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यह अफ्रीकन स्वाइन फ्लू कौन-सी बीमारी है, जो भारत में पहली बार देखी जा रही है

असम से इस बीमारी के मामले सामने आए हैं.

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अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के मामले पहली बार भारत में मिले हैं. असम में कई सुअरों को इस बीमारी के चलते मारा गया है.
दुनिया कोरोना वायरस से लड़ रही है. इसी बीच भारत में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के मामले सामने आए हैं. पूर्वोत्तर के राज्य असम में यह बीमारी देखी जा रही है. देश में पहली बार इस बीमारी के मामले आए हैं. इसके चलते राज्य के 306 गांवों में करीब 2,500 सूअरों को मारा जा चुका है. हालांकि सरकार ने कहा है कि इसका कोरोना वायरस से कोई कनेक्शन नहीं है.
राज्य के पशुपालन मंत्री हैं अतुल बोरा. उन्होंने 3 मई को इस बीमारी के बारे विस्तार बताया. कहा कि भोपाल में मौजूद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिज़ीज (NIHSAD) ने अफ्रीकन स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि की है. यह बीमारी सूअरों को होती है. इसमें मृत्यु दर 100 प्रतिशत है. यानी जिस भी सूअर को यह बीमारी हुई, उसकी मौत हो जा रही है. ऐसे में बीमार और उसके संपर्क में आए सूअरों को मारा जा रहा है, जिससे बीमारी आगे न फैले.
अतुल बोरा ने बताया कि संक्रमित इलाके के एक किलोमीटर के दायरे में सैंपल लेकर टेस्ट किए जाएंगे. इसके बाद केवल संक्रमित पाए जाने वाले सूअरों को ही मारा जाएगा, जिससे कि दूसरे सूअरों को बचाया जा सके. पड़ोसी राज्यों को भी इस बारे में जानकारी दी गई है. साथ ही सूअरों के मूवमेंट को रोकने को भी कहा गया है.
असम में कैसे आई ये बीमारी
अतुल बोरा ने बताया कि फरवरी के आखिरी सप्ताह में यह बीमारी सामने आई थी. अप्रैल, 2019 में चीन के शिजांग प्रांत में यह बीमारी शुरू हुई थी. यह अरुणाचल प्रदेश के पास पड़ता है. शक है कि अरुणाचल प्रदेश के रास्ते यह बीमारी असम तक आई. आमतौर पर बाहर घूमने वाले सूअर संक्रमित हुए. बाद में फार्म के सूअर भी इसकी चपेट में आ गए.
अफ्रीकन स्वाइन फ्लू सुअरों की सबसे घातक बीमारियों में से एक है.
अफ्रीकन स्वाइन फ्लू सुअरों की सबसे घातक बीमारियों में से एक है.

अब जान लेते हैं क्या है अफ्रीकन स्वाइन फ्लू
यह सूअरों की सबसे ज्यादा संक्रामक बीमारी है. यह बीमारी होने पर सांस लेने में दिक्कत और तेज बुखार होता है. साथ ही भूख लगना बंद हो जाती है. यह स्वाइन फ्लू से अलग तरह की बीमारी होती है. पशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी की शुरुआत पूर्वी अफ्रीका से हुई, इसलिए इसका नाम अफ्रीकन स्वाइन फ्लू रखा गया. सबसे पहले 1909 में कीनिया में इस बीमारी का मामला मिला था.
कैसे फैलती है
अफ्रीकन स्वाइन फ्लू संक्रमित जानवर के संपर्क में आने से दूसरे जानवर को होता है. जानकारी के अनुसार, जंगली सूअरों से यह बीमारी घरेलू सूअरों में आई. सूअर के मांस, लार, खून और टिश्यू से दूसरे सूअर को यह बीमारी हो सकती है. इस बीमारी का वायरस फ्रीज में रखे सूअर के मांस में कई साल तक जिंदा रह सकता है. साल 2018 में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का भयावह रूप सामने आया था. करीब 19 देशों में सूअर इसके शिकार हुए थे. उस समय लाखों सूअर मारे गए थे. अकेले चीन में 10 करोड़ सूअर खत्म हो गए थे.
क्या यह इंसानों को हो सकती है
अभी तक जांच और रिसर्च कहती है कि अफ्रीकन स्वाइन फ्लू इंसानों को नहीं होता. साल 2013 में रूस के महामारी विज्ञान विभाग ने चेताया था कि आने वाले साल में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के वायरस में बदलाव हुआ, तो यह इंसानों को हो सकता है. हालांकि अभी तक ऐसा मामला नहीं आया है.
क्या है इसका इलाज
अभी तक अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का कोई इलाज नहीं मिला है. ऐसे में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए बीमार सूअरों को मार दिया जाता है. हालांकि कई देश वैक्सीन बनाने के काम में जुटे हुए हैं.
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