जाता है. SGPC गुरुद्वारों की सिक्योरिटी, पैसे की जरूरत और सुविधाओं की देखरेख करती है.

SGPC अध्यक्ष थीं तब लगे करप्शन के आरोप

2005 में  सिख गुरुद्वारा न्यायिक आयोग ने जागीर कौर पर SGPC को 2.5 करोड़ रूपए का नुकसान करवाने का आरोप लगाया. इसके लिए उन्हें SGPC के अध्यक्ष पद के साथ प्राथमिक सदस्यता से भी हटा दिया गया था.
कहा गया कि उन्होंने अकाली कार्यकर्ताओं के बच्चों को श्री गुरुदास मेडिकल कॉलेज में NRI कोटे से एडमिशन दिलवा दिया. इससे लगभग 2.5 करोड़ का नुकसान हुआ.
इसके साथ ही ये भी कहा गया था कि उन्हें किसी भी सिख धार्मिक स्थल में पद लेने की मनाही होगी. जागीर कौर ने इस फैसले पर कहा था कि वो अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगी क्योंकि उनका चुनाव समिति के सदस्यों ने किया है. कहा इसके खिलाफ वो कोर्ट जाएंगी.

बेटी की हत्या करवाने का आरोप

20 अप्रैल 2000 को जागीर की बेटी हरप्रीत कौर की मौत हो गई थी. हरप्रीत 19 साल की थी. हरप्रीत ने शिवालिक पब्लिक स्कूल से बारहवीं से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की थी. हरप्रीत की मम्मी जागीर कौर पर आरोप लगा कि उन्होंने ऑनर किलिंग के चलते अपनी बेटी की हत्या की थी. हरप्रीत ने जागीर की इच्छा के उलट जाते हुए 'छोटी जाति' के कमलजीत सिंह से शादी की थी.
हरप्रीत और कमलजीत सिंह
हरप्रीत और कमलजीत सिंह

जागीर कौर ने दावा किया था कि हरप्रीत की मौत फ़ूड पॉइजनिंग से हुई है. उसे उल्टियां हो रही थीं.
27 अप्रैल 2000 को हरप्रीत का हसबैंड कमलजीत सिंह पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचा और कहा कि कौर ने ही अपनी बेटी का मर्डर किया है. वो प्रेगंनेंट थी और जागीर कौर को हमारा रिलेशनशिप पसंद नहीं था. कमलजीत सिंह ने शादी की फोटो और वीडियो भी कोर्ट को दिखाए थे. लेकिन बाद में कमलजीत सिंह अपने स्टैंड से पलट गया था. बाद में उसने कहा कि जो शादी का वीडियो दिखाया गया उसे जागीर कौर पर प्रेशर बनाने के लिए तैयार किया गया था. असल में हमारी शादी नहीं हुई थी.

जागीर कौर ने बेटी की मौत पर ये कहानी कही

20-21 अप्रैल 2000 की रात हरप्रीत को फगवाड़ा से लुधियाना के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल लाया जा रहा था. रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. मौत की वजह बहुत क्लियर नहीं थी.
जागीर कौर, उनके भाई निर्मल सिंह और SGPC के सेक्रेटरी डॉक्टर गुरबचन सिंह बचन ने कहा था कि पिछले कई दिनों से उसका फगवाड़ा में बुखार और उल्टी का इलाज चल रह था. लेकिन किसी ने भी हॉस्पिटल या डॉक्टर का नाम नहीं बताया. उन्होंने कहा कि जागीर कौर की बेटियां फगवाड़ा छुट्टियां मनाने आई थीं लेकिन कौर ने ये नहीं बताया था कि वो कहां रुकी थीं.
बाद में पता चला कि दोनों लड़कियां अकाली दल के ही एक नेता परमजीत सिंह रायपुर के घर पर रुकी थीं. जागीर ने कहा था कि लुधियाना ले जाते समय रात के 2.50 बजे उसकी मौत हो गई. जागीर कौर ये भी नहीं बता पाईं थीं कि उसकी मौत रास्ते में कहां हुई? उन्होंने कहा कि ''मेरी बेटी डेज़ी ने मुझसे हरप्रीत की तबियत खराब होने के बारे में बताया. उसे उल्टियां हो रही थीं. मैंने डेज़ी और सिक्योरिटी मैन निशान सिंह को लुधियाना जाने को कहा लेकिन रास्ते में हरप्रीत की मौत हो गई.''
जागीर कौर ने ये भी जोड़ा था, ''पिछली रात को हरप्रीत ने 11 बजे फ़ोन पर बात की थी. उसने बताया था कि उसे उल्टियां और लूज़ मोशन हो रहे हैं लेकिन मैं कभी देख नहीं पाई कि वो कितनी सीरियस है. वो रब की तरफ से तोहफा था जिसे रब ने वापस ले लिया.''
हरप्रीत की बॉडी का पोस्टमार्टम भी नहीं किया गया. पोस्टमार्टम ना होने की वजह पूछने पर डॉक्टर बचन और कपूरथला के SSP ने कहा कि ये एक नेचुरल डेथ थी, इस वजह से पोस्टमार्टम की जरूरत नहीं है.
जल्दबाजी में 21 अप्रैल 2000 को सुबह 10 बजे कपूरथला के बेगोवाल गांव में हरप्रीत का अंतिम संस्कार कर दिया गया. इसमें पंजाब के चीफ मिनिस्टर प्रकाश सिंह बादल, गोल्डन टेम्पल के कई लोग, अकाल तख़्त के हेड ग्रंथी ज्ञानी समेत अकाली दल के कई नेता शामिल हुए थे.

CBI के हाथों में आया मामला 

9 जून 2000 को हाई कोर्ट ने मामला CBI को दिया. जागीर कौर के अलावा छह और लोगों पर मुकदमा चला. 2012 में पटियाला की स्पेशल CBI कोर्ट में जागीर कौर पर जबरदस्ती एबॉर्शन कराने, अपहरण करने और आपराधिक साजिश करने के आरोप साबित हुए. कोर्ट ने बेटी की हत्या करने का आरोप हटा लिया. बाकी मामलों के लिए कोर्ट ने जागीर को पांच साल की कैद और 5,000 रूपए जुर्माने की सजा सुनाई.
इसके बाद उन्हें सेंट्रल जेल ले जाने के लिए अरेस्ट कर लिया गया. जागीर कौर इस फैसले के बाद रोने लगीं. इसके अलावा तीन और लोगों पर साजिश रचने के लिए 5,000 रूपए का जुर्माना लगाया गया. ये तीन लोग थे दलविंदर कौर धेसी, परमजीत सिंह रायपुर और निशान सिंह. एक और आरोपी सत्या देवी को छोड़ दिया गया. इसके अलावा एक दूसरा आरोपी संजीव कुमार ट्रायल चलने के दौरान ही मर गया था.
बाद में जागीर कौर को पंजाब/हरियाणा हाई कोर्ट से बेल मिल गई थी.

आज का सुप्रीम कोर्ट का फैसला पंजाब चुनाव से पहले अकाली दल को झटका देने वाला है. 

Advertisement


ये स्टोरी निशांत ने की है.




ये भी पढ़ें-
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला की मौत हो गई है

अमृतसर से बीजेपी ने उस नेता को मैदान में उतारा है, जिससे सिद्धू बहुत चिढ़ते थे

सिर्फ तीन शब्द लिखकर कैप्टन अमरिंदर ने केजरीवाल की मौज ले ली

Advertisement
Advertisement