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क्या नीति आयोग के Health Index में UP के लिए कुछ भी पॉजिटिव नहीं है?

केंद्र सरकार के थिंक टैंक के हेल्थ इंडेक्स में ही सबसे फिसड्डी निकला यूपी.

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उत्तर प्रदेश लगातार दूसरी बार Health Index में अंतिम पायेदान पर आया
3 Idiots का वो सीन याद है आपको? जब राजू रस्तोगी नोटिस बोर्ड पर एग्जाम के रिजल्ट्स देखता है और पीछे से फरहान कुरैशी कहता है, 'नीचे से चेक करो, नीचे से.' फरहान को अपना अंदाजा ठीक-ठीक था. इंजीनियरिंग उसे करनी ही कब थी. सो उसने सेमेस्टर एग्जाम में नीचे से टॉप किया तो गलत भी नहीं. और राजू रस्तोगी? ये भी नीचे से सेकंड टॉपर रहे. इनका एटीट्यूड अभी ठीक नहीं था, 16 हड्डियां तुड़वानी थीं, दो महीने अस्पताल के बिस्तर पर सोचने का मौक़ा चाहिए था. तब कहीं एटीट्यूड आता.
लेकिन मूवी की इस कहानी से खबर का क्या लेना-देना? दरअसल अपने उत्तर-प्रदेश (UP) ने भी हेल्थ परफॉर्मेंस के रिजल्ट वाले इंडेक्स में इस साल टॉप किया है. ऊपर से नहीं, नीचे से. पिछली बार भी किया था. और इस बार नीचे से भी अव्वल और ऊपर से भी. कंफ्यूज हो गए न? हम भी हो गए थे, जब खबर आई. खबर क्या थी? केंद्र सरकार के थिंक टैंक Niti Ayog ने 27 दिसंबर 2021 को 198 पेजों की एक रिपोर्ट जारी की.
 देश के 19 बड़े राज्यों, 7 छोटे राज्यों और 7 केंद्रशासित प्रदेशों की हेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट (Health Index Report). स्वास्थ्य क्षेत्र में स्टेट्स और UTs की परफॉर्मेंस क्या रही, ये इस रिपोर्ट से पता चलता है. रिपोर्ट में राज्यों को तीन हिस्सों में बांटा गया. 19 बड़े राज्यों को एक ही श्रेणी में रखा गया. छोटे 7 राज्यों का अलग ग्रुप बनाया और UTs का अलग.
रिपोर्ट के मुताबिक हेल्थ परफॉर्मेंस के मामले में केरल ने लगातार चौथी बार टॉप किया है. 19 राज्यों की रैंकिंग में शीर्ष पर रहते हुए इस बार उसे टोटल 82.20 मार्क्स मिले. और उत्तर-प्रदेश 30.57 अंकों के साथ इस साल सबसे फिसड्डी रहा. माने 19 राज्यों की इस क्लास में 19वीं रैंक.
लेकिन हेल्थ स्कोर में सुधार के मामले में वो ऊपर से भी टॉप आया. रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य क्षेत्र में यूपी के परफॉर्मेंस में 5.52 अंकों का इंक्रीमेंटल चेंज (Incremental Change) आया है. पहली श्रेणी के सभी 19 राज्यों में से किसी ने इतने अंक हासिल नहीं किए हैं.
19 बड़े राज्यों को मिला स्कोर और रैंकिंग (फोटो सोर्स- Niti Ayog की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट)
19 बड़े राज्यों को मिला स्कोर और रैंकिंग (फोटो सोर्स- Niti Ayog की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट)
केरल स्कूल टॉपर, यूपी सिर्फ़ क्लास का लेकिन जब हमने इन 19 राज्यों के अलावा दूसरे छोटे राज्यों और UTs के आंकड़ों पर गौर किया तो कुछ और दिलचस्प तथ्य सामने आए. एक ये कि केरल ना सिर्फ अपने ग्रुप में, बल्कि तीनों ही श्रेणियों में सबसे ज्यादा अंक हासिल करने वाला राज्य रहा. जबकि यूपी इंक्रीमेंटल चेंज के मामले में केवल अपने ग्रुप में ही सबसे अच्छा परफॉर्म कर पाया. रिपोर्ट के मुताबिक सभी समूहों की बात की जाए तो 2 छोटे राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों का इंक्रीमेंटल चेंज स्कोर यूपी से अच्छा है. मिजोरम 18.45 अंक के इंक्रीमेंटल चेंज के साथ इस सुधार प्रक्रिया में टॉप पर रहा. कुल 75.77 का ओवरऑल स्कोर पाकर वो अपनी कैटेगरी में भी सबसे ऊपर रहा. वहीं मेघालय का इंक्रीमेंटल चेंज स्कोर 17.70 रहा. उसे कुल 43.05 अंक मिले. इसी तरह केंद्रशासित प्रदेशों में दिल्ली का इंक्रीमेंटल चेंज स्कोर 9.68 रहा, जम्मू और कश्मीर का 9.55 और लक्षद्वीप का 7.72.
सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने चुनावी बयानों में लगातार यूपी को हर मामले में अव्वल बता रहे हैं. वे कोरोना से लड़ने के मामले में भी यूपी को 'मॉडल स्टेट' बताते हैं. लेकिन नीति आयोग के हेल्थ इंडिकेटर्स में यूपी आखिरी नंबर पर है. उसने इंक्रीमेंटल चेंज में भी सबसे अच्छा स्कोर केवल अपनी श्रेणी में किया है. जबकि इसी परफॉर्मेंस में वो दूसरे ग्रुप्स के राज्यों से काफी पिछड़ गया है. नीति आयोग के हेल्थ इंडेक्स की अन्य बड़ी और ख़ास बातें चलते-चलते नीति आयोग के हेल्थ इंडेक्स से जुड़ी कुछ खास बातों पर नजर डाल लेते हैं.
# इस हेल्थ इंडेक्स की शुरुआत साल 2017 में NITI Ayog, World Bank और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने की थी.
# इसका उद्देश्य राज्यों और UTs के स्वास्थ्य संबंधी लक्ष्यों के पूरा होने का आकलन करना है.
# हेल्थ इंडेक्स को स्वास्थ्य संबंधी परिणामों, गतिविधियों और गवर्नेंस से जुड़े 24 मानकों के आधार पर तैयार किया जाता है.
# इंडेक्स बनाने के लिए डेटा, सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS), सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) और हेल्थ मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम (HMIS) से लिया जाता है.
# डेटा की कमी के चलते बंगाल और लद्दाख को इस साल के हेल्थ इंडेक्स से बाहर रखा गया है.
# चौथे राउंड (साल 2019-20) के आधार पर बनाए गए इस हेल्थ इंडेक्स के निर्धारण में स्वास्थ्य परिणामों या दूसरे किसी भी इंडिकेटर पर Covid-19 के प्रभाव को सम्मिलित नहीं किया गया है. कारण ये है कि इस हेल्थ इंडेक्स का बेस इयर 2018-19 और रेफेरेंस इयर 2019-20 है जो कि ज्यादातर कोविड-19 की शुरुआत से पहले का समय है.
# हेल्थ इंडेक्स को तय करने के लिए बर्थ रजिस्ट्रेशन, डेथ रजिस्ट्रेशन, शिशु मृत्यु दर, जन्म के समय लिंगानुपात, टीबी के केस और सफल इलाज, अस्पतालों में डॉक्टर्स की उपलब्धता, नए अस्पतालों की संख्या जैसे कुल 24 मापदंडों को आधार बनाया गया है.

(इस स्टोरी की रिसर्च में इंटर्न गोविन्द ने हेल्प की है.) 

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