कौरवों और पाण्डवों में यूं तो इंडो-पाक मची रहती थी. उसमें भी जबर दुर्योधन-भीम की खुन्नस, दोनों एक ही दिन पैदा हुए थे. और दोनों की एक रत्ती न बनती थी. पर एक बार ऐसा भी हुआ जब भीम दुर्योधन को बचाने के लिए गंधर्वों पे पिल पड़े. कौरवों को गधापचीसी चढ़ी ही रहती थी, मुटाई में एक दिन जा भिड़े गंधर्वों से. लतखोर लउंडों का अनकहा नियम होता है. मारने के साथ मारे जाने को भी तैयार रहना होता है. और अगले को कभी कमजोर नही मानते. कौरवों ने हलके में ले लिया गंधर्वों को. गंधर्वों ने कौरवों को बना के पेला. कर्ण के रथ के धुर्रे बिखेर दिए और दुर्योधन को काबू में कर लिया. कौरवों की सकते में आ गई. दुर्योधन के मंत्री भागे-भागे गए युधिष्ठिर के पास. युधिष्ठिर उस वक़्त यज्ञ में बैठे थे. माजरा सुन भीम बोले- कल का मरता आज मर जाए. मेरी बला से. ठीक पकड़ा गंधर्वों ने.
युधिष्ठिर ने टोका - छोटे इतना फड़फड़ाओ नही. तुम अभी छोटे हो. पॉलिटिक्स नहीं समझते हो और पॉलिटिक्स की छोड़ो. भाई है वो अपना. हम उसका फेवर न लेंगे तो कौन लेगा? खुन्नस खीसे में रखो. आपस में चाहे जितना लड़ो, कोई तीसरा बीच में कूदे तो पहले उसको सलटाओ. और वैसे भी वो तुम्हारी शरण में आए हैं. जानते हो तुम कौन हो? भीम बिल्लिया गए.पूछे- कौन हूं भईया? युधिष्ठिर बोले - तुम भीम हो बे, भीम! महाबली भीम! का चाहते तुम्हारी शरण में कोई मदद मांगने आए और तुम बहाने मारो. दुनिया नही जानती तुम्हारी और दुर्योधन की कैसेट कहां उलझी है. सोचो दुनिया क्या कहेगी? भीम के भाई को गंधर्व धौंक रहे हैं और भीम बहाने मार रहे हैं.
भीम को जोश आ गया.बोले-ऐसी की तैसी इन गंधर्वों की, गंध मचा दी है इनने. नाम डुबाएंगे मेरा. इनको अभी ठोंकता हूं.
युधिष्ठिर बोले - अब ऐसा है कि फुर्ती में उठो अर्जुन,नकुल,सहदेव को समेटो और गंधर्वों को दिखा दो कि किससे पाला पड़ा है उनका. चारों पहुंचे और गंधर्वों की लंका लगा दी. युद्ध जब थोड़ा आगे खिंचा तो गंधर्वों का लीडर लड़ने आया. अर्जुन ने उसे देखा और युद्ध छोड़ बतियाने लगे. हाल-चाल, पान-ब्यौहार होने लगा. वो कथा फिर कभी. अभी आप बस इतना जानिए कि एक मौके पर दुर्योधन को बचाने भीम भी लड़ पड़े.
स्त्रोत- संक्षिप्त महाभारत
किडनैपिंग के बाद जान बची तो दुर्योधन चल दिया सुसाइड करने