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बांग्लादेश में अंतरिम सरकार का इतिहास क्या है?

बांग्लादेश में पहली बार अंतरिम सरकार 1990 में बनी. जब सैन्य तानाशाह हुसैन मुहम्मद इरशाद को इस्तीफ़ा दिलवाया गया

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मोहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार में शपथ लेते हुए (फोटो -AFP)

मोहम्मद युनूस ने 8 अगस्त को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया के तौर पर शपथ ले ली है. उनके साथ 16 और सदस्य अंतरिम सरकार का हिस्सा होंगे. अंतरिम सरकार के गठन के बाद पूरी दुनिया से रिएक्शन आ रहे हैं. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर मोहम्मद यूनुस को बधाई दी. हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील भी की.
अमेरिका और चीन ने कहा कि हम बांग्लादेश की नई सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे. इसी बीच शेख हसीना के बेटे सजीब वाजिद जॉय का बयान सुर्खियों में है. उन्होंने कहा, मेरी मां की वापसी होगी. आवामी लीग के बिना देश की तरक्की संभव नहीं.

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5 अगस्त 2024 को शेख हसीना देश छोड़कर भाग गई थीं. इसके बाद से बांग्लादेश में घटनाक्रम तेज़ी से बदले. बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के नेता शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्तियां तोड़ी गईं. आवामी लीग के नेताओं, हिन्दुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों पर हमले हुए. इसी बीच अंतरिम सरकार का गठन हुआ है.
आइए समझते हैं,

- बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में कौन शामिल हुआ?
- इससे पहले कब-कब बांग्लादेश में अंतरिम सरकारें बनी?
- और, क्या शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी संभव है?

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सबसे पहले समझिए अंतरिम सरकार क्या होती है?

जब किसी वजह से तय कार्यकाल के बीच में सरकार गिर जाती है या वो सदन में बहुमत खो देती है या नेता का निधन हो जाता है. तो, अगली पूर्णकालिक सरकार तक अस्थायी सरकार बनाई जाती है. इसी को अंतरिम सरकार कहते हैं. आमतौर पर अंतरिम सरकार की ज़िम्मेदारी चुनाव कराने की होती है.
बांग्लादेश के केस में मोहम्मद यूनुस इस समय सबसे शक्तिशाली पद पर हैं. ऐसा समझिए कि अंतरिम सरकार में मुखिया के पास प्रधानमंत्री और बाकी सदस्यों के पास केंद्रीय मंत्री जितनी शक्ति होती है.  
अब बात इतिहास की करते हैं. कब-कब बांग्लादेश में अंतरिम सरकार बनी? पहली अंतरिम सरकार वजूद में आई 1990 में. सैन्य तानाशाह हुसैन मुहम्मद इरशाद के इस्तीफे के बाद.

इस सरकार की कहानी क्या है?

1981 में बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी (BNP) सत्ता में आई. अब्दुल सत्तार देश के राष्ट्रपति बने. लेकिन उनकी सरकार ज़्यादा टिक नहीं पाई. 24 मार्च 1982 को जनरल हुसैन मोहम्मद इरशाद ने तख्तापलट कर दिया. देश में मार्शल लॉ लगा. 1983 में उन्होंने ख़ुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया. 1986 में चुनाव हुए. इरशाद चुनाव जीतकर फिर राष्ट्रपति बने. उनके ख़िलाफ़ चुनाव में धांधली के आरोप भी लगे.    
1990 तक इरशाद हुसैन के ख़िलाफ़ देश में माहौल बनने लगा था. न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे थे. प्रेस का हाल भी ठीक नहीं था. इसी बीच दो राजनीतिक विरोधी एक साथ आए. शेख हसीना और खालिदा ज़िया.

दोनों ने मिलकर इरशाद हुसैन को चुनौती दी. इरशाद हुसैन ने दोनों को गिरफ़्तार करवा दिया. इससे आम जनता की सहानुभूति दोनों नेताओं के प्रति बढ़ी. दबाव इतना बढ़ा कि इरशाद हुसैन को इस्तीफ़ा देना पड़ा. फिर बांग्लादेश में पहली बार अंतरिम सरकार बनाई गई. आवामी लीग, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) समेत दूसरी पार्टियों ने मिलकर बांग्लादेश के तत्कालीन चीफ़ जस्टिस सहाबुद्दीन अहमद को इस सरकार का मुखिया तय किया.  

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दूसरी बार अंतरिम सरकार बनाने की नौबत आई साल 1996 में. तब बांग्लादेश के पूर्व चीफ़ जस्टिफ हबीबुर रहमान को अंतरिम सरकार का मुखिया बनाया गया था. इसकी कहानी क्या है?
कहानी वहीं से शुरू करते हैं, जहां से छोड़ी थी. जनरल इरशाद हुसैन के इस्तीफे के बाद जस्टिस सहाबुद्दीन ने अंतरिम सरकार की सरपरस्ती की. देश में चुनाव हुए. BNP ने सरकार बनाई. 1991 में पहली बार खालिदा ज़िया देश की प्रधानमंत्री बनीं थी. 4 साल खालिदा ज़िया ने पूरी ताकत से सरकार चलाई. मगर 1995 आते-आते उनके ख़िलाफ़ विपक्ष को कुचलने के आरोप लगे. कहा गया कि प्रधानमंत्री पद का गलत इस्तेमाल हो रहा है. इसलिए, उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. खालिदा ज़िया नहीं मानी.

शेख हसीना की आवामी लीग और जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश ने देशव्यापी आंदोलन किया. 1995 में विपक्षी पार्टियों ने मिलकर कुल 74 हड़तालें कीं. स्कूल-कॉलेजों पर ताला लगा. खालिदा ज़िया के ख़िलाफ़ पनपे इस आंदोलन में कई जगह से हिंसा की भी ख़बरें आईं. आंदोलन की वजह से देश भर में गाड़ियों की आवाजाही भी प्रभावित हुई. इससे डेली ज़रूरत सामान सब जगह नहीं पहुंच पा रहा था. देश जैसे ठप पड़ गया. लेकिन खालिदा ज़िया इस्तीफ़ा देने को राज़ी नहीं हो रही थीं.

जैसे हालात थे, खालिदा ज़िया की पार्टी BNP के अंदर ही विरोध शुरू हो गया. 276 नेताओं ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया. इस दबाव के बाद खालिदा ज़िया राज़ी हुई, संसद भंग की गई. और, आम चुनाव करवाने की घोषणा हुई.  खालिदा ज़िया के इस्तीफे के बाद देश संभालने के लिए विपक्षियों ने अंतरिम सरकार का गठन किया. मार्च 1996 में बांग्लादेश के फॉर्मर चीफ़ जस्टिस हबीबुर रहमान को इस सरकार का मुखिया बनाया गया. इस सरकार में मोहम्मद यूनुस भी शामिल थे. जो अभी वाली अंतरिम सरकार के मुखिया बने हैं.

तीसरी बार अंतरिम सरकार बनाने की नौबत 2001 में आई. इसकी कहानी क्या है?

1996 में खालिदा ज़िया के इस्तीफे के बाद चुनाव करवाए गए. इसमें शेख हसीना की सरकार बनी. हसीना का कार्यकाल 2001 में खत्म हुआ. जुलाई 2001 में उन्होंने संसद भंग की. अगला चुनाव अक्टूबर 2001 में होना था. इसलिए जुलाई से लेकर अक्टूबर यानी लगभग 4 महीने के लिए जस्टिस लतिफुर्रहमान को अंतरिम सरकार का मुखिया बनाया गया. ये पहली बार हो रहा था जब शांति के साथ किसी अंतरिम सरकार का गठन हुआ हो.

चौथी बार अंतरिम सरकार बनाई गई 2006 में.

2001 के चुनावों में BNP जीती. खालिदा ज़िया दूसरी बार प्रधानमंत्री बनीं. लेकिन उनकी सरकार पर विपक्ष को दबाने के आरोप लगे. 1996 जैसा माहौल फिर से बन रहा था. इसलिए, 2006 में उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया. तत्कालीन राष्ट्रपति इयाजुद्दीन अहमद को अंतरिम सरकार का मुखिया बनाया गया. फिर जनवरी 2007 में अर्थशास्त्री फखरुद्दीन एक साल के लिए अंतरिम सरकार के मुखिया बने.

2011 में शेख हसीना ने अंतरिम सरकार वाला नियम ही खत्म कर दिया. हमने इंडिया फ़ाउंडेशन के डायरेक्टर कैप्टन आलोक बंसल से पूछा, जब 2011 में शेख हसीना ने अंतरिम सरकार वाली व्यवस्था क्यों खत्म की थी? और, अब किस आधार पर अंतरिम सरकार का गठन हुआ है? उन्होंने हमें बताया कि 

जब उस वक़्त शेख हसीना की सरकार आई थी, उस से एक दो साल पहले से अंतरिम सरकार ही चल रही थी, जो सत्ता हस्तांतरित नहीं करना चाहती थी. तो शायद उनको लगा हो किये उपयुक्त व्यवस्था नहीं है. 

ये तो हुई इतिहास की बात. अब आते हैं वर्तमान में. शेख हसीना के इस्तीफ़े के बाद छात्रों ने मोहम्मद युनूस से मांग की थी कि वो अंतरिम सरकार की सरपरस्ती करें. पेरिस से लौटने के बाद 8 अगस्त को उन्होंने अंतरिम सरकार के मुखिया की शपथ ली. उनके साथ 16 और लोग भी शामिल हुए हैं. कौन-कौन हैं?
एक-एक कर जान लेते हैं.

मोहम्मद यूनुस –

अंतरिम सरकार के मुखिया के अलावा रक्षा, शिक्षा समेत दर्जन भर से ज़्यादा मंत्रालयों की भी ज़िम्मेदारी मिली है. युनूस एक जाने-माने अर्थशास्त्री हैं. उनको बांग्लादेश में ग्रामीण बैंक की शुरुआत का श्रेय मिलता है. ये बैंक ग़रीबों को छोटा-मोटा क़र्ज देती है. बदले में कुछ गिरवी रखने की मजबूरी नहीं होती. यही वजह है कि यूनुस बांग्लादेश में ख़ासे लोकप्रिय हुए. 2006 में युनूस और उनके ग्रामीण बैंक को नोबेल पीस प्राइज़ से सम्मानित किया गया. 

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 मोहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार में शपथ लेते हुए (फोटो -AFP)

नोबेल प्राइज़ के साथ साथ यूनुस के नाम के साथ कई क़ानूनी केस भी जुड़े हुए हैं. 2010 में उनके ऊपर नॉर्वे द्वारा ग्रामीण बैंक को मिले फंड्स के दुरुपयोग करने के आरोप लगे. हालांकि बाद में नॉर्वे ने उसे ख़ारिज कर दिया. शेख़ हसीना सरकार में यूनुस के ख़िलाफ़ दो सौ से ज़्यादा मुकदमे दर्ज थे. वो शेख हसीना के बड़े आलोचक भी माने जाते हैं.

- डॉ. सालेहुद्दीन अहमद को फाइनेंस मिनिस्ट्री और प्लानिंग मिनिस्ट्री मिली है. सालेहुद्दीन अहमद बांग्लादेश बैंक के पूर्व गवर्नर हैं. और, वर्तमान में BRAC बिजनेस स्कूल में प्रोफेसर हैं.

- ए.एफ. हसन आरिफ़ को मिनिस्ट्री ऑफ़ लोकल गवर्नमेंट रुरल डेवलपमेंट एंड को ऑपरेटिव्स की ज़िम्मेदारी मिली है. आरिफ सुप्रीम कोर्ट के में सीनियर लॉयर हैं. 1970 से बांग्लादेश में वकालत कर रहे हैं. International Court of Arbitration के सदस्य भी हैं.

- एम. सखावत हुसैन को गृह मंत्रालय मिला है. बांग्लादेश के इलेक्शन कमिश्नर और आर्मी में ब्रिगेडियर जनरल रह चुके हैं.

- आसिफ नजरुल को लॉ मिनिस्ट्री मिली है. ढाका यूनिवर्सिटी में लॉ डिपार्टमेंट में प्रोफ़ेसर हैं. बांग्लादेश के जाने माने मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं. साउथ एशियन्स फॉर ह्यूमन राइट्स संस्था में 2011 से 17 तक ब्यूरो मेंबर रह चुके हैं.

- आदिलुर रहमान खान को उद्योग मंत्रालय की ज़िम्मेदारी मिली है.

- सैयदा रिज़वाना हसन को पर्यावरण मंत्रालय, शर्मिन मुर्शिद सोशल वेलफेयर मिनिस्ट्री, खालिद हुसैन को धार्मिक मामलों का मंत्रालय,फरीदा अख्तर को मछली और पशुपालन मंत्रालय, नूरजहां बेगम को स्वास्थ्य मंत्रालय मिले हैं.

- स्टूडेंट्स मूवमेंट का चेहरा रहे नाहिद इस्लाम और आसिफ महमूद को भी अंतरिम सरकार में जगह मिली है. आसिफ को स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री और नाहिद इस्लाम को पोस्ट्स, टेलीकम्युनिकेशन एंड इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री दी गई है.

- इनके अलावा सरकार में बिधान रंजन रॉय, सुप्रदीप चकमा, फारूख-ए-आज़म को भी शामिल किया गया है. ये तो हुई कहानी अंतरिम सरकार की. अब समझते हैं विदेश से नई सरकार के गठन पर क्या रिएक्शन आए हैं.

- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर लिखा,

प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस को नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं. हम उम्मीद करते हैं कि बांग्लादेश में जल्द ही हालात सामान्य होंगे. हिंदुओं और दूसरे सभी अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा की जाएगी. हम दोनों देशों की शांति, सुरक्षा और विकास के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

- अमेरिका ने कहा हम अंतरिम सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे.

- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने X पर मोहम्मद यूनुस को बधाई दी और साझा सहयोग पर ज़ोर दिया.

- चीन ने भी अंतरिम सरकार के गठन का स्वागत किया है. कहा, हम दोनों देशों के संबंध मज़बूत करना चाहते हैं.

- यूरोपियन यूनियन ने भी बांग्लादेश की नई सरकार के साथ काम करने की बात कही है.

बांग्लादेश से और क्या अपडेट है?

शेख हसीना के बेटे सजीब वाजिद जॉय ने कहा है कि बांग्लादेश में उनकी मां की वापसी होगी. न्यूज़ एजेंसी PTI से बातचीत में जॉय बोले,

- जैसे ही बांग्लादेश में लोकतंत्र की वापसी होगी. शेख हसीना वापस जाएंगी. शेख मुजीब के परिवार के सदस्य मुश्किल घड़ी में बांग्लादेश का साथ नहीं छोड़ेंगे.
- मेरी मां पिछले दो दिनों से बांग्लादेश में पार्टी के नेताओं के संपर्क में हैं. वो उन्हें अकेले नहीं छोड़ेंगी. 

वीडियो: 'बांग्लादेश वापस...', शेख़ हसीना के बेटे ने अब ये बताया

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