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दिल्ली के घर में 4 बौनों की लाश, फर्श के नीचे तहखाना

पुलिस आई. फर्श पर बना 'गुप्त' खोल हटाया तो मिला छिपा खजाना. 21 साल पहले का मशहूर केस.

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ज्वालानगर में बौने लोगों का घर. घटना के बाद.
21 साल पहले की दिल्ली. दिल्ली का शाहदरा और शाहदरा का एक घर. जून की गर्म सुबह और वहां मिलती है चार बौनों की लाश. वजह, एक छिपा हुआ ख़जाना.
जून 1995 में चार बौनों के इस मर्डर केस ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं. शाहदरा में ज्वालानगर इलाके के एक घर में चार बौनों की खून से सनी लाशें बरामद हुईं. जिसने सुना, भौंचक रह गया. चारों बौने उसी घर में रहते थे. भाई-बहन थे. पुलिस को लाशों के साथ ज्यादा सुराग नहीं मिले. लेकिन जब ज़रा ज़ोर देकर मौके का मुआयना किया तो खून सने फर्श के नीचे एक छोटा सा तहखाना मिला. इस तहखाने से निकले 2 लाख 40 हजार रुपये, तीन लाख रुपये का सोना और ढाई लाख रुपये की फिक्स डिपॉजिट के कागजात. 1995 में अच्छी खासी रकम होती थी.
ये पैसा देखकर पुलिस वाले भले ही चौंक गए, लेकिन इलाके के लोकल लोग नहीं चौंके. बाद में मालूम हुआ कि बौनों के घर में खजाना होने की चर्चा काफी टाइम से थे. उन चारों के नाम थे:

भाई: रामजी दास और शिवकुमार. बहन: भागवंती और केसरीबाई.

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शाहदरा का ज्वालानगर इलाका.

उल्टा-पुल्टा पड़ा रहा घर, फिर भी कैसे बचा खजाना?
पुलिस की नजरों के सामने लाशें और तहखाने से निकला खजाना. सामने लोहे की एक बड़ी अलमारी और तीन बड़े संदूक खाली मिले. केस की जांच कर रहे क्राइम डिपार्टमेंट के कमिश्नर कमर अहमद ने कहा, 'जब पुलिस घर में दाखिल हुई, सब उल्टा-पुल्टा मिला. ये हत्याएं खजाना लूटने के लिए की गई थीं. बाद में हमें फर्श के भीतर से खजाना मिला.'
पुलिस को शक था कि असल खजाने तक लुटेरे पहुंच ही नहीं पाई, लूटपाट करने वाले बौने लोगों के घर के जानने वाले ही थे.
अमीर साहूकार बाप की गरीब औलादें
ये चारों बहुत सिंपल तरीके से रहते थे. उनके पिता रामलाल, अलवर के अमीर साहूकार थे. उनकी अलवर के पास 20 बीघा से ज्यादा जमीन थी.  औलादें बौनी हुईं तो लोगों की फब्तियों से परेशान रहने लगे. फिर परिवार के साथ दिल्ली आकर बस गए. 1990 में रामलाल की मौत हो गई. कहा गया कि रामलाल अपने पीछे बहुत सारा खजाना छोड़ गए. यही वो खजाना था, जिसे लूटने की कोशिश की गई और उस दौरान रामलाल के चारों बच्चों का मर्डर हो गया.
इस खबर की जो आखिरी अपडेट मालूम चलती है, वो ये कि हत्यारों को पहचान लिया गया था. पुलिस ने भी कहा कि जांच सही दिशा में जा रही है. ये 21 साल पहले की बात है. पर खजाने की भूख की खातिर जान लेने की घटनाएं अब कौन सा थम गई हैं.

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