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सिर्फ तीन शब्द लिखकर कैप्टन अमरिंदर ने केजरीवाल की मौज ले ली

ये ट्विटर है न… बड़ी कुत्ती चीज है. एक की लंका लगती है और मौज पूरा जमाना लेता है. होता तो ट्विटर के बाहर भी ऐसा ही है, लेकिन यहां लोगों की क्रिएटिविटी जरा खुलकर आती है. उदाहरण सहित व्याख्या भी सुन लीजिए. गांव-घर में एक कहावत इस्तेमाल होती है, ‘सूप बोले तो बोले, चलनियौ बोले जीमां 72 छेद’. अब ट्विटर पर तो ऐसी कहावतें कोई यूज करता नहीं है. वहां लिखना हो, तो लिखते हैं: ‘Look who’s talking.’ मल्लब द्याखौ… अब इहो बुलिहैं. यही बोलकर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अरविंद केजरीवाल की खला दी है.

मुआमला ये है कि सोमवार को कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का मैनिफेस्टो जारी किया. इवेंट रखा गया था दिल्ली में, जहां पिछले प्रधानसेवक मनमोहन सिंह भी मौजूद थे. घोषणाएं हुईं, वादे हुए, तालियां बजीं और इवेंट खत्म हो गया. फिर केजरीवाल ने फैलाया अपना रायता. ट्वीट किया:

‘कांग्रेस ने अपना मैनिफेस्टो दिल्ली में रिलीज किया है. टिकट पाने के लिए पंजाब कांग्रेस के सारे नेता दिल्ली में डेरा डाले पड़े हुए हैं. दिल्ली पंजाब कांग्रेस को चला रही है.’

सबसे मजेदार बात ये है कि केजरीवाल खुद पंजाब चुनाव जीतने के चक्कर में आम आदमी पार्टी की पूरी मशीनरी दिल्ली से उठा कर पंजाब में डाल चुके हैं. ‘आप’ के दिल्ली के लगभग सभी नेता और अधिकतर कार्यकर्ता पंजाब में चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं. केजरीवाल ने तो दिल्ली के राजौरी गार्डेन से अपने विधायक जरनैल सिंह को इस्तीफा दिलाकर पंजाब बुला लिया है. जरनैल को पंजाब में प्रकाश बादल के खिलाफ उतारा जाएगा, क्योंकि पार्टी उनके सिख होने का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाना चाहती है. यूपी से आने वाले संजय सिंह और दुर्गेश पाठक भी इन दिनों पंजाब में ही डेरा डाले हुए हैं. संजय सिंह तो फिर केजरीवाल के आसपास दिख जाते हैं, लेकिन दुर्गेश पाठक हमेशा लाइमलाइट से दूर रहते हैं. दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान इन्होंने ‘आप’ के लिए खूब मेहनत की थी और अब वो यही काम पंजाब में कर रहे हैं.

तो अमरिंदर भाई भी ट्विटर की उसी गली से गुजर रहे थे. नजर पड़ी केजरीवाल के ट्वीट पर, तो रीट्वीट करते हुए लिख दिया, ‘Look who’s talking!. कैप्टन के इस ट्वीट के बाद केजरीवाल ने कई ट्वीट्स किए, लेकिन इस पर कोई जवाब नहीं दिया.

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बाहरी vs भीतरी की लड़ाई

केजरीवाल और कैप्टन एक-दूसरे पर जिस चीज को लेकर तंज कस रहे हैं, वो बाहरी-भीतरी की भी लड़ाई है. पंजाब चुनाव में ये मामला हाईलाइट रहता है कि चुनाव लड़ने वाला नेता पंजाब से ताल्लुक रखता है या नहीं. यही वजह है कि केजरीवाल ज्यादा से ज्यादा सिख चेहरों को मंच पर रखना चाहते हैं. पंजाब में अभी तक हुए ओपिनियन पोल कांग्रेस के हक में नतीजे दिखा रहे हैं. वहीं एक पोल में तो ‘आप’ को सिर्फ 10 सीटें मिलती दिखाई गई हैं. हालांकि, इंडिया टुडे के सर्वे में ‘आप’ को 36-41 सीटें मिलती दिख रही हैं. आगे की लड़ाई रोचक होगी.

केजरीवाल के साथ जरनैल सिंह
केजरीवाल के साथ जरनैल सिंह


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