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क्या आर्यन खान के बहाने समीर वानखेड़े से अपना हिसाब बराबर कर रहे हैं नवाब मलिक?

एक के बाद एक समीर वानखेड़े की मुश्किलें बढ़ाते जा रहे हैं नवाब मलिक.

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समीर वानखेड़े (बाएं), आर्यन खान (बीच में) और नवाब मलिक (दाएं). (सभी तस्वीरें पीटीआई से साभार हैं.)
26 अक्टूबर, यानी कल बॉम्बे हाई कोर्ट में आर्यन खान की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई थी. कल कोर्ट में और कोर्ट के बाहर जो कुछ हुआ हमने उसके बारे में आपको विस्तार से बताया था. आज फिर इस मामले पर सुनवाई हुई. सुनवाई शुरू हुई तो अमित देसाई ने अरबाज़ मर्चेंट का पक्ष रखते हुए गिरफ्तारी को ही अवैध बताया. उन्होंने कहा कि आरोप छोटी मात्रा में ड्रग्स रखने और सेवन करने का था, जिसके लिए अधिकतम सज़ा ही 1 साल की है. ऐसे मामलों में गिरफ्तारी एक अपवाद है. इस दलील के लिए देसाई ने सुप्रीम कोर्ट और अलग अलग हाईकोर्ट के पूर्व में दिए फैसलों का हवाला दिया. देसाई ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया कि तीनों आरोपी - माने आर्यन, अरबाज़ और मुनमुन वहां कोई योजना बनाकर नहीं आए थे. इसीलिए वो किसी षडयंत्र का हिस्सा नहीं हो सकते. मामले में सुनवाई आज भी पूरी नहीं हो पाई. और अब 28 अक्टूबर को दोपहर ढाई बजे का वक्त सुनवाई के लिए तय किया गया है. समीर वानखेड़े की बढ़ती मुश्किलें अब आते हैं समीर वानखेड़े पर. इनकी समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. मुंबई क्रूज़ शिप ड्रग रेड के दौरान गवाह रहे प्रभाकर सैल ने सिर्फ कथित लेनदेन की बात नहीं कही थी. उन्होंने ये भी कहा था NCB ने रेड के बाद उनके कोरे कागज़ों पर दस्तखत करवाए थे. अब बिलकुल ऐसा ही आरोप नवी मुंबई में रहने वाले शेखर कांबले ने भी लगाया है. इस साल NCB ने अगस्त के महीने में एक रेड डाली थी, जिसमें शेखर कांबले गवाह थे. शेखर का कहना है कि इस रेड के दौरान भी NCB ने उनसे 10-12 कोरे पन्नों पर दस्तखत करने को कहा था. शेखर का दावा है कि वो नहीं जानते कि बरामदी के बारे में क्या लिखा गया. उन्होंने प्रभाकर सैल को मीडिया में बोलते हुए सुना, तो ये बात बाहर लाने के फैसला किया. कांबले ऑपरेशन थंडरबोल्ट के दौरान पड़े छापों में से एक में गवाह थे. इस ऑपरेशन के तहत NCB ने कई जगह छापे मारकर ड्रग पेडलर्स को पकड़ा था. एक छापा नवी मुंबई के खारघर में भी पड़ा था. इसी छापे के दौरान मौजूद होने का दावा शेखर ने किया है. समीर वानखेड़े ने इसपर कहा कि ये मामला न्यायालय में है, तो अदालत के समक्ष ही कुछ भी कहा जा सकता है. सैल के आरोप, NCB की अंदरूनी जांच और उस पर समीर वानखेड़े की पेशी. ये तो समीर वानखेड़े के एक मुश्किल की बात हो गई. लेकिन समीर वानखेड़े के मुश्किलों की फेहरिस्त लंबी है. जब तक हमारी टीम आपके लिए ये बुलेटिन तैयार कर रही थी, तब तक ये लिस्ट और लंबी हो गई. कैसे? जवाब - नवाब मलिक. नवाब मलिक ने समीर वानखेड़े पर जितने आरोप लगाए हैं, और जितने विस्तृत तरीके से लगाए हैं, उन सबको यहां बताना मुमकिन नहीं. कुछ आइडिया आपको है, कुछ हम आपको दे देते हैं - 1. मलिक का दावा है कि समीर वानखेड़े के जन्म प्रमाणपत्र में उनके पिता का नाम दाउद वानखेड़े है. मलिक कहते हैं कि समीर वानखेड़े ने गलत तरीके से जाति प्रमाणपत्र बनाकर इंडियन रेवेन्यू सर्विस की परीक्षा में आरक्षण का फायदा लिया. मलिक ने कहा कि समीर जन्म से एक मुस्लिम हैं. इसलिए अनुसूचित जाति वर्ग को मिलने वाले आरक्षण के पात्र नहीं हैं. क्योंकि जो दलित इस्लाम कबूल कर लेते हैं, वो आरक्षण के पात्र नहीं रह जाते. मलिक कहते हैं कि समीर के पिता दलित थे और उनका नाम द्यानदेव वानखेड़े था. लेकिन उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया था, और दाऊद हो गए थे. फिर एक मुस्लिम महिला से शादी की थी. समीर ने इसके जवाब में कहा था कि उनके पिता का नाम दाउद नहीं, द्यानदेव ही है. इसी इल्ज़ाम को आगे ले जाते हुए नवाब मलिक ने समीर की पहली शादी का ज़िक्र भी किया. ये एक मुस्लिम महिला से थी. अब समीर की पत्नी अभिनेत्री क्रांति रेडनेकर हैं. उन्होंने कहा कि निकाहनामे की बात सही है. लेकिन समीर ने कभी अपना धर्म या जाति नहीं बदली. मेरी सास मुस्लिम थीं. इसलिए उनकी इच्छा का सम्मान करने के लिए समीर ने पहली शादी के वक्त निकाहनामा करवाया. क्रांति ने ये भी कहा कि मलिक जिस बर्थ सर्टिफिकेट की बात कर रहे हैं, वो जाली है. 2. दूसरा बड़ा इल्ज़ाम जो नवाब मलिक ने समीर पर लगाया है, वो है ड्रग्स से संबंधित 26 झूठे मामलों में लोगों को फंसाने का. ये दावा मलिक ने एक कथित NCB अफसर के गुमनाम खत के आधार पर किया है. इन 26 मामलों में खारघर वाला मामला भी शामिल था, जिसके बारे में हमने आपको अभी बताया था. तो समीर और समीर के परिवार का काफी समय अब इन आरोपों का जवाब देने में जा रहा है. समीर वानखेड़े ने आज फिर उम्मीद भरी नज़र से अदालत की तरफ देखा होगा, लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगी. दर्शक जानते ही हैं कि प्रभाकर सैल के हलफनामे में लेनदेन की बात सामने आने के बाद NCB और उसके ज़ोनल डायरेक्टर साहब विशेष NDPS अदालत में राहत मांगने पहुंच गए थे. समीर वानखेड़े और एनसीबी चाहते थे कि सैल के हलफनामे पर किसी भी तरह के संज्ञान पर रोक लगाई जाए. लेकिन 25 अक्टूबर को अदालत ने साफ कर दिया था कि ऐसा कोई आदेश नहीं दिया जा सकता है. सादी भाषा में इसका मतलब हुआ, अगर कोई एजेंसी चाहे तो सैल के हलफनामे पर कदम उठाते हुए वानखेड़े के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है. वानखेड़े के लिए जनहित याचिका तो आज राहत के लिए दूसरी तिकड़म भिड़ाई गई. और इस बार खुद समीर अपने बचाव में आगे नहीं आए. आज अचानक बंबई उच्च न्यायालय के समक्ष समीर वानखेड़े से संबंधित एक जनहित याचिका लगाए जाने की खबर आई. लगाने वाले खुद को कारोबारी और मौलाना बता रहे हैं. ये याचिका बड़ी दिलचस्प थी. समाचार वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक इसमें कहा गया कि नवाब मलिक ने समीर वानखेड़े और उनकी बहन के खिलाफ एक ''युद्ध'' छेड़ रखा है और वो ये सारी कवायद वो समीर वानखेड़े को हतोत्साहित करने के लिए ही कर रहे हैं. इन सब तर्कों के आधार पर अदालत से मांग की गई कि नवाब मलिक के NCB और समीर वानखेड़े के खिलाफ बोलने पर रोक लगाई जाए. आज अदालत ने इस जनहित याचिका की फौरन सुनवाई से इनकार कर दिया. मतलब इस याचिका पर सुनवाई हो भी सकती है. लेकिन अभी वक्त लगेगा. कम से कम दीवाली की छुट्टियां खत्म होने तक इंतज़ार करना होगा. नवाब मलिक का एक और आरोप इसे नवाब मलिक की अच्छी किस्मत भी कहा जा सकता है. क्योंकि आज ही के रोज़ नवाब मलिक ने समीर वानखेड़े पर फिर एक आरोप लगा दिया. मलिक ने दावा किया कि जिस दिन क्रूज़ पर रेड पड़ी, उस दिन वहां ''इंटरनैशनल ड्रग माफिया'' से जुड़ा शख्स भी मौजूद था. इसके बारे में NCB अधिकारी जानते थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. नवाब मलिक ने कहा,
NCB ने जिस क्रूज शिप पर छापा मारा था, वहां 1300 लोग मौजूद थे. लेकिन सिर्फ उन्हीं को पकड़ा गया जिनको समीर वानखेड़े ने टारगेट किया है. यही नहीं उसी पार्टी में एक दाढ़ीवाला भी मौजूद था. उसकी प्रेमिका भी वहां बंदूक के साथ नाच रही थी. उन्हें तो नहीं पकड़ा गया. हमें तो लगता है कि ये दाढ़ीवाला वानखेड़े का दोस्त है, इसलिए इसको नहीं पकड़ा गया. ये दाढ़ीवाला एक इंटरनेशनल माफिया है. ये दिल्ली की तिहाड़ जेल और राजस्थान की जेल में भी रह चुका है. मैं इसका नाम अभी नहीं बताऊंगा. लेकिन जांच एजेंसियों को क्रूज की सीसीटीवी फुटेज की जांच करनी चाहिए. 
नवाब मलिक ने पिछले बरस सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद बॉलीवुड की कई हस्तियों के खिलाफ हुई NCB कार्रवाई पर भी सवाल उठाए. उन्होंने सवाल पूछा कि अब तक इस मामले में आगे की कार्रवाई क्यों नहीं हुई. तो इन सारी बातों के बाद बचता है ये सवाल, कि एलबर्ट पिंटो --- माफ कीजिए, नवाब मलिक को इतना गुस्सा क्यों आता है? क्या इसके पीछे कोई मामला है? नवाब मलिक और NCB उद्धव ठाकरे की महा विकास अघाड़ी सरकार में नवाब मलिक अल्पसंख्यक, कौशल विकास और उद्यमिता विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं. नवाब मलिक का जन्म 20 जून 1959 को उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के उतरौला तहसील क्षेत्र के धुसवा गांव में हुआ. नवाब मलिक का पूरा परिवार 1970 में यूपी से मुंबई आ गया. उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत समाजवादी पार्टी से की थी, लेकिन बाद में वे शरद पवार की एनसीपी में शामिल हो गए. अब तक पांच बार विधायकी जीत चुके नवाब का सामना एनसीबी से पहली बार आर्यन खान मामले से नहीं हुआ. आजतक के लिए कुबूल अहमद ने नवाब मलिक की एक प्रोफाइल लिखी है. इसमें कुबूल बताते हैं कि नवाब मलिक के परिवार में उनकी पत्नी महजबीन, बेटा मराज, आमिर और बेटियां निलोफर और सना हैं. नवाब मलिक के दामाद का नाम समीर खान है. पिछले साल अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के मर्डर केस के बाद रिया चक्रवर्ती को जब ड्रग्स के मामले में जेल भेजा गया था तब समीर खान का भी नाम आया था. एक संदिग्ध ड्रग पेडलर को पकड़ा गया. इसका नाम था करण संजानी. NCB का कहना था कि करण अमेरिका से कुरियर के ज़रिए ड्रग्स मंगवा रहा था. इस कारोबार में उसके साथ थीं राहिला फर्नीचरवाला. राहिला इस कारोबार के लिए अपने क्रेडिट कार्ड से पैसा चुका रही थी. और कथित ''हर्बल प्रॉडक्ट्स'' के लिए पेमेंट स्वीकार भी कर रही थी. इस लेनदेन की जांच हुई तो NCB पहुंची मुंबई के प्रसिद्ध मुच्छड़ पानवाला तक. यहां 500 ग्राम प्रतिबंधित ड्रग्स मिलीं. और यहीं समीर खान का नाम सामने आया. इसी के बाद नवाब मलिक के रडार पर एनसीपी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े बने हुए थे. लेकिन मलिक ने तुरंत कोई मिसाइल नहीं चलाई. क्योंकि समीर वानखेड़े की अगुवाई में NCB ने इस साल जनवरी में नवाब मलिक के दामाद समीर को दो अन्य आरोपियों के साथ गिरफ्तार कर लिया था. जुलाई में उनके खिलाफ Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act (NDPS)की धाराओं में चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई. मंत्रीजी के दामाद पर मामला इतना पक्का बनाया गया कि वो 8 महीने जेल में रहे. 27 सितंबर को जाकर बेल मिली. उन्हें 50 हज़ार का बॉन्ड भरना पड़ा और ये वादा करना पड़ा कि वो सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे. दामाद बाहर आ गए तो फिर मलिक अटैकिंग मोड में आए. उन्होंने कहा कि उनके दामाद के मामले में एनसीबी ने हर्बल टोबैको को गांजा बताने की कोशिश की. जब आर्यन खान समेत दूसरे हाई प्रोफाइल आरोपियों को एनसीबी ने पकड़ा तो मलिक को मौका मिल गया. और तब से वो लगातार नए खुलासे करने का दावा कर रहे हैं. तो जैसा कि हमने कल भी कहा था, मुंबई क्रूज़ केस में स्टेकहोल्डर जितने नज़र आ रहे हैं, असल में उससे कहीं ज़्यादा हैं. आने वाले दिनों में क्या नया होगा, ये कोई नहीं बता सकता.

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