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क्या एयर टर्बुलेंस के चलते विमान क्रैश हो जाता है?

एयर टर्बुलेंस से कुछ लोग इतना डरते हैं कि कभी हवाई यात्रा नहीं करते

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कभी-कभी तो एयर टर्बुलेंस यात्रियों को रुला तक देता है | फ़ाइल फोटो: इंडिया टुडे/ट्विटर

नेपाल में येती एयरलाइंस का एक विमान पोखरा हवाई पट्टी पर लैंड करते समय क्रैश हो गया. विमान पोखरा घाटी में सेती नदी की खाई में जा गिरा. ये हादसा 15 जनवरी को सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर हुआ. कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि लैंडिंग से महज 10 सेकंड पहले प्लेन में तगड़ा एयर टर्बुलेंस होते देखा था, प्लेन ने हवा पलटे मारे और क्रैश हो गया. अब तक 69 शव बरामद किए जा चुके हैं.

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एयर टर्बुलेंस आखिर क्या बला है?

एयर टर्बुलेंस ऐसी घटना है जिससे हर पायलट बचना चाहता है. हर यात्री के लिए ये बेहद खराब अनुभव होता है. इससे बचने के लिए क्रू मेंबर कहते भी हैं कि सीट में लगी बेल्ट कसकर बांध लीजिए.

टर्बुलेंस असल में एयर फ्लो में दबाव और रफ्तार में आया अचानक परिवर्तन होता है, जिससे विमान को धक्का लगता है. विमान चलते-चलते ऊपर-नीचे हिलने लगता है, जिसे Aircraft Shaking कहते हैं. टर्बुलेंस की वजह से मामूली झटकों से लेकर तेज और लंबे झटके महसूस किए जा सकते हैं. जिसके नतीजे बेहद भयावह भी हो सकते हैं. हवा की स्थिरता के आधार पर टर्बुलेंस को हल्के, मध्यम, गंभीर या एक्सट्रीम टर्बुलेंस में बांटा जाता है.

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मध्यम टर्बुलेंस के दौरान, विमान पर नियंत्रण बनाए रखा जाता है. यात्रियों को सीट बेल्ट के खिलाफ तनाव महसूस होता है, जबकि गंभीर टर्बुलेंस से विमान की एयर स्पीड में बदलाव होता है. साथ ही, उसके एल्टिट्यूड और एटिट्यूड में भी तेजी से बदलाव आ सकता है. एक्सट्रीम टर्बुलेंस में विमान हवा में गोते खाने लगता है. 

क्यों होता है एयर टर्बुलेंस?

समुद्र की लहरों की तरह, जब हवा किसी पहाड़ या ऊंची इमारत से टकराती है तो हवा में भी लहरें बनती हैं. हवा में टर्बुलेंस कई पर्यावरणीय कारकों की वजह से होता है, जैसे तेज हवा या फिर मौसम में अचानक हुआ बदलाव. शेफील्ड स्कूल ऑफ एरोनॉटिक्स के मुताबिक, टर्बुलेंस के मुख्य कारण हैं-

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कम ऊंचाई पर तेज हवा:

कम ऊंचाई पर तेज हवा से घर्षण होता है और एयर फ्लो सतह से प्रभावित होता है. चूंकि यह सीधा और स्थिर नहीं होता, इसलिए दिशा में वेरिएशन के साथ, एयरस्पीड में बदलाव होता है. विमान हिलने लगते हैं.

अन्य विमान से टर्बुलेंस:

इस घटना को वेक टर्बुलेंस (Wake Turbulence) कहते हैं. यह तब होता है जब एक हवाई जहाज के पास से दूसरा हवाई जहाज या हेलीकॉप्टर गुजरता है. इससे विमान दूसरे विमान की हवा में फंस जाता है. विमान जितना बड़ा होगा, टर्बुलेंस उतना ही गंभीर होगा.

सोलर थर्मल:

कई बार सूर्य की गर्मी से भी टर्बुलेंस होता है. ऐसा इसलिए, क्योंकि यह थर्मल या गर्म हवा की पॉकेट्स को ट्रिगर करती है, जो वर्तमान हवाओं के साथ टकराती हैं तो उड़ान में झटके लगते हैं.

अब सबसे बड़ी बात ये कि एयर टर्बुलेंस एक आम घटना है, और ऐसा नहीं है कि एयर टर्बुलेंस के दौरान विमान दुर्घटना का शिकार हो जाए. जानकारों का मानना है कि जब तक प्लेन में कोई तकनीकी खराबी नहीं होती, या पायलट से कोई गलती नहीं होती या फिर प्लेन किसी बड़ी आपदा का शिकार नहीं होता, तब तक प्लेन क्रैश नहीं हो सकता.

वीडियो: नेपाल प्लेन क्रैश: पहले बस से जाने वाले थे चारों दोस्त, फिर क्या हुआ कि प्लेन ले लिया?

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